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अमृतसर ट्रेन हादसा : हो गया बड़ा खुलासा, जानिए ड्राइवर ने क्यों नहीं रोकी ट्रेन?

पंजाब के अमृतसर में दशहरे के दिन रावण दहन देखने आए लोगों की खुशी अचानक मातम में तब बदल गई जब जोड़ा फाटक के पास रावण दहन के वक्त 60 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। और 50 से ज्यादा लोग घायल हो गए। इनमें से भी कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। बता दें कि अमृतसर के जोड़ा फाटक के पास रावण दहन देखने के लिए बड़ी संख्या में भीड़ उमड़ी थी और लोग रेल की पटरियों पर खड़े होकर रावण दहन देख रहे थे। उसी वक्त तेज रफ्तार में आती एक ट्रेन ने लोगों को कुचल दिया। यह ट्रेन जालंधर से चलकर अमृतसर आ रही थी तभी जोड़ा फाटक पर ये हादसा हो गया ।

अमृतसर में हुए इस हादसे में न जाने कितने लोगों के घर उजड़ गए और कितनों के आय का साधन खत्म हो गया। क्योंकि बताया जा रहा है कि कुछ घरों के एक मात्र सदस्य कमाते थे जो इस ट्रेन हादसे में मारे गए। सवाल प्रशासन पर भी खड़े किए जा रहे हैं कि जब प्रशासन को पता था कि हर साल यहां रावण दहन का कार्यक्रम होता है तो सही तरीके से बंदोबस्त क्यों नहीं किया गया। क्यों ट्रेन की स्पीड कम नहीं हुई। ऐसे कई सवाल हैं जो लोगों के मन में खड़े हो रहे हैं। बता दें कि रेल की पटरियों पर खड़े होकर लोग रावण दहन देख रहे थे और मोबाइल से उस वक्त वीडियो रिकॉर्डिंग भी कर रहे थे। तभी एक तेज गति से ट्रेन आई और करीब 70 लोगों को कुचल कर निकल गई।

इस ट्रेन हादसे के बाद भी ड्राइवर ने क्यों ट्रेन नहीं रोकी ये एक बड़ा सवाल बनकर लोगों के सामने खड़ा है। तो आज हम आपको बताएंगे कि ड्राइवर ने क्यों ट्रेन नही रोकी?

कैसे हुआ इतना बड़ा ट्रेन हादसा?

बता दें कि इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर थी। और वो कार्यक्रम में देर से पहुंची थी इसलिए कार्यक्रम देर से शुरू हुआ। रावण दहन के कार्यक्रम में देरी हुई इसलिए रावण में आग भी देरी से लगाई गई। तभी एक ट्रेन आकर लोगों को कुचल कर निकल गई। बता दें कि रावण में आग लगाने के बाद उसकी आग इतनी तेज हो गई कि लोग उससे दूर भागने लगे और रेल्वे ट्रैक तक आ पहुंचे। तभी दो ट्रेनों के आने का समय हो गया। और एक ट्रेन बहुत ही तेजी से आकर लोगों को कुचलते हुए निकल गई।

आखिर ट्रेन के ड्राइवर ने क्यों नहीं रोकी ट्रेन

ट्रेन के ड्राइवर ने बताया कि रावण जलने की वजह से आसपास में धुँआ इतना ज्यादा था कि उसे दूर से कुछ दिखा नहीं। उसने बताया कि जो भीड़ रेल्वे ट्रैक पर आ गया था वो भी उसे धुँए की वजह से दूर से  नहीं दिखा और अचानक ट्रैक पर लोग दिखे. जैसे ही उसने देखा ब्रेक लगाया, लेकिन गाड़ी की स्पीड कंट्रोल करते करते लोगों से टक्कर हो गई. गाड़ी पूरी तरह से रुकी नहीं थी कि पीछे से पब्लिक ने अटैक करना शुरू कर दिया. गार्ड ने उसे बताया कि पब्लिक ने अटैक करना शुरू कर दिया है. ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए उसने ट्रेन नहीं रोकी”.

पंजाब सरकार और रेलवे का आरोप प्रत्यारोप

इतना बड़ा ट्रेन हादसा हो गया और 70 लोगों की जानें चली गईं लेकिन कोई भी इस हादसे की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। पंजाब सरकार कह रही है कि ये रेलवे की गलती है जबकि रेलवे का कहना है इस कार्यक्रम की कोई जानकारी नहीं थी।

केंद्र और पंजाब सरकार ने की घोषणा

केंद्र ने मृतक परिवारों को 2 लाख रूपए तो पंजाब सरकार ने 5 लाख रूपए देने की घोषणा की है।

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