गांधी जयंती विशेषः जानें बापू से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

2 अक्टूबर को पूरा देश राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मना रहा है। देश को आजादी दिलाने में गांधी जी का अहम रोल था। उन्होंने देश को बहुत से ऐसे विचार दिए जो लोगों को प्रभावित करते हैं। गांधी जी ने सत्य और अंहिसा का मार्ग पर चलकर देश को ब्रिटिश हुकुमत से आजादी दिलाई थी। उनके कुछ विचारों पर लोगों को असहमति भी होती है, लेकिन गांधी जी ने देश की आजादी का नेतृत्व नहीं किया होता तो देश ना जाने कब आजाद होता। उनकी जयंती पर आपको बतातें हैं उनसे जुड़े कुछ रोचक तथ्य।
गांधी जी का पूरा नाम मोहनदास करम चंद गांधी था। उनका जन्म 2 अक्टूबर को हुआ था। उन्हें महात्मा की उपाधी रवींद्रनाथ टैगोर ने दी थी तो वहीं टैगोर को गुरुदेव की उपाधी गांधी ने दी थी। गांधी जी के पास टिकट होने के बाद भी उन्हें काला कहते हुए अंग्रेज ने ट्रेन के बाहर ढकेल दिया था। इस बात काल गांधी जी के मन पर इतना असर पड़ा की उन्होंने अंग्रेजों को ही देश से बाहर निकालने का प्रण कर लिया।


गांधीजी के लिए कहा जाता था कि उन्हें तस्वीरें खिंचवाना बिल्कुल पसंद नहीं था, लेकिन आजादी के लड़ाई के वक्त सबसे ज्यादा तस्वीरें उनकी ही खींची गई थीं।गांधीजी दक्षिण अफ्रीका में एक सफल वकील बने और उस वक्त उनकी सालाना आय 15000 डॉलर थी। एक बार चलती ट्रेन से उनका एक जूता बाहर गिर गया तो उन्होंने अपना दूसरा जूता तुरंत फेंक दिया ता। उनका कहना था कि एक जूता ना मेरे काम आता ना दूसरे के जिसके पास मेरा एक ही जूता मिलता।


गांधी जी को सबसे ज्यादा विरोध भगत सिंह के फांसी ना रोकने पर झेलना पड़ा था। भगत सिंह मात्र 23 वर्ष की उम्र में फांसी पर चढ़ गए थे और ऐसा कहा जाता है कि गांधी चाहते तो वो ये फांसी रुकवा सकते थे।गांधी जी समय के बेहद पाबंद थे। गांधी हिटलर को अपना दोस्त मानते थे और उन्हें अक्सर पत्र लिखा करत थे।
गांधी जी स्वदेशी के बहुत कट्टर समर्थक थे, लेकिन उनका पहला डॉक टिकट स्विटजरलैंड में छपवाया गया था।आजादी के वक्त उन्होंने नेहरू की स्पीच नहीं सुनी थी और वो उपवास पर थे।भारत के आजाद होने के बाद जब पत्रकार उनसे बात करने आए थे वो अंग्रेजी में बोल रहे थे। गांधी जी ने उन्हें रोककर कहा था कि हमारा देश अब आजाद हो चुका है। हम हिंदी में बात कर सकते हैं।
गांधी जी को 5 बार नोबल पुरुस्कार के लिए नॉमिनेट किया गया था, लेकिन पुरुस्कार मिलने से पहले ही उनकी हत्या कर दी गई थी। उनकी हत्या करने वाला कोई और नहीं उनका ही सबस प्रिय शिष्य नाथूराम गोडसे था।

गोडसे ने गांधी जी को 3 बार गोली मारी थी। गोली लगने के बाद से उनके मुंह से राम निकला था।गांधीजी के मरने की खबर पंडित नेहरु ने रेडियो द्वारा दी थी। नेहरु ने कहा था – राष्ट्रपिता अब नहीं रहे। गांधी जी की शवयात्रा आजाद भारत की सबसे बड़ा शवयात्रा बनी जिसमें 10 लाख लोग साथ चले थे और 15 लाख लोग रास्ते में खड़े थे