क्या आप जानते हैं भगवान विष्णु जी को सुदर्शन चक्र कैसे प्राप्त हुआ था? जानिए इस अचूक अस्त्र की कहानी

आप सभी लोगों ने विष्णु जी के अवतारों के बारे में तो सुना ही होगा भगवान विष्णु जी ने जब जब पाप का बोझ अधिक हुआ है तब तब किसी ना किसी अवतार में यह पाप का नाश करने के लिए आए हैं भगवान विष्णु जी का सबसे अमोघ अस्त्र सुदर्शन चक्र है और पुराणों में इस बात का उल्लेख मिलता है कि इस चक्र ने देवताओं की रक्षा तथा राक्षसों के संहार में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है भगवान विष्णु जी के पास जो सुदर्शन चक्र है इसको एक बार छोड़ने के पश्चात यह अपने लक्ष्य का पीछा करता रहता है और यह जब तक वापस नहीं लौटता जब तक अपने लक्ष्य का अंत ना कर ले, अपने लक्ष्य का अंत करने के पश्चात यह वापस अपने स्थान पर आ जाता है इस सुदर्शन चक्र को भगवान विष्णु जी की तर्जनी उंगली में हमेशा देखा गया है यह चक्र सर्वप्रथम विष्णु जी को ही प्राप्त हुआ था परंतु आपने कभी इस बारे में सोचा है कि आखिर भगवान विष्णु जी के पास है सुदर्शन चक्र कैसे आया? यह स्पष्ट नहीं है क्योंकि इससे संबंधित कई कहानियां प्रचलित है आज हम आपको इस लेख के माध्यम से भगवान विष्णु जी के सुदर्शन चक्र की प्राप्ति के पीछे प्रचलित कहानियों के बारे में बताने वाले हैं।

प्रचलित कहानियों के अनुसार ऐसा माना जाता है कि जब राक्षसों का अत्याचार बहुत अधिक बढ़ गया था तब सभी देवता श्री हरि विष्णु जी के पास पहुंचे थे तब भगवान विष्णु जी ने कैलाश पर्वत जाकर भगवान शिव जी की विधि पूर्वक आराधना की थी विष्णु शिव के स्तुति के दौरान एक कमल अर्पण करते, तब भगवान शिव ने विष्णु जी की परीक्षा लेने के लिए उनके द्वारा लाए कमल में से एक कमल छुपा लिया विष्णु जी, शिव जी की यह माया समझ नहीं पाए थे तब विष्णु जी ने एक कमल की पूर्ति के लिए अपना एक नेत्र निकालकर शिव जी को अर्पित कर दिया था।

भगवान विष्णु जी की यह अपार भक्ति देखकर भगवान शिव जी प्रसन्न हुए और विष्णु जी को अजेय अस्त्र सुदर्शन चक्र प्रदान किया था इसके साथ ही शिव जी ने यह भी कहा था इसको लेकर निर्भीक होकर शत्रुओ का संहार कीजिए तब इस प्रकार भगवान विष्णु जी ने राक्षसों का संहार किया था।

भगवान शिव जी ने सुदर्शन चक्र का निर्माण किया था जो बाद में विष्णु जी को सौंप दिया था जिसको विष्णु जी ने देवी पार्वती को प्रदान कर दिया था सुदर्शन चक्र के संबंध में यह माना जाता है कि भगवान विष्णु जी के श्री कृष्ण अवतार के पास यह चक्र परशुराम से प्राप्त हुआ था सुदर्शन चक्र के अलावा अन्य चक्रों के नाम पुराणों में चक्र देवी देवताओं को ही प्राप्त हुए थे उन सभी के अलग अलग नाम थे शिव के चक्र का नाम भवरेंदु विष्णु के चक्र का नाम कांता चक्र और देवी का चक्रम मृत्यु मंजरी के नाम से जाना जाता था इस प्रकार भगवान विष्णु जी को राक्षसों के संहार करने हेतु भगवान शिव से सुदर्शन चक्र की प्राप्ति हुई थी।