गर्दन दर्द की समस्या से हैं परेशान तो इसे नहीं करें इग्नोर, हो सकती है ये बड़ी बीमारी

अक्सर छोटे दर्द को लोग नजरअंदाज कर देते हैं। गर्दन में दर्द होने वाले दर्द या अकड़न को अगर आप भी इग्नोर कर देते हैं तो ये खतरनाक बीमारी का लक्षण हो सकता है। जिसे सर्वाइकल कहा जाता है। अगर लगातार दर्द को इग्नोर किया जाए तो ये बीमारी बढ़ भी सकता है, इसे सर्वाइकल डिजेनेरेटिव डिस्क भी कहा जाता है।

यह बीमारी पुरूषों के अपेक्षा महिलाओं में अधिक होती है। इसका सबसे प्रमुख कारण बढ़ती उम्र और उसी के साथ बढ़ती कमजोरी है। महिलाओं में प्रेग्नेंसी, हार्मोनल बदलाव और कमजोरी की वजह से ये सर्वाइकल होने की संभावना अधिक होती है। गर्दन में अगर लंबे समय से दर्द हो रहा हो तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ये सर्वाइकल का लक्षण भी हो सकता है। तो आइये जानते हैं क्या होती है, सर्वाइकल के लक्षण, कारण और इलाज।

लक्षण-

  • गर्दन में खिंचाव- गर्दन में खिंचाव कई कारणों से हो सकता है। सोने के गलत तरीके, उठने-बैठने के गलत तरीके से भी गर्दन में खिंचाव हो सकता है। सर्वाइकल की वजह से गर्दन मेंं खिंचाव रह सकता है। अगर आप कई दिनों से गर्दन में खिंचाव महसूस कर रहे हैं। तो ये सर्वाइकल का कारण हो सकता है। इसके लिए चिकित्सक से जरूर संपर्क करें।

  • गर्दन झुकाने और हिलाने में दर्द होना- अक्सर ज्यादा देर तक बैठकर काम करने वाले लोग, या डेस्क पर कंप्यूटर के सामने बैठकर काम करने से इस तरह की समस्या अधिक होती है। दरअसल ज्यादा देर तक गर्दन झुकाकर या गर्दन सीधी करके कंप्यूटर के सामने बैठने से रीढ़ की हड्डियों में कड़ापन आ जाता है। और गर्दन में लगातार दर्द होने का कारण सर्वाइकल डिजेनेरेटिव डिस्क हो सकता है।
  • शरीर के अंगों में जकड़न महसूस होना- बहुत बार ऐसा अनुभव होता है कि मांसपेशियों में जकड़न आ गई है और शरीर को हिलाने डुलाने से हमारी मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द शुरू हो जाता है। इसे सामान्यतः लोग इग्नोर कर देते हैं, लेकिन ये समस्या बड़ी हो सकती है। ये सर्वाइकल का कारण भी हो सकता है।

  • गर्दन दर्द के साथ साथ कभी कंधों में दर्द होने लगता है।

  • हाथों का सुन्न होना और झुनझुनाहट।

  • इस बीमारी के बढ़ जाने से कभी कभी चक्कर और उल्टियां भी आने लगती हैं।

क्यों होता है सर्वाइकल डिस्क रोग-

सर्वाइकल डिजेनेरेटिव डिस्क रोग का कारण गर्दन के डि-जेनेरेशन वाली नसों पर दबाव पड़ना है। ये दबाव सामान्यतः ज्यादा काम करने, भारी बोझ उठाने, सिर झुकाकर काम करने, लगातार पढ़ने, हड्डियों के कमजोर हो जाने हो सकता है। इससे गर्दन में भारी दर्द के साथ कंधों में भी दर्द होने लगता है।

क्या होता है सर्वाइकल डिजेनेरेटिव डिस्क रोग का इलाज-

इस दर्द का इलाज कुछ थैरेपी के माध्यम से किया जा सकता है। जैसे हॉट एंड कोल्ड थैरेपी मतलब बर्फ के टुकड़ों को एक आइस बैग में रखकर उसे गर्दन में दर्द वाले जगह पर रखकर हल्का हल्का मसाज करने से राहत मिल सकता है। इसी तरह से हॉट थैरेपी लेकर भी गर्दन के दर्द को दूर किया जा सकता है। इस बीमारी को ठीक करने के लिए कैस्टर अॉयल थैरेपी भी ली जाती है। विभिन्न थैरेपी के माध्यम से गर्दन के मांसपेशियों और ऊतकों को लचीलाा बनाया जाता है। ये थैरेपी गर्दन दर्द के लिए बहुत ही कारगर हैं। इस थैरेपी से जल्द ही आराम मिलने की संभावना रहती है।