चीनी सैनिकों का दुस्साहस, चमोली में भारतीय सीमा में चार किलोमीटर अंदर तक घुसे चीनी सैनिक

चमोली: चीन के बारे में सभी लोग जानते हैं कि चीन किस तरह की चाल चलता है। एक तरफ़ यह दिखावा करता है कि वह भारत का कितना हितैषी है और भारत की भलाई चाहता है, लेकिन उसकी करतूतें कुछ और ही कहानी कहती हैं। अभी कुछ दिनों पहले ही चीनी विदेश मंत्री ने कहा था कि वह चाहता है कि भारत और पाकिस्तान के बीच दोस्ती हो जाए। यह दक्षिण एशिया के लिए बहुत ज़रूरी है। दोनो ही देश दक्षिण एशिया के महत्वपूर्ण देश हैं। इसलिए वह चाहता है कि दोनो देशों को एक करने में वह महत्वपूर्ण भूमिका निभाए।

मिली है चीनी सैनिकों के घुसपैठ की सूचना:

चीन का यह इतिहास रहा है कि दूसरे देशों की सीमाओं में ज़बरदस्ती घुसकर क़ब्ज़ा कर लेता है। हाल ही में चीन ने एक बार फिर से ऐसा दुस्साहस किया है। जानकारी के अनुसार चमोली से सटी सीमा पर बाड़ाहोती क्षेत्र में एक बार चीनी सैनिकों की घुसपैठ की सूचना मिली है। बताया जा रहा है कि बीते माह अगस्त में तीन बार चीनी सैनिक भारतीय सीमा में लगभग चार किलोमीटर तक अंदर घुस आए थे। हालाँकि चमोली के ज़िलाधिकारी स्वाति भदौरिया ने ऐसी किसी जानकारी होने से इनकार करते हुए कहा कि इसके बारे में सेना ही कुछ बता सकती है।

आपको बता दें एक रिपोर्ट में यह ख़ुलासा हुआ था कि चीनी सेना ने जुलाई महीने में भारतीय सीमा में कई बार घुसपैठ की थी। इससे पहले 26 जुलाई को भी चीनी सैनिकों ने भारतीय सीमा में घुसपैठ की थी। चमोली के बाड़ाहोती क्षेत्र में लगभग सौ से दो सौ सैनिक भारतीय सीमा में लगभग चार किलोमीटर तक अंदर घुस आए थे। आईटीबीपी की अग्रिम चौकी रिमखिम पर तैनात जवानों से नियमित गैस्ट के दौरान उनका सामना हुआ था। जैसे ही चीनी सैनिकों ने आईटीबीपी के दल को देखा वो वापस लौट गए।

प्रशासन का एक दल गया था क्षेत्र का जायज़ा लेने:

आपकी जानकारी के लिए बता दें जोशीमठ से 105 किलोमीटर दूर चमोली में चीन से जुड़ी भारतीय सीमा घुसपैठ की दृष्टि से संवेदनशील मानी जाती है। ख़ासतौर से यहाँ 80 किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ बाड़ाहोती चरागाह काफ़ी संवेदनशील इलाक़ा है। यहाँ स्थानीय लोग अपने मवेशियों के साथ आते हैं। बताय जा रहा है कि जून के महीने में इस इलाक़े में दो चीनी हेलिकॉप्टर देखे गए थे। जब इस घटना के बारे में प्रशासन को जानकारी हुई तो उसका एक दल क्षेत्र का जायज़ा लेने के लिए भी गया था।

इसके बाद 18 जुलाई को भी प्रशासन का 17 सदस्यों वाली एक टीम सीमावर्ती क्षेत्र का जायज़ा लेने के लिए गयी थी, लेकिन भारी बारिश की वजह से रास्ते ख़राब हो गए थे। इस वजह से दल को वापस लौटना पड़ा था। बता दें साल में चार बार प्रशासन की टीम बाड़ाहोती का जायज़ा लेने के लिए जाती है। इससे पहले 2014 में भी इस क्षेत्र में चीन का विमान देखा गया था। 2016 में इस क्षेत्र के निरीक्षण के लिए गयी राजस्व टीम का सामना चीनी सैनिकों से हुआ था। सैनिकों ने टीम को लौट जानें का इशारा भी किया था। इस घटना की रिपोर्ट केंद्र सरकार को भी भेजी गयी थी। 2015 में चीनी सेना ने हद पार करते हुए चरवाहों के खाद्यान्न भी नष्ट कर दिए थे।