योगी आदित्यनाथ के राज में यूपी बोर्ड भी आगे, डेढ़ साल में हुए हैं ये बदलाव

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के सत्ता सम्भालने के बाद से कई बड़े बदलाव हुए हैं। उनमें से एक बड़ा बदलाव शिक्षा जगत में सुधार भी है। उत्तर प्रदेश में 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा की तारीख़ जारी कर दी गयी है। आपको बता दें इस बार परीक्षा की तारीख़ परीक्षा से 6 महीने पहले ही जारी कर दी गयी है। यूपी सरकार यूपी बोर्ड को अन्य शिक्षा बोर्ड के सामने खड़ा करने का प्रयास कर रही है। सरकार यूपी बोर्ड में पढ़ाई के स्तर में सुधार लानें के लिए कई क़दम उठा चुकी है। योगी आदित्यनाथ की सरकार में यूपी बोर्ड में कई बड़े बदलाव हुए हैं। आज हम आपको उसके बारे में बताएँगे।

समय पर परीक्षाएँ और रिज़ल्ट:

 

अभी यूपी बोर्ड की परीक्षा में काफ़ी समय है, लेकिन उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने बता दिया है कि इस बार परीक्षा का योजन 7 फ़रवरी 2019 से किया जाएगा। यह परीक्षा जल्दी हो रही है और नतीजे भी जल्दी आ जाएँगे। पिछले साल भी बोर्ड की परीक्षा के बाद रिज़ल्ट जल्दी जारी कर दिए गए थे, ताकि परीक्षार्थियों को आगे की पढ़ाई के लिए एडमिशन लेने में कोई दिक़्क़त ना हो।

 

यूपी सरकार इस बार परीक्षा में होने वाली नक़ल पर लगाम लगाने में सफल हुई है। पिछले साल भी परीक्षा में नक़ल पर नकेल कसने की वजह से 10 लाख परीक्षार्थियों ने बीच में ही परीक्षा को छोड़ दिया था। इस बार भी नक़ल के डर की वजह से कम लोगों ने आवेदन किया है। इस बार भी परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों की संख्या में 9 लाख की भारी कमी हुई है। पिछले साल परीक्षा में शमिलन होने वाले उम्मीदवारों की संख्या 66.39 लाख थी। इस तरह से देखा जाए तो छात्रों की संख्या में 8.52 लाख की कमी आयी है। इसमें हाईस्कूल में 31.56 लाख और इंटरमीडिएट में 24.90 लाख छात्र-छात्राओं का पंजीकरण हुआ है।

यूपी बोर्ड ने सीबीएसई की बराबरी करने के लिए अब अपने कोर्स में भी बदलाव करने का फ़ैसला लिया है। यूपी बोर्ड भी अब एनसीईआरटी कोर्स लागू करेगी। इसी साल जनवरी में किए गए इस फ़ैसले में कहा गया था कि अब यूपी बोर्ड के विद्यार्थी भी एनसीईआरटी कोर्ट की पढ़ाई करेंगे। इससे बच्चों को प्रदेश स्तर से साथ ही विश्व स्तर तक का ज्ञान हासिल होगा।

विदेशी भाषा:

अभी तक सभी राज्य बोर्डों में एक्स्ट्रा भाषाओं में क्षेत्रीय भाषाओं की ही पढ़ाई होती थी। लेकिन यूपी में ऐसा नहीं होगा। यूपी बोर्ड में एक्स्ट्रा भाषाओं में अब विदेशी भाषाओं को शामिल किया गया है। इससे यूपी बोर्ड में पढ़ाई करने वाले छात्र अब विदेशी भाषाएँ भी सीख सकेंगे।

यूपी बोर्ड के छात्रों को हमेशा से ही परीक्षा के सेंटर की चिंता रहती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। पहले जहाँ छात्रों के परीक्षा सेंटर कई किलोमीटर दूर हुआ करते थे, अब छात्रों के परीक्षा सेंटर स्कूल से 20 किलोमीटर से ज़्यादा दूर नहीं हो सकते हैं।

यूपी सरकार के इन क़दमों से ऐसा लग रहा है कि बहुत जल्दी यूपी बोर्ड भी सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड को कड़ी टक्कर देने लायक बन जाएगा। वाक़ई योगी सरकार का शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा योगदान है।