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डॉ. राधाकृष्णन के इन 10 अनमोल वचन, आपको कभी असफल नहीं होने देंगे

एक गुरु के जीवन में शिष्य की क्या एहमियत होती है वो एक शिष्य की सफलता ही बतलाती है. व्यक्ति के अंदर कौन सा हुनर छिपा है ये बात सिर्फ एक शिक्षक ही पहचान पाता है और उस व्यक्ति को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं. भारत में जिस शिक्षक को सबसे ज्यादा सम्मान मिला वे डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ही थे उन्ही के सम्मान में तो 5 सितंबर का दिन शिक्षक दिवस के तौर पर मनाया जाने लगा था. डॉ. राधाकृष्णन के इन 10 अनमोल वचन, जिन्हें अगर हर शिक्षक और शिष्य अपना ले तो उन्हें कभी किसी असफलता छू नहीं सकती. उनके हिसाब से शिक्षक को हमेशा अपने हर शिष्य पर ध्यान देना चाहिए, ना सिर्फ उन शिष्यों पर जो कमजोर होते हैं.

डॉ. राधाकृष्णन के इन 10 अनमोल वचन

वैसे तो बहुत से लोग अपनी सोच लिखावट के जरिए व्यक्त करते हैं लेकिन डॉ. राधाकृष्णन के बताए हुए अनमोल वचनों को हर किसी को अपने जीवन में उतारकर आगे बढ़ना चाहिए. जीवन में अगर किसी महान पुरुष की छवि आप अपने जीवन में उतार लें तो जीवन बहुत आसान हो जाता है. खैर चलिए बताते हैं आपको उनके कुछ अनमोल वचन.

1. शिक्षक वो नहीं होता जो छात्र के दिमाग में हर बातों को जबरदस्ती ठूंसे, बल्कि असल में शिक्षक वो कहता है जो उसे आने वाले कल की चुनौतियों के लिए तैयार करते हैं.

2. पुस्तकें वह साधन है जिनके माध्यम से हम विभिन्न संस्कृतियों के बीच पुल का निर्माण कर सकते हैं.

3. किताबें पढ़ने से हमें एकांत में विचार करने की आदत से सच्ची खुशी मिलती है.

4. दुनिया के सारे संगठन अप्रभावी हो जाएंगे यदि ये सत्य कि ज्ञान अज्ञान से शक्तिशाली होता है उन्हें प्रेरित नहीं करता.

5. शिक्षा का परिणाम एक मुक्त रचनात्मक व्यक्ति होना चाहिए जो ऐतिहासिक परिस्थियों और प्राकृतिक आपदाओं के विरुद्ध लड़ सके.

6. ज्ञान हमें शक्ति देता है, मगर प्रेम हमें परिपूर्णता देता है.

7. कोई भी आजादी तब तक सच्ची नहीं होती, जब तक उसे विचार की आजादी प्राप्त नहीं होती. किसी भी धार्मिक विश्वास या राजनीतिक सिद्धांत को सत्य की खोज में बाधा नहीं होनी चाहिए.

8. शिक्षा के द्वारा ही मानव मस्तिष्त ता सदुपयोग किया जा सकता है. अतविश्व को एक ही इकाई मानकर शिक्षा का प्रबंधन करना चाहिए.

9. अगर हम दुनिया के इतिहास को देखे, तो ये पाएंगे कि सभ्यता का निर्माण उन महान ऋषियों और वैज्ञानिकों के हाथों से हुआ है, जो स्वयं विचार करने की सामर्थ्य रखते हैं, जो देश और काल की गहराइयों में प्रवेश करते हैं उनके रहस्यों का पता लहाते हैं और इसतरह से प्राप्त ज्ञान का उपयोग विश्व श्रेय या लोक-कल्याण के लिए करते हैं.

10. भगवान की पूजा नहीं होती बल्कि उन लोगों की पूजा होती है जो उनके नाम पर बोलने का दावा करते हैं.

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