रिक्शा चालक की बेटी ने एशियाई खेलों में गोल्ड जीतकर रचा इतिहास, माँ करती हैं चाय बाग़ान में काम

उत्तरी बंगाल के जलपाईगुड़ी शहर में उस समय जश्न का माहौल हो गया, जब इस शहर के एक रिक्शा चालक की बेटी स्वप्ना बर्मन ने एशियाई खेलों में सोने का तमग़ा जीता। स्वप्ना ने जाकार्ता में चल रहे 18वें एशियाई खेलों की हेप्टाथलन प्रतियोगिता में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए सोने का पदक जीता। इसके साथ ही वह इस प्रतियोगिता में सोना जितने वाली पहली भारतीय महिला भी बन गयी हैं। स्वप्ना ने भारत का सिर गर्व से ऊँचा कर दिया है। आपको बता दें इस बार के एशियाई खेलों में कई खिलाड़ियों ने इतिहास रचा है।

स्वप्ना ने दाँत में दर्द होने के बाद भी सात प्रतियोगिताओं में कुल 6026 अंक के साथ पहला स्थान हासिल किया। जैसे ही स्वप्ना की जीत तय हुई, जलपाईगुड़ी में उसके घर के सामने लोगों का जमावड़ा लग गया। चरो तरफ़ ख़ुशी का माहौल बन गया और हर तरफ़ मिठाइयाँ बाँटी जानें लगी। बता ने 21 वर्षीय स्वप्ना बर्मन का नाम देश के कुछ ही लोगों को पता होगा, लेकिन सोना जीतने के बाद हर तरफ़ उनके नाम की ही चर्चा हो रही है। एशियाई खेलों में इस एथलीट ने वो कर दिखाया है, जो आजतक किसी दूसरी महिला एथलीट ने नहीं किया था।

इस कामयाबी के बाद स्वप्ना बड़े एथलीटों में शामिल हो गयी हैं। स्वप्ना की कामयाबी पर देश को नाज़ है। आपकी जानकारी के लिए बता दें स्वप्ना का पूरा जीवन संघर्षों से भरा हुआ है। इनकी माँ चाय बाग़ान में मज़दूरी करती हैं, वहीं पिता पंचम बर्मन रिक्शा चलाकर परिवार का गुज़ारा करते हैं। लेकिन पिछले कुछ दिनों से उनकी तबियत काफ़ी ख़राब है, जिसकी वजह से वह बिस्तर पर पड़े हुए हैं। आपको बता दें स्वप्ना के पैरों में छह उँगलियाँ है, जिसकी वजह से उन्हें पैरों में जूता पहनने और तेज़ी से दौड़ने में दिक़्क़त आती है।

पाँव की ज़्यादा चौड़ाई खेलों में उनकी लैंडिंग को और मुश्किल बना देती है। इसके बाद भी इन्होंने जो कर दिखाया है, उसके लिए इनके जज़्बे को सलाम। पूर्व भारतीय क्रिकेटर राहुल द्रविण की गो स्पोर्ट्स फ़ाउंडेशन ने इनके हुनर को पहचाना और इनकी मदद करनी शुरू कर दी। इसकी वजह से स्वप्ना अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन कर पा रही हैं। स्वप्ना को जो भी इनाम मिलता है, इससे वह पिता की देखरेख और घर का ख़र्च चलाने के लिए करती हैं। इनके घर की छत और दीवारें भी पक्की नहीं है। स्वप्ना ने एथलेटिक्स में हेप्टाथलन में 2017 में पटियाला फ़ेडरेशन कप में गोल्ड मेडल जीता, इसके अलावा भुवनेश्वर में एशियन एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में भी इन्होंने गोल्ड मेडल जीता है।

अपनी बेटी की सफलता से ख़ुश स्वप्ना की माँ बाशोना इतनी भावुक हो गयीं कि उनकी आँखें भर आयी और उनके मुँह से शब्द तक नहीं निकल पा रहे थे। बेटी के लिए वह भगवान के सामने पूरे दिन अर्ज़ी लगा रही थीं। आपको जानकर हैरानी होगी कि स्वप्ना ने ख़ुद को काली माता के मंदिर में बंद कर रखा था। स्वप्ना की माँ ने अपनी बेटी को इतिहास रचते हुए नहीं देखा क्योंकि वह बेटी की लिए दुआ करने में व्यस्त थी। इस बार के एशियाई खेलों में एक से बढ़कर एक रिकार्ड टूटे और बने हैं। इस बार भारतीय खिलाड़ियों का एशियाई खेलों में प्रदर्शन काफ़ी अच्छा रहा है।