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नोबल विजेता अमर्त्य सेन ने कहा, भाजपा को हराने के लिए एक साथ आए ग़ैर साम्प्रदायिक दल

कोलकाता: भारत की राजनीति में इस समय काफ़ी बवाल मचा हुआ है। भारत की ज़्यादातर राजनीतिक पार्टियाँ भाजपा की सरकार को केंद्र में नहीं देखना चाहती हैं। विपक्षी पार्टियों का कहना है कि भाजपा का शासन देश के लोकतंत्र के लिए बड़ा ख़तरा है। अभी कुछ दिनों पहले अखिलेश यादव ने कहा था कि भाजपा देश को अविकसित बनाने की साज़िश रच रही है। वहीं कांग्रेस भी इस तरह की बातें कई बार कह चुकी है। भाजपा को केंद्र से हटाने के लिए सभी पार्टियाँ एक साथ मंच भी आयी हैं।

विपक्ष है महागठबंधन की तैयारी में:

2019 में लोकसभा का चुनाव होने वाला है। जिस तरह से मोदी सरकार ने देश के लगभग सभी राज्यों में अपने जीत का परचम फहराया है, उससे यही लगता है कि भाजपा की स्थिति बहुत अच्छी है और उसे 2019 का लोकसभा चुनाव जीतने से कोई नहीं रोक सकता है। यह बात विपक्ष को फूटी आँख भी नहीं सुहा रही है। इसी वजह से कांग्रेस देश की अन्य विपक्षी पार्टियों के साथ मिलकर महागठबँधन बनाने की तैयारी में है। भाजपा को 2019 में रोक पाना किसी एक पार्टी के बस की बात नहीं है।

नहीं हिचकना चाहिए वामदलों को शामिल होने से:

इस बात को समझते हुए सभी पार्टियाँ एकजुट हो रही हैं। वहीं कई पार्टियाँ भाजपा के ख़िलाफ़ महागठबंधन में आने के लिए तैयार नहीं हो रही हैं। भाजपा की जीत को केवल देश की विपक्षी पार्टियाँ ही ख़तरा नहीं मानती हैं, बल्कि कुछ अन्य लोग भी हैं जो भाजपा की जीत को लोकतंत्र के लिए ख़तरा मानते हैं। इसी में से एक हैं नोबल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन। उन्होंने कहा कि 2019 लोकसभा चुनाव में देश की सभी साम्प्रदायिक ताक़तों को एक साथ आना चाहिए। उन्होंने कहा कि वामदलों को उनके साथ शामिल होने से हिचकना नहीं चाहिए, क्योंकि देश का लोकतंत्र ख़तरे में है।

अमर्त्य सेन ने कहा कि हमें निश्चित रूप से निरंकुशता का विरोध करना चाहिए। मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए अमर्त्य सेन ने कहा कि हमें निश्चित रूप से निरंकुश प्रवृत्तियों के ख़िलाफ़ लड़ना चाहिए। हमें निश्चित रूप से उन मुद्दों को आलोचना करनी चाहिए, जहाँ हमें ग़ैर-साम्प्रदायिक दक्षिणपंथी ताक़तों के विरोध की आवश्यकता हो। अमर्त्य सेन ने आगे कहा कि जब बात संप्रदायिकता से लड़ने की आए तो हमें बिलकुल अपने हाथ पीछे नहीं खींचने चाहिए। यह आज के समय में एक बहुत बड़ा ख़तरा बन गया है।

अमर्त्य सेन ने आगे भाजपा सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को केवल 31 प्रतिशत ही वोट मिले और राजनीति में अपने ग़लत इरादों की वजह से पार्टी सत्ता में आ गयी। आपकी जानकारी के लिए बता दें अमर्त्य सेन ने यह सब कोलकाता के शिशिर मंच सभागार में कहा। सवाल-जवाब सत्र के दौरान अमर्त्य सेन ने कहा कि वर्ष 2014 के चुनावों में क्या हुआ? एक पार्टी जिसे कुल 55 प्रतिशत सीटें मिली, लेकिन उसने कुल वोट प्रतिशत का केवल 31 प्रतिशत ही पाया और सत्ता में आ गयी। यह एक ग़लत इरादों वाली पार्टी है।

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