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डोकलाम विवाद के बाद पहली बार आमने-सामने आए भारत-चीन के रक्षामंत्री, बनी इस चीज़ पर सहमति

भारत चीन के रिश्तों के बारे में किसी को बताने की ज़रूरत नहीं है। दोनो के बीच काफ़ी समय से विवाद चलता रहा है। एक तरफ़ जहाँ भारत हमेशा नर्म रवैया अपनाता रहा है, वही चीन हर बार ज़ोर-ज़बरदस्ती करता रहता है। हाल ही में मिली जानकारी के अनुसार चीनी सैनिकों ने पिछले महीने भारत की सीमा में कई बार घुसपैठ की थी। भारत हर बार यही चाहता है कि उसके दोनो पड़ोसियों के साथ अच्छे सम्बंध बने, लेकिन भारत के दोनो पड़ोसी पाकिस्तान और चीन शांति से रहना ही नहीं चाहते हैं।

भारत की हर बार यही कोशिश होती है कि दोनो देशों से शांतिपूर्ण सम्बंध बने रहे ताकि देश अपने विकास के कार्यों पर ध्यान दे सके। लेकिन ऐसा होता नहीं है। कोई ना कोई चालबाज़ी करके दोनो देश चीन और पाकिस्तान भारत को परेशान करते ही रहते हैं। हाल ही में भारत और चीन के रक्षामंत्रियों की मुलाक़ात हुई। दोनो ने मिलकर एक दूसरे के साथ सैन्य सहयोग बढ़ने का फ़ैसला किया है। भारत की रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण और चीन के रक्षामंत्री वेंग फेंघ के बीच गुरुवार को दो घंटे चली मुलाक़ात के बाद यह निर्णय लिया गया।

जल्दी शुरू की जाएगी दोनो देशों के बीच हॉटलाइन सेवा:

आपकी जानकारी के लिए बता दें डोकलाम विवाद के बाद यह दोनो देशों के रक्षा मंत्रियों की पहली द्विपक्षीय बातचीत है। डोकलाम विवाद की वजह से दोनो देशों के बीच काफ़ी दूरी बन गयी थी। दोनो देशों ने डोकलाम जैसे टकराव से बचने के लिए सेना के बीच बातचीत का सिलसिला शुरू करने पर सहमति बनाई है। रक्षामंत्रलय के अनुसार दोनो देशों के बीच प्रस्तावित हॉटलाइन सेवा भी जल्दी हु शुरू की जाएगी। दोनो देशों के सशस्त्र बलों के बीच प्रशिक्षण, संयुक्त अभ्यास और अन्य पेशेवर बातचीत और सम्बन्धों का विस्तार करने का फ़ैसला लिया है।

यह है भारत की संप्रभुता का हनन:

भारत और चीन के बीच 2006 में रक्षा आदान-प्रदान और सहयोग पर समझौता हुआ था, उसकी जगह नया द्विपक्षीय समझौता करने का निर्णय लिया गया है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार निर्मला सीतारमण ने चीन और और पाकिस्तान आर्थिक कोरिडोरे मुद्दे पर भी बातचीत की। सीतारमण ने कहा कि यह रास्ता पाकिस्तान के क़ब्ज़े वाले कश्मीर से होकर गुज़रता है। यह भारत की संप्रभुता का हनन है। इसके अलावा दोनो देश के नेताओं ने सीमा पार आतंक के कारण भारत की चुनौतियों, अफगानिस्तान में शांति-स्थिरता, दक्षिण चीन सागर में परिवहन जैसे विषयों पर भी खुलकर बातचीत की।

जानकारी के अनुसार इस मुलाक़ात का मुख्य मक़सद चीन के वुहान में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शि जीनपिंग के बीच हुई अनौपचारिक मुलाक़ात के दौरान लिए गए फ़ैसलों को लागू करना था। ज्ञात हो भारतीय-चीनी सीमा पर पर डोकलाम इलाक़े में दोनो देशों के बीच 16 जून 2017 से लेकर 28 अगस्त 2017 तक टकराव चलता रहा था। इस दौरान दोनो देशों के बीच हालात काफ़ी तनावपूर्ण हो गए थे। यहाँ तक की दोनो देशों ने युद्ध के लिए भी अपनी-अपनी कमर कस ली थी। ऐसा लग रहा था कि दोनो देशों के बीच फिर से युद्ध हो जाएगा। बाद में अगस्त में यह टकराव ख़त्म हुआ और दोनो देशों ने अपनी-अपनी सेनाएँ वापस बुलाने पर सहमति बनाई।

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