घर से भागे प्रेमी जोड़ों को इस महादेव मंदिर में मिलता है सहारा, ख़ुद करते हैं जोड़े की रक्षा

भगवान शिव की महिमा अपरंपार है। भगवान शिव की लीलाओं के बारे में बताया नहीं जा सकता है क्योंकि वह बहुत ज़्यादा हैं। भगवान हर रूप में अपने भक्त की रक्षा के लिए मौजूद रहते हैं। कहा जाता है कि भगवान शिव इतने भोले हैं कि वह अच्छे और बुरे में फ़र्क़ भी नहीं करते हैं और अपने हर भक्त की मनोकामना पूर्ण कर देते हैं। इन्होंने कई राक्षसों को भी वरदान दिया है। ऐसे में अगर कोई मनुष्य सच्चे मन से इनकी आराधना करे तो उसकी सभी इच्छाएँ पूरी कर देते हैं।

जिसका कोई नहीं होता, उसका भगवान होता है:

महादेव के भारत भर में हज़ारों मंदिर हैं, लेकिन कुछ मंदिर अपनी ख़ासियतों की वजह से पूरे विश्व में प्रसिद्ध हैं। आज हम आपको महादेव के एक ऐसे ही मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं। हिमांचल प्रदेश की ख़ूबसूरती से तो आप सभी लोग वाक़िफ़ होंगे। यह अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। लेकिन कुल्लू के शांघड गाँव के देवता शंगचूल महादेव के बारे में जानकर आप हैरान हो जाएँगे। अक्सर आपने यह कहावत सुनी होगी कि जिसका कोई नहीं होता है, उसका भगवान होता है, तो यह कहावत यहाँ बिलकुल सही बैठती है।

मंदिर की सीमा में रहने वाले प्रेमी जोड़े का कुछ नहीं बिगाड़ पाता कोई:

जी हाँ कुछ प्रेमी जोड़ों की दुश्मन पूरी दुनिया होती है। उन्हें कोई सहारा नहीं देता है। लेकिन जब कोई घर से भागा हुआ प्रेमी जोड़ा शंगचूल महादेव के मंदिर में आता है तो उसे भगवान आसरा देते हैं। केवल यही नहीं महादेव उस प्रेमी जोड़े की रक्षा भी ख़ुद ही करते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें शांघड गाँव कुल्लू से 58 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। कहा जाता है कि जो भी प्रेमी जोड़ा इस मंदिर की सीमा में रहता है, उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ पाता है। मंदिर लगभग 100 बीघे में फैला हुआ है।

जब कोई प्रेमी जोड़ा घर से भागकर इस मंदिर में पहुँचता है तो उसे भगवान की शरण में माना जाता है। इस गाँव के लोग परम्परा का सदियों से पालन कर रहे हैं। इस गाँव में पुलिस के आने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। शंगचूल महादेव मंदिर में प्रेमी जोड़े को किसी बात के लिए मजबूर करना या विवाद करना पाप माना जाता है। इसी वजह से यहाँ ये प्रतिबंधित है। मंदिर क्षेत्र में शराब, सिगरेट या अन्य किसी तरह के नशे की मनाही है। चमड़े का सामान लेकर आना भी इस मंदिर में मना है। इस मंदिर में किसी भी तरह के हथियार के साथ घुसना भी मना है।

प्रेमी जोड़ा जब तक इस मंदिर में रहता है, यहाँ के पंडित उसकी ख़ातिरदारी करते हैं। अज्ञातवास के समय इसी मंदिर में पांडव रुके हुए थे तब कौरव उनका पीछा करते हुए यहाँ पहुँच गए थे। तब शंगचूल महादेव ने कौरवों को यह कहते हुए वापस लौटा दिया था कि यह मेरा क्षेत्र हैं और जो मेरी शरण में आएगा उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा। उसके बाद कौरव वापस लौट गए थे। तभी से यह परम्परा चली आ रही है। जानकारी के अनुसार एक बार 2015 में रात के समय मंदिर में आग लग गयी थी। इससे मंदिर में रखी मूर्तियाँ नष्ट हो गयी थीं, बाद में फिर से इसका निर्माण करवाया गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published.