अध्यात्म

2000 साल पुराने शिवमंदिर में बनी है ऐसी आकृति, देखकर हो जाएँगे दंग

भारत का एक बहुत लम्बा इतिहास रहा है। अगर भारत के धार्मिक इतिहास की बात की जाए तो भारत का धार्मिक इतिहास भी बहुत पुराना रहा है। भारत में हज़ारों सालों पहले से धर्म को बहुत महत्व दिया गया है। भारत में कई-देवी देवताओं की पूजा की जाती है। भारत में त्रिदेव के नाम से मशहूर ब्रह्मा, विष्णु और महेश को देवताओं में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। भगवान शिव की भारत में सबसे ज़्यादा पूजा की जाती है। भगवान शिव के मंदिर भी इसी वजह से भारत में सबसे ज़्यादा हैं।

भारत ही नहीं बल्कि विश्व के कई देशों में भगवान शिव के मंदिर स्थित हैं। भगवान शिव के कई ऐसे मंदिर हैं, जो इतने ज़्यादा पुराने हैं कि उसके इतिहास के बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं है। भारत एक सांस्कृतिक और पारम्परिक देश है। इसका साफ़-साफ़ असर यहाँ के मंदिरों पर देखा जा सकता है। भारत में कई चमत्कारी मंदिर भी स्थित हैं, जिन्हें देखने के लिए दुनिया के कोने-कोने से लोग भारत आते हैं। कुछ मंदिर अपने रहस्य के लिए ही जाने जाते हैं।

नहीं हो रहा है लोगों को अपनी आँखों पर यक़ीन:

कई मंदिर ऐसे भी हैं, जो इतने रहस्यमयी हैं कि जब उनके रहस्य के बारे में लोगों को पता चलता है तो लोगों की हैरानी का ठिकाना नहीं रहता है। आज हम आपको एक ऐसे ही मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जो तमिलनाडु में स्थित है। पंचवर्णास्वामी मंदिर के नाम से प्रसिद्ध इस मंदिर में कुछ ऐसी चीज़ मिली है, जिसे देखने के बाद लोगों को अपनी आँखों पर यक़ीन ही नहीं हो रहा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें मंदिर की दीवार पर एक सायकिल की आकृति बनी हुई है, जिसे देखने के बाद हर कोई हैरान है। मंदिर पर बनी सायकिल की आकृति वर्तमान समय की तकनीकी की भविष्यवाणी के तौर पर देखा जा रहा है।

नवीनीकरण के समय बनायी गयी होगी आकृति:

मंदिर में मौजूद सायकिल की आकृति को देखकर ऐसी कल्पना की जा रही है कि आज से लगभग दो हज़ार साल पहले ही सायकिल जैसे आधुनिक वाहन की भविष्यवाणी कर दी गयी थी। लेकिन कुछ लोग इसे बस अफ़वाह मान रहे हैं। डॉक्टर कालिकोवन नी बात ने लोगों के मन में शक पैदा कर दिया। इन्होंने बताया कि 1920 में पंचवर्णास्वामी मंदिर का नवीनीकरण किया गया था। उस समय ही मंदिर में सायकिल वाली आकृति बनायी गयी होगी। इतिहासकारों के अनुसार सायकिल का अविष्कार आज से लगभग 200 साल पहले ही हुआ है, जबकि यह मंदिर आज से दो हज़ार साल पहले बनाया गया था।

1885 में पहली बार चेन वाली सायकिल बनायी गयी थी। ऐसे में यह कहा जा रहा है कि मंदिर की दीवार पर बनी यह सायकिल की आकृति देखकर तो यही लगता है कि उसी समय लोगों को भविष्य में चलने वाले वाहनों की जानकारी थी। हालाँकि मंदिर में बनी इस सायकिल की आकृति के पीछे की सच्चाई क्या है। इसके बारे में किसी को कुछ नहीं पता है। लेकिन आकृति को देखकर सभी लोग अपनी-अपनी तरह से अनुमान लगाते हैं। इसकी सच्चाई जानने के बाद ही यह पता चल पाएगा कि ये आकृति आज से दो हज़ार साल पहले बनी थी या जब मंदिर का नवीनीकरण किया गया था तब बनी थी।

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