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UP के इस गांव में हैं कुतिया देवी का मंदिर, लोग करते हैं पूजा जानिए इस मंदिर की पूरी कहानी

भारत में प्राचीन काल से लोग पेड़-पौधों और पशुओं की पूजा करते आ रहे हैं। गाय को हमारे देश में कितनी इज्जत दी जाती है यह आप बखूबी जानते हैं। गाय को हिंदू धर्म में सबसे पवित्र पशु माना गया है और लोग गाय को माता मानकर पूजा भी करते हैं। हिन्दू धर्म के महानतम ग्रंथ महाभारत में भी गौ पूजा से संबंधित कुछ बातें उल्लेखनीय हैं। सिर्फ गाय ही नहीं हिंदू धर्म में और भी कई जीवों की पूजा की जाती हैं जैसे हाथी को भगवान गणेश का प्रतीक माना जाता है, बंदर को हनुमानजी का प्रतीक माना गया है। इसके अलावा भी बहुत से ऐसे पशु-पक्षी हैं जिनकी हिंदू धर्म में पूजा की जाती हैं। लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि भारत में एक जगह ऐसी भी हैं जहां कुतिया का मंदिर है और लोग उसकी पूजा करते हैं।

रेवन गांव में एक कुतिया का मंदिर :

बता दें कि उत्तरप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के झांसी जनपद में स्थित रेवन व ककवारा गांवों के बीच रोड के किनारे एक कुतिया का मंदिर है। इस मंदिर में काली कुतिया की मूर्ति स्थापित कि गई है। मूर्ति के बाहर लोहे की जालियां लगाई गई हैं ताकि कोई मुर्ति को कोई क्षति ना पहुंचा सके। रेवन व ककवारा दोनों गांवों के लोग इसमें बेहद आस्था रखते हैं और कुतिया महारानी की पूजा करते हैं। हैरान मत होइएगा दरअसल, कुतिया की पूजा करने के पीछे उनके अपने तर्क हैं। यहां के लोगों में कुतिया महारानी के प्रति अपार श्रद्धा है और जो भी इस कुुुतिया महारानी के मंदिर के सामने से गुजरता है वह अपना सिर झुकाकर आशीर्वाद जरूर मांगता है।

इस वजह से हो गई थी कुतिया की मौत :

कुतिया का यह मंदिर बनवाने के पीछे भी एक ऐसी कहानी छुपी है जिसे सुनकर आपका दिल भी पसीज जाएगा। दरअसल, इस कुतिया की मौत हो गई थी जिसका गांव वालों को बहुत दुःख हुआ। स्थानीय लोग बताते हैं कि जब कुतिया की मौत हुई उस समय दोनों गांव रेवन-ककवारा में सामूहिक भोज की परंपरा थी। कुतिया भी इन दोनों गांवों में आती जाती रहती थी। जब भी किसी गांव में कोई कार्यक्रम होता वह खाना खाने पहुंच जाती थी। एक बार कि बात है कुतिया को रेवन गांव से रमतूला के बजने की आवाज सुनाई दी। कुतिया को बहुत भूख लगी थी वह खाना खाने के लिए दौड़ी दौड़ी रेवन गांव में पहुंच गई। लेकिन वह पहुंचने में लेट हो गई जब वह रेवन गांव में पहुंची तब तक सभी लोगों ने खाना खा लिया था जिसके कारण उसे खाना नहीं मिल पाया। थोड़ी ही देर बाद कुतिया को ककवारा गांव से रमतूला की आवाज सुनाई दी वह दौड़ी दौड़ी ककवारा लेकिन उसे वहां भी खाना नहीं मिला। दोनों गांवों के बीच दौड़ते-दौड़ते वह बहुत थक गई और भूख की वजह से उसने दम तोड़ दिया।

कुतिया की मौत के बाद गांव के लोगों ने बनाया मंदिर :

गांव के लोगों को जब इस बारे में पता चला तो वह काफी निराश हुए और उन्होंने कुतिया को उसी जगह पर जमीन में दफना दिया। गांव वाले बताते हैं कि जिस जगह उसे दफनाया गया वह स्थान पत्थर में बदल गया। लोगों ने इसे चमत्कार माना और उस जगह छोटा सा मंदिर बना दिया। कुछ समय बाद वहां पर कुतिया की एक मूर्ति भी स्थापित कर दी। बता दें कि अब इस मंदिर पर दोनों गांवों की महिलाएं प्रतिदिन जल चढ़ाने आती हैं और पूजा अर्चना करके आशीर्वाद लेती है। हालांकि कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इसको अंधविश्वास मानते हैं।

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