मायावती का शाह पर वार, बोली ‘जनता को मूर्ख समझने की भूल न करें’

बीजेपी के स्थापना दिवस के मौके पर अमित शाह ने विपक्ष को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी, तो इससे विपक्ष तिलमिला उठा। जी हां, कांग्रेस से लेकर क्षेत्रीय पार्टियां भी इसको लेकर बीजेपी की आलोचना करते हुए नजर आ रही है। बता दें कि अमित शाह ने मुंबई में कार्यक्रम के दौरान जहां एक तरफ मोदी की तुलना बाढ़ से की तो वहीं दूसरी तरफ विपक्ष की तुलना जानवरों से कर दी, ऐसे में अमित शाह अपने भी बयान में घिरते हुए नजर आ रहे हैं। तो चलिए जानते हैं कि अमित शाह के तीखे बयान पर मायावती ने क्या वार किया है?

अमित शाह ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए विपक्ष पर जोरदार निशाना साधा था। बता दें कि अमित शाह ने कहा कि मोदीजी के बाढ़ में विपक्ष पूरी तरह से बह गया है, ऐसे में अब कुत्ते-बिल्ली और सांप-नेवला भी एक साथ चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में शाह ने यह भी कहा कि जब बाढ़ आती है, तो सबकुछ बह जाता है, लेकिन वटवृक्ष रहता है, ऐसे में सभी कुत्ते बिल्ली सांप और नेवला एक साथ अपनी जान बचाने के लिए एक साथ भागते हैं, यही हालत आज विपक्ष की हो रही है।

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के इस बयान को लेकर मायावती ने अब तीखी प्रतिक्रिया दी है। जी हां, मायावती ने कहा कि बीजेपी जनता को मूर्ख समझने की भूल लगातार कर रही है, लेकिन जनता उसे बार बार आगाह कर रही है, फिर भी बीजेपी ने जनता को मूर्ख समझना नहीं छोड़ा है, जिसकी वजह से बीजेपी का 2019 में हारना बिल्कुल तय है, क्योंकि अमित शाह ऐसे गिरे हुए बयान देते हैं, जोकि जनता को मूर्ख समझने वाले लगते हैं।

मायावती यही नहीं रूकी उन्होंने आगे कहा कि बीजेपी के शीर्ष नेता अमित शाह और नरेंद्र मोदी ऐसी भाषा का प्रयोग करते हैं, जो निचले स्तर की राजनीति की तरफ इशारा करता है। इसके आगे मायावती ने कहा कि अब देश के जनता को यह तय करना होगा कि क्या एक सत्ताधारी पार्टी को इस तरह की भाषा शोभा देती है? अविश्वास प्रस्ताव को लेकर भी मायावती ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि बीजेपी अविश्वास प्रस्ताव से डर गई, इसीलिए संसद नहीं चलने दिया, जबकि उसके पास तो बहुमत की सरकार है, लेकिन उसे डर था।

यूपी उपचुनाव का जिक्र करते  हुए मायावती ने कहा कि जनता अब धीरे धीरे बीजेपी को सबक सीखा रही है, इसका ताजा उदाहरण यूपी का गोरखपुर और फूलपुर है, लेकिन फिर भी बीजेपी अलोकतांत्रिक रवैया अपना रही है, जिसका नतीजा उसे 2019 के लोकसभा चुनाव में भुगतना पड़ेगा।