यूपी की दसवीं राज्यसभा सीट की टक्कर की लड़ाई में बीजेपी ने मारी शानदार बाजी

शुक्रवार यूपी के 10 राज्यसभा सीटों के लिए मतदान हुआ और देर शाम इसके नतीजें भी सामने आएं। 10 में से 8 सीटों पर बीजेपी का जीतना तय था, तो वहीं 1 सीट पर समाजवादी पार्टी का जीतना तय था, ऐसे में लड़ाई सिर्फ एक सीट के लिए थी। जी हां, बीजेपी के पास पर्याप्त विधायक नहीं थे, ऐसे में विपक्ष यह समझ रहा था कि एक सीट और उसके खाते में आ गई, लेकिन ये लड़ाई क्रिकेट के आखिरी गेंद जैसे रोमांच पर पहुंच गया था, आखिरी पल था ये नहीं कहा जा सकता था कि आखिरी जीत किसकी होगी? आइये जानते हैं कि हमारे इस रिपोर्ट में क्या खास है?

य़ूपी की राज्यसभा की दसवी सीट पार्टियों के लिए नाक की सवाल बन गई थी, ऐसे में जीतने के लिए सभी पार्टियों ने बड़े बड़े दांव खेले थे, लेकिन इन सबके बीच बीजेपी ने बाजी मार ली, ऐसे में सूबे की सियासत भी गरमा गई। बता दें कि चुनाव के नतीजें सामने आने के बाद बीजेपी और बसपा में जमकर जुबानी जंग देखने को मिली, क्योंकि यूपी की दसवी सीट के लिए बसपा ने सपा से गठबंधन कर लिया था, लेकिन अखिलेश को तो लोकसभा की दो सीटे मिल गई लेकिन मायावती को एक सीट दिलाने में अखिलेश पूरी तरह से असफल रहे।

बताते चलें कि जीत के बाद सीएम योगी ने सपा और बसपा पर वार करते हुए कहा कि सपा एक अवसरवादी पार्टी है, ऐसे में सपा सिर्फ लेना जानती है, देना नहीं। गौरतलब है कि मायावती को राज्यसभा में एक सीट चाहिए थी, जिसके लिए उन्होंने समाजवादी पार्टी से गठबंधन किया था, लेकिन क्रास वोटिंग और बीजेपी के बड़े बड़े दांव के सामने सपा बसपा का गठबंधन फीका पड़ गया। यूं तो अखिलेश ने काफी कोशिश की थी, लेकिन क्रास वोटिंग की वजह से उम्मीदों पर पानी फिर गया।

चुनावी नतीजे के बाद मायावती ने बीजेपी पर बड़ा वार करते हुए कहा कि बीजेपी ने उनके विधायकों का अपहरण कर लिया जोकि सरासर गलत है। इस दौरान मायावती ने ये भी कहा कि बीजेपी ने धन से हमारे विधायकों को अपनी तरफ मोड़ा। दरअसल, बसपा और सपा के एक एक विधायकों की वोटिंग की परमिशन जेल में बंद होने की वजह से नहीं मिली, जोकि योगी सरकार का मास्टर स्ट्रोक था, तो वहीं दो क्रास वोटिंग की वजह से मायावती का राज्यसभा जाने का सपना चूर चूर हो गया।

मतगणना के दौरान कई बार बसपा की तरफ से शिकायत भी की तो इस बीच चुनाव आयोग ने मतगणनाा रोक भी थी। दरअसल, बसपा का कहना था कि उसके बागी विधायक के वोट को कैंसिल किया जाए, क्योंकि उन्होंने अपना वोट ऑथराइज एजेंट को नहीं दिखाया, ऐसे में उनकी वोटिंग को अमान्य माना जाए।

Leave a Reply

Your email address will not be published.