अध्यात्म

नवरात्र स्पेशल : जानिए कैसे शेर बन गया मां दुर्गा का वाहन

नवरात्र में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा अराधना की जाती है.. वैसे तो मां का हर रूप निराला है पर शेर पर सवार मां की छवि हमेशा से भक्तों के मन में बसी हुई है। मां शेर की सवारी करती हैं ये तो हम सब बचपन से सुनते आ रहे हैं पर बहुत से लोग इसका कारण नहीं जानते हैं .. आखिर शेर मां की सवारी कैसे बन गया । अगर आप इस तथ्य से अनभिज्ञ है तो चलिए आपको इसके पीछे की पौराणिक कथा सुनाते हैं।

तपस्या के कारण देवी पार्वती का रंग पड़ गया सांवला

मां दुर्गा का हदय बहुत ही कोमल है और जो कोई भी उनकी पूजा सच्चें मन से करता है मां उसके हर बिगडें काम भी बनाती है। ऐसे में मां दुर्गा जो इतनी कोमल और ममतामयी है उनका सवारी शेर जैसा क्रुर पशु कैसे हो सकता है ऐसा सवाल अक्सर मन में आता है। दरअसल सनातन धर्म में भगवान शिव, गणेश जी और अन्य किसी भी हिन्दू देवी-देवता को मिले वाहन के पीछे एक दिलचस्प कहानी है। आज हम आपको नवरात्र के अवसर पर देवी दुर्गा एवं उनके वाहन शेर से जुड़ी एक ऐसी ही पौराणिक कथा के बारें में बता रहे हैं।

पौराणिक मान्यता के अनुसार जब देवी पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए बहुत ही कठोर तपस्या की थी तो इस तपस्या से देवी पार्वती को भगवान शिव तो मिल गए, पर उस कठोर तपस्या के प्रभाव से मां सांवली हो गई थी। ऐसे में एक दिन जब मां पार्वती और भगवान साथ बैठे थे तो मजाक में भगवान शिव ने माता पार्वती के रंग को लेकर उपहास कर दिया जो कि देवी पार्वती को बहुत ही बुरा लगा और वह कैलाश छोडकर वन में चली गई ।

भूखा शेर देवी का तेज देखकर शांत हो गया

वन में जाकर देवी पार्वती कठोर तपस्या में लीन हो गई। तपस्या में लीन देवी पार्वती को देखकर एक भूखा शेर उन्हे खाने की इच्छा से वहां पहुंचा, पर इसे आप चमत्कार कहें या कोई लीला। उस शेर ने जैसे देखा मां तपस्या कर रही है तो वही पर चुपचाप बैठ गया। मां के तेज को देखकर उस शेर की इच्छा शांत हो गई और वो चुपचाप कई सालों तक वहीं बैठा रहा जबकि देवी पार्वती तपस्या करती रही। असल में देवी पार्वती ने ऐसी हठ कर ली थी कि जब तक वह गोरी न हो जाए वो ये तप करती रहेंगी.. ऐसे में देवी पार्वती के तप को देखकर भगवान शिव वहां प्रकट हुए और देवी को गोरे होने का वरदान देकर चले गए।

इसके बाद जा देवी पार्वती गंगा में स्नान करनें गई तो वहां स्नान करते समय माता के अंदर से एक और देवी प्रगट हुई और उसके साथ ही देवी पार्वती गोरी हो गई और यही वजह है कि उनका नाम मां गौरी पड़ा और दूसरी देवी जो काले रूप में थी प्रगट हुई थी उनका नाम कौशिकी पड़ा।

मां ने वरदान स्वरूप शेर को अपना वाहन बना लिया

स्नान करने के बाद जब देवी बाहर निकली तो पाया कि वहां एक शेर बैठा उन्हें ध्यान से देख रहा है। ऐसे में जब देवी पार्वती को ये पता चला कि वो शेर उनके साथ ही तपस्या में था। तो देवी पार्वती ने उसकी भक्ति भावना देखकर उसे अपना वाहन बना कर कृतार्थ किया और तभी से मां पार्वती का वाहन शेर हो गया।

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