मोदी सरकार की बढ़ी मुश्किलें, टीडीपी ने दिया 10 मार्च तक का अल्टीमेटम

मोदी सरकार की बढ़ी मुश्किलें:केंद्र की मोदी सरकार की परेशानियां कुछ बढ़ सकती है, क्योंकि उसकी सहयोगी पार्टी उससे खफा नजर आ रही है। जी हां, दोनोंं ही पार्टियां एक दूसरे के सामने झुकने के लिए तैयार नहीं है, ऐसे में आशंका यह जताई जा रही है कि कहीं मोदी सरकार की यह सहयोगी पार्टी अपना दामन न छुड़ा लें। बता दें कि अगर ऐसा तो पार्टी के लिए बहुत मुसीबत खड़ी हो सकती है, क्योंकि अगले साल लोकसभा चुनाव भी है। ऐसे में मोदी सरकार किसी भी सहयोगी पार्टी को नाराज करने का रिस्क नहीं ले सकती है। आइये जानते हैं कि टीडीपी ने क्यों दिया अल्टीमेटम?

मोदी सरकार की सहयोगी पार्टियों में से एक टीडीपी है, ऐसे में टीडीपी का सरकार से नाराज होना, बीजेपी के लिए बहुत मुश्किले खड़ी हो सकती है, क्योंकि आंध्र प्रदेश में बीजेपी से ज्यादा टीडीपी की लोकप्रियता है। दरअसल, पूरा मामला विशेष राज्य को लेकर है। टीडीपी आंध्र प्रदेश को विशेष दर्जा देने की मांग कर रही है तो वहीं दूसरी तरफ सरकार उसकी मांग मानने के लिए तैयार नहीं है। बता दें कि ये लड़ाई बजट आने के बाद से ही चालू है।

टीडीपी ने बयान जारी करते हुए कहा कि सरकार ने पहले हमारी मांग को मानी थी, लेकिन बजट में इसके लिए कोई  प्रावधान नहीं आया, जिसकी वजह अब मामला आर पार का हो गया है। याद दिला दें कि बजट आने के बाद आंशका जताई जा रही थी कि टीडीपी बीजेपी अलग हो जाएगी, लेकिन उस समय दोनों पार्टियों ने एक दूसरे से बात करने का फैसला किया था, लेकिन अब मामला एक बार फिर से बिगड़ता जा रहा है, ऐसे में टीडीपी ने अपने मंत्रियों को इस्तीफा देने के लिए राजी कर लिया है। साथ ही केंद्र  सरकार को 10 मार्च तक समय दिया है, जिस दौरान सरकार को हां या ना में फैसला देना है।

मोदी सरकार की बढ़ी मुश्किलें, बीजेपी नहीं मान सकती टीडीपी की मांग

दरअसल, सरकार की तरफ से कहा गया था कि विशेष राज्य को लेकर अभी तक कोई विशेष प्रावधान नहीं बनाया गया है, ऐसे में अगर सरकार आंध्र प्रदेश के लिए नियम बदलती है, तो उसके लिए और राज्यों को लेकर मुसीबत खड़ी हो सकती है, क्योंकि पीएम मोदी ने बिहार को भी विशेष राज्य देने का वादा किया था, लेकिन अब बिहार को भी विशेष राज्य का दर्जा नहीं मिल पाया है। ऐसे में सरकार के सामने बड़ी दुविधा है। सूत्रों की माने तो सरकार टीडीपी के आगे झुकने के लिए किसी भी कीमत पे तैयार नहीं होगी, क्योंकि अगर उसने ऐसा किया तो बाकि विरोधी दल भी खफा हो जाएंगे।

एक के बाद एक सहयोगी पार्टी से हो रहे हैं अलग

याद दिला दें कि बीजेपी की सबसे पुरानी सहयोगी पार्टी शिवसेना ने पहले ही बीजेपी से दामन छुड़ाने का ऐलान कर दिया है, ऐसे में अगर टीडीपी भी अपन दामन छुड़ाती है, तो लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी की मुश्किलें बढ़ सकती है। हालांकि, बीजेपी फिलहाल देश की सबसे बड़ी पार्टी है,लेकिन उसे सहयोगी पार्टियों का साथ बहुत जरूरी है।

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