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पी चिदंबरम के बेटे को सीबीआई ने किया गिरफ्तार, पिता की पहुंच से कमाए थे कई करोड़

सीबीआई ने पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम के बेटे को गिरफ्तार कर लिया है। कार्ति चिदंबरम पर आरोप है कि आईएनएक्स मीडिया के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कार्ति चिदंबरम ने मदद की थी। पी चिदंबरम के बेटे कार्ति को अरेस्ट करने के पीछे सीबीआई का तर्क है कि कार्ति जांच में बिल्कुल सहयोग नहीं कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक उन्हें चेन्नै स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया गया है। कार्ति को लंदन से लौटते ही उनके घर से अरेस्ट किया गया। इससे पहले मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 16 फरवरी को कार्ति के चार्टर्ड एकाउंटेंट एस. भास्कर रमन को गिरफ्तार किया था।

पूरा मामला यूपीए प्रथम के समय का है। जब 2007 में बता दें कि विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड (एफआईपीबी) ने आईएनएक्स मीडिया को विदेशी पूंजी जुटाने की अनुमति दी थी। इस मामले में कार्ति चिदंबरम का नाम आया है। उस समय कार्ति चिदंबरम के पिता पी. चिदंबरम वित्त मंत्री थे। सीबीआई और ईडी इस मामले की जांच कर रही हैं। ईडी का दावा है कि सीए भास्कर रमन ने गलत तरीके से कमाई गई संपत्ति को ठिकाने लगाने में कार्ति चिदंबरम की मदद की थी।

विदेशी निवेश की अनुमति दिलाने का आरोप

इसके अलावा ईडी ने प्रिवेन्शन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग ऐक्ट के तहत कार्ति और दूसरे सहयोगियों पर पिछले साल मई में केस दर्ज किया था। ईडी की एफआईआर में कार्ति चिदंबरम पर आरोप लगाया गया है कि अपने पिता के केंद्रीय वित्त मंत्री रहते उन्होंने INX मीडिया को FIPB की मंजूरी दिलाने के बदले में 3.5 करोड़ की रकम ली थी।

कार्ति चिदंबरम ने पिता की पहुंच का उठाया फायदा

सीबीआई सूत्रों की माने तो उस दौरान पिता के पावर में होने के चलते कार्ति ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके आईएनएक्स को फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट क्लीयरेंस हासिल करने में मदद की थी। इसके बदले आईएनएक्स ने मोटी रकम कार्ति चिदंबरम को दी थी। ईडी और सीबीआई इस मामले में उनके घर और ऑफिस पर कुछ महीने पहले छापे भी मारे चुकें हैं। जिसके बाद पिता और पुत्र कार्ति ने कहा था कि केंद्र बदले की भावना से कार्रवाई कर रहा है।

सीबीआई कई बार कार्ति से कुछ सवालों के जवाब चाहती थी। लेकिन हमेशा उन्होने कोई सार्थक जवाब नहीं दिया। जिसके बाद उनको बीते साल 27 और फिर 29 जून को समन जारी किए गए थे। लेकिन, कार्ति ने जांच एजेंसियों से और वक्त की मांग की। लेकिन वक्त मिलने के बाद भी वो जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करने को तैयार नहीं थे। जिसके बाद आज उनको गिरफ्तार कर लिया गया।

इंद्राणी मुखर्जी की थी कंपनी

इस मामले की जांच कर रही ईडी का कहना है कि मुखर्जी दंपति ने नौ करोड़ पाउंड की राशि में हेर फेर की और इस रकम को हवाला के जरिए विदेश भेज दिया। एफआईपीबी की मंजूरी मिलने के बाद आईएनएक्स मीडिया ने कहा कि कंपनी में 4.620 करोड़ रुपए का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हुआ, लेकिन वास्तव में अगस्त 2007 से मई 2008 के बीच कंपनी में 305.36 करोड़ रुपए का निवेश आया था।

सीबीआई का आरोप है कि कार्ति के कंट्रोल में एक कंपनी जिसके अप्रत्यक्ष रूप से मालिक भी थे। उसको इंद्राणी और पीटर मुखर्जी के मीडिया हाउस (आईएनएक्स मीडिया) से फंड ट्रांसफर किया गया था। कार्ति के अलावा चार और लोगों को इस मामले में समन जारी किए गए थे। इसके साथ ही कार्ति और आईएनएक्स मीडिया के खिलाफ केस दर्ज किया गया।

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