अध्यात्म

रामचरितमानस के अनुसार जब ऐसे लोग करें आपको नमस्ते तो हो जाना चाहिए सावधान, वर्ना…

हिन्दू धर्म में कई बातों का पालन किया जाता है। यहाँ व्यक्ति का उद्धार केवल देवी-देवताओं की पूजा के ऊपर ही नहीं बल्कि उसके कर्मों के ऊपर भी होता है। अगर व्यक्ति अच्छे कर्म करने वाला होता है और वह भगवान की पूजा नहीं भी करता है तो उसका उद्धार हो जाता है। लेकिन जो व्यक्ति एक तरफ भगवान की पूजा करता है और दूसरी तरफ लोगों को कष्ट देता है और अपना भला चाहता है, उसका कभी उद्धार नहीं होता है। ऐसे लोगों को जीवन में क्षणिक ख़ुशी मिलती है।

बदल सकता है किसी व्यक्ति का जीवन:

हिन्दू धर्म में व्यक्ति को कई धर्मग्रंथों के अनुसार जीवन व्यतीत करने के बारे में कहा जाता है। हिन्दू धर्म में कई धार्मिक पुस्तकों के बारे में बताया गया है। अगर इनमें से किसी एक पुस्तक के अनुसार भी व्यक्ति अपना जीवन जीता है तो उसका जीवन सफल हो जाता है। हिन्दू धर्म की प्रसिद्द धार्मिक पुस्तकों में से एक है तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस। इसमें तुलसीदास जी ने व्यक्ति को कई अच्छी बातों के बारे में बताया है, जिससे व्यक्ति का जीवन बदल सकता है।

करना पड़ता है अन्य लोगों की भी परेशानियों का सामना:

नवनि नीच कै अति दुखदाई अर्थात नीच लोगों का नमन करना, नीच लोगों का झुकना या नीच लोगों का नमस्कार करना बहुत ज्यादा दुखदाई होता है। रामचरितमानस के अनुसार जब भी कोई नीच स्वाभाव का व्यक्ति हमें नमस्ते करे तो हमें सावधान हो जाना चाहिए। क्योंकि नीच लोग जब भी हमारे सामने झुकते हैं, किसी स्वार्थ की वजह से ही झुकते हैं। ऐसे लोगों की इच्छाओं को पूरा करने के बाद केवल आपको ही नहीं बल्कि कई अन्य लोगों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। यह बात तुलसीदास जी ने रामचरितमानस मानस में रावण और मारीच के एक प्रसंग के दौरान बताई है।

आने वाला है कोई बहुत बड़ा संकट:

इसके माध्यम से तुलसीदास ने यब बताया है कि व्यक्ति को किसके सामने नमन करना चाहिए और किसके नमन से बचना चाहिए। बात उस समय की है जब रावण माता सीता का हरण करने के लिए लंका से निकलता है। सबसे पहले रावण अपने मामा मारीच के पास पहुँचता है और उसे नमस्कार करता है। रावण को अपने सामने झुका देखकर मारीच यह समझ जाता है कि उसके सामने भविष्य में कोई बहुत बड़ा संकट आने वाला है।

श्लोक:

नवनि नीच कै अति दुखदाई। जिमि अंकुस धनु उरग बिलाई।।
भयदायक खल कै प्रिय बानी। जिमि अकाल के कुसुम भवानी।।

अर्थ:

रावण को अपने सामने झुका देखकर मारीच सोचने लगता है कि किसी नीच व्यक्ति का नमन करना बड़ा दुखदाई होता है। मारीच रावण का मामा था लेकिन राक्षस राज रावण बहुत ही अभिमानी था। बिना वजह वह किसी के आगे झुकता नहीं था। मारीच इस बात से भंली-भाँती परिचित था। वह समझ गया कि कोई भयंकर परेशानी आने वाली है। रावण से भयभीत होकर मारीच ने भी रावण को प्रणाम किया। मारीच मन में सोचता है कि जिस प्रकार कोई धनुष झुकता है तो वह किसी की मौत का कारण बनता है, कोई सांप झुकता है तो किसी को डंसने के लिए झुकता है, जब कोई बिल्ली झुकती है तो वह अपने शिकार पर हमला करने के लिए झुकती है, वैसे ही रावण मारीच के सामने झुका था। किसी दुष्ट व्यक्ति का मीठी वाणी बोलना बहुत दुखदायी होता है।

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