बेहद खतरनाक होती हैं परिवार के सदस्यों की ऐसी आदतें, बर्बाद कर देती हैं पूरा घर औऱ परिवार

चाणक्य को भारत के इतिहास का सबसे विद्वान व्यक्ति माना गया है। चाणक्य ने स्त्री पुरुषों के संबंधों को लेकर प्राचीन काल में कुछ ऐसे नियम दुनिया को बताएं हैं वो आज के युग में भी बिल्कुल सही हैं। वैसे तो चाणक्य ने खुशहाली भरे जीवन के लिए कई रहस्य बताएं हैं। लेकिन, आज हम आपको अपने ही परिवार के सदस्यों की उन आदतों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनकी वजह से आपको हानि हो सकती है।

अक्सर ऐसा कहा जाता है कि किसी भी घर को उसमें रहने वाले चाहे तो स्वर्ग बना सकते हैं और किसी भी घर को चाहे तो नर्क बना सकते हैं। घर में रहने वाले सदस्य ही होती है जो घर को बेहतर बनाते हैं। किसी भी घर की सुख शांती के लिए यह बेहद जरुरी है कि उसमें रहने वाले लोगों में कोई बूरी आदत न हो। महान आचार्य चाणक्य ने मनुष्य के जीवन को सुखमय बनाने के लिए बहुत सी बातें बताई हैं। कहा जाता है जिस व्यक्ति चाणक्य की बातों का पालन कर लिया उसे दुनिया में कोई भी मुकाम हासिल हो जाता है। चाणक्य की नीतियों पर अमल करने वाला व्यक्ति कभी भी असफल नहीं होता और वह हर परिस्थिती का सामना करने में सक्षम हो जाता है।

चाणक्य ने हर व्यक्ति हो चार लोगों से सतर्क रहने की सलाह दी थी। आइये देखते हैं वो कौन कौन से लोग हैं –

व्यभिचारिणी माता

व्यभिचारिणी स्त्री उसे कहा जाता है जो पति और बच्चा होने का बाद भी पराये मर्द से संबंध बनाती हो। चाणक्य ने ऐसी स्त्री को व्यभिचारिणी माता कहा है जो पति और पुत्र के होने के बावजूद किसी मर्द से संबंध रखे। चाणक्य ने ऐसी स्त्री को शत्रु के समान बताया है। चाणक्य ने कहा है कि ऐसी माता से पुत्र का समाज में अपमान होता है और उसका नैतिक पतन होता है।

ऋण करने वाला पिता

आचार्य चाणक्य के मुताबिक, ऐसा पिता शत्रु के समान है जो अपनी हैसियत से अधिक का कर्ज लेता है। अगर कोई पिता ऋण या उधार इस लालच में ले रहा है कि उसका पुत्र उसे चुकायेगा तो ऐसा पिता अपने पुत्र के लिए शत्रु के समान है। चाणक्य ने कहा है कि भविष्य में आने वाले लाभ के भरोसे किसी से कभी भी उधार नहीं लेना चाहिए।

रूपवान पत्नी

आचार्य चाणक्य के मुताबिक, अगर किसी पुरुष की पत्नी अधिक रुपवान हो तो उसे सदैव सतर्क रहना चाहिए। क्योंकि, ऐसी महिला अपने पति और परिवार पर ध्यान देने के बजाय अपने रुप की चिंता करती रहती हैं। ऐसी स्त्री अपनी संतान से ज्यादा अपने रंग रुप पर ध्यान देती हैं। चाणक्य के मुताबिक, ऐसी स्त्रियां घर के तबाह होने का कारण बनती हैं। इसलिए ऐसी औरतों से सावधान रहना चाहिए।

मूर्ख या अज्ञानी पुत्र

आचार्य चाणक्य के मुताबिक, जिस पिता का पुत्र अज्ञानी हो उसका जीवन एक नर्क के समान है। मूर्ख पुत्र परिवार और अपने पिता के लिए तिरस्कार और अपमान का कारण बनता है। वह अपने पिते के लिए संकट लाने वाला होता है। मुर्ख पुत्र धन कमाने के बजाय खर्च करने के बारे में ज्यादा सोचता है। अज्ञानी पुत्र हमेशा अपने पिता पर निर्भर रहता है और सभी के लिए दुख का कारण होता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

error: Content is protected !!