ब्लड डोनेट करने से पहले और बाद में जरूर रखें इन बातो का ख्याल

रक्तदान को लेकर आमतौर पर लोगों में बहुत सी गलतफ़हमी देखने को मिलती है जैसे कि ब्लड डोनेट करने से शरीर में कमजोरी आती है और ये स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है जबकि ये पूरी तरह गलत है.. दरअसल अगर रक्तदान करने से पहले और बाद में कुछ जरूरी सावधानियां बरती जाएं तो इसका सेहत पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा बल्कि ये स्वास्थ्य के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकता है। जी हां, और आज हम आपको ऐसी ही बातों के बारे में बता रहे हैं जिन्हे रक्तदान करते समय ध्यान में रखनी चाहिए। साथ ही हम आपको ये भी बताएंगे रक्तदान कैसे आपके सेहत के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

असल में मानव रक्त का कोई दूसरा विकल्प नहीं है कि इसे कृत्रिम तरीके से प्रयोगशाला या फैक्ट्री में बनाया जा सके | साथ ही किसी जानवर का रक्त भी मनुष्य के काम में नहीं आता है .. ऐसे में आकस्मिक परिस्थितियों में दूसरे व्यक्ति की रक्त की जरूरत पड़ ही जाती है जिसके लिए लोगों से रक्तदान की अपील की जाती है। वैसे सामान्यतया एक स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में 4 से 5 लीटर रक्त होता है और रक्तदान में एक बार में किसी के शरीर से सिर्फ 250 से 350 मिली लीटर तक ही रक्त लिया जाता है।ऐसे में इससे शारीरिक कमजोरी या स्वास्थ्य के लिए खतरा होने का सवाल नही उठता है .. स्वास्थ्य विशेषज्ञों की माने तो सामान्य खुराक लेते रहने से भी दिए गए रक्त की भरपाई 4 से 6 हफ्तों में हो जाती है। साथ ही रक्तदान करते समय कुछ बातों का भी ख्याल रखना चाहिए ।

चलिए सबस पहले ये जानते हैं कि रक्तदान कौन कर सकता है .. तो आपको बता दें कि रक्तदान करने वाले व्यक्ति की उम्र 18 वर्ष से कम और 60 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। साथ ही रक्तदान करने वाले व्यक्ति को टी.बी, डेंगू, मलेरिया, किडनी रोगों और मिरगी से पीड़ित,  एड्स, जैसे संक्रामक रोगों से मुक्त होना चाहिए। इसके अलावा जिन्हे मधुमेह या सिजोफ्रेनिया की शिकायत हो या फिर जिनका वजन तेजी से गिर रहा हो.. या अगर किसी की बड़ी सर्जरी हुई है तो ऐसे लोगों को रक्तदान करने से बचना चाहिए।साथ ही रक्त दानकर्ता का वजन 45 किलोग्राम से अधिक होना चाहिए और शरीर में हीमोग्लोबिन भी 5 प्रतिशत से अधिक होना चाहिए |

इसेक अलावा गर्भवती और बच्चों को स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भी रक्तदान नहीं करना चाहिए क्योंकि इनमें आयरन का स्तर बेहद कम होता है। वहीं पीरिएड्स से गुजर रही स्त्रियों को भी रक्तदान रक्त दान नहीं करना चाहिए ।

वहीं रक्तदान के लिए जरूरी सावधानियों की बात करें तो रक्तदान तीन माह के अतंराल के बाद ही करना चाहिए।खान पान की बात करें रक्तदान के बाद आवश्यकतानुसार पानी, चाय, कॉफी, फलों का रस और दूध, अंडा, जैसे प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिएं ।साथ ही खून में शुगर की कमी ना हो इसके लिए कुछ मीठा भी जरुर खाना चाहिए।

साथ ही रक्‍त दानकर्ता के आहार की बात करें तो ऐसे लोगों को हर 3 घंटे के अंतराल पर हैवी डाइट लेते रहना चाहिए । ध्यान रहे कि खाने में पौष्टिक आहार और अधिक से अधिक फलों का सेवन करें|

वहीं अक्सर ब्लड डोनेशन कैम्प में रक्तदान के बाद दानकर्ता को फ़ास्ट फ़ूड दिए जाते है जैसे चिप्‍स, कुरकुरे, कोल्ड ड्रिंक्स आदि पर हो सके तो इनसे बचने की कोशिश करें और पोष्टिक खाना ही खाएं जैसे की फल, जूस का सेवन करें| हां पर, रक्तदान के तुरंत बाद आपको नाश्ते में ये तीन चीजे जरुर होनी चाहिए – नमक, चीनी, तरल तथा कुछ ठोस जैसे कि बिस्कुट |साथ ही ब्लड डोनेट करने से पहले भी हल्का नाश्ता जरूर कर लेना चाहिए और ब्लड डोनेट से एक दिन पहले से प्रर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करना चाहिए |

वहीं रक्त दान के बाद रखी जान वाली सावधानियों की बात करें तो रक्तदान के फ़ौरन बाद तेज धूप में निकलने से बचना चाहिए और बल्ड डोनेट करने के दो से तीन घंटे बाद तक कार ड्राइविंग, बाइक या दूसरा कोई जोखिम वाला काम नहीं करना चाहिए |साथ ही लंबे समय तक खड़े भी नहीं होना चाहिए |

इसके अलावा ब्लड डोनेट करने के बाद कम से कम चार घंटे तक या पूरा दिन किसी भी तरह की नशीली चीज का सेवन ना करें क्योंकि इससे आपको चक्कर आने की समस्या हो सकती है |

वहीं रक्तदान के लाभ की बात करें तो स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार रक्तदान करने से दिल के दौरे और दिल से सम्बंधित बीमारियों की संभावना कम होती है।क्योंकि रक्तदान करने से खून में कैलोस्ट्रॉल जमा नहीं होता है |इससे दिल की बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। साथ ही जब बल्ड डोनेट के लिए बाद शरीर में खून की कमी को पूरा करने के लिए मस्तिष्क ‘रक्त’ उत्पादक अंगों को और अधिक सक्रिय कर देता है और इस तरह इन अंगो की क्रियाशीलता बढ़ जाती है और ये हमेशा स्वस्थ बने रहते हैं।

नोट : इस आर्टिकल में दी गई जानकारियां स्वास्थ्य रिसर्च पर आधारित हैं.. ऐसे में इन्हे आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से जरूरी परामर्श अवश्य लें।

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