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रेलवे ने किया हैरान करने वाला खुलासा, ट्रेन में कम्बलों का इस्तेमाल करने वाले जरुर पढ़ें यह खबर

नई दिल्ली: ट्रेन में सफ़र करने का अपना एक अलग ही आनंद होता है। ऐसा शायद ही कोई व्यक्ति होगा जिसे ट्रेन की यात्रा पसंद नहीं होगी। लम्बी दुरी की यात्रा में ट्रेन से सफ़र करना ज्यादा अच्छा और सस्ता होता है। आज के समय में भारत में यात्रा के लिए सबसे ज्यादा ट्रेन का ही इस्तेमाल किया जा रहा है। भारत की आधा से ज्यादा आबादी ट्रेन से ही सफ़र करती है। भारतीय रेलवे सेवा दुनिया की सबसे बड़ी सेवाओं में से एक है।

रेलवे द्वारा दिए जाने वाले कम्बलों से चलाते हैं काम:

आपने भी ट्रेन का सफ़र किया होगा। जब कभी आपने एसी ट्रेन बोगी में सफ़र किया होगा तो आपको यह अच्छे से मालूम होगा कि एसी बोगी के यात्रियों को रेलवे की तरफ से रात में सोने के लिए चादरें और कम्बल दिए जाते हैं। एसी में कम्बल में सोने का मजा ही कुछ और होता है। लगभग सभी लोग रेलवे द्वारा प्रदान की जाने वाले कम्बलों से ही काम चलाते हैं। कुछ लोग कम्बलों का इस्तेमाल केवल तकिये की तरह करते हैं तो वहीँ कुछ लोग कम्बलों से बाकायदा मुंह ढंककर सोने का काम करते हैं।

जानने के बाद कोई नहीं करेगा रेलवे के कम्बलों का इस्तेमाल:

आपने भी यह कभी ना कभी किया होगा। लेकिन हाल ही में रेलवे के कम्बलों की धुलाई को लेकर एक बहुत ही हैरान करने वाली खबर आई है। यक़ीनन इस खबर को जानने के बाद कोई भी एसी बोगी में यात्रा करने वाला व्यक्ति रेलवे के कम्बलों का इस्तेमाल नहीं करेगा। जी हाँ आपको भले ही इस बात पर यकीन ना हो लेकिन इस बात का खुलासा खुद रेलवे ने किया है। आपको बता दें हाल ही में इस बात का खुलासा असम के रेल राज्य मंत्री राजन गोहेन ने किया है।

हर दो महीने में एक बार होती है कम्बलों की धुलाई:

गोहेन ने बुधवार को कहा कि भारतीय रेलवे इस बात को सुनिश्चित करती है कि ट्रेनों में बिछाई जानें वाली चादरें इस्तेमाल होने के बाद हर बार धोयी जाएँ और कम्बल हर दो महीने में कम से कम एक बार धोये जाएँ। जी हाँ आप सही सुन रहे हैं कम्बलों की धुलाई हर दो महीने में एक बार की जाती है। लोकसभा के एक लिखित प्रश्न के उत्तर में गोहेन ने कहा कि चादरों को हर बार इस्तेमाल करने के बाद धोया जाता है, जबकि कम्बलों की धुलाई कम से कम दो महीने में एक बार की जाती है।

लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ता है बुरा असर:

अब हमारे सामने सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर क्यों कम्बलों की धुलाई हर दो महीने में एक बार की जाती है? रेलवे के कम्बलों की दो महीने में एक बार धुलाई को लेकर सोशल मीडिया पर जमकर बवाल मचा हुआ है। एक तरफ लोगों का रेलवे की तरफ जमकर गुस्सा फुट रहा है, तो वहीँ दूसरी तरफ लोगों ने रेलवे के कम्बलों से तौबा करने की बात कही है। जैसा कि आप जानते हैं रेलवे के कम्बलों को ना जानें कितने लोग दो महीने में ओढ़ते होंगे। ऐसे में ना जानें कितने ही वायरस और संक्रमण फैलने का खतरा रहता है। इससे लोगों के स्वास्थ्य पर कैसा असर पड़ता होगा, इसके बारे में कुछ भी कहने की जरुरत नहीं है।

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