दो नहीं बल्कि एक पुत्र को माता सीता ने दिया था जन्म, जानिए लव कुश कांड की पूरी कहानी

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रामचरितमानस में कुल 7 कांड वर्णित हैं. जैसे सुंदर कांड, बाल कांड, अयोध्या कांड, लंका कांड आदि. इन सब कांडों में भगवान राम के जन्म से लेकर वनवास तक की कहानी विस्तार से बताई गई है. इन सभी कांडों के बारे में अधिकतर लोगों को जानकारी है. लेकिन आज हम आपको जिसके बारे में बताने जा रहे हैं वह है लव कुश कांड. जी हां, लव कुश रामायण में तो जिक्र नहीं है. लेकिन बाकियों की तरह लव कुश का अध्याय भी उतना ही महत्वपूर्ण है. आज इस आर्टिकल में हम आपको लव कुश कांड बताने जा रहे हैं. हम आपको बताएंगे कि लव कुश कौन थे और उनका जन्म कैसे हुआ था. तो आईये जानते हैं लव कुश रामायण कहानी.

माता सीता का बाल्मीकि आश्रम में रहना – लव कुश कांड(luv kush kand)

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सभी को पता है कि भगवान श्री राम और माता सीता के दो पुत्र थे जिनका नाम लव और कुश था. वनवास से वापस आने के बाद सीता माता पहले की तरह अयोध्या में रहने लगीं. उस समय में यदि कोई स्त्री एक दिन भी अपने पति से अलग रहती थी तो पति उन्हें अपने घर में वापस नहीं आने देते थे. लेकिन बाद में सब स्त्रियां माता सीता का उदाहरण देने लगीं. श्री राम तक यह बात पहुंची और खराब स्थिति देखते हुए माता सीता ने अयोध्या छोड़ने का फैसला लिया. माता सीता बाल्मीकि जी के आश्रम पर आ गईं और वहीं रहकर एक सामान्य जीवन व्यतीत करने लगीं.

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वह समय समीप आ गया जब माता सीता एक संतान को जन्म देने वाली थीं. इस बीच माता सीता ने अयोध्या के साथ कोई संपर्क नहीं साधा और न ही अयोध्या से कोई खैरो खबर आई. माता सीता ने एक सुंदर बालक को जन्म दिया जिसका नाम लव रखा गया. वैसे तो सीता द्वारा संतान को जन्म देनें की अनेकों कहानियां प्रचलित हैं. लोक कथाओं की मानें तो सीता जी ने दो पुत्रों को जन्म दिया था. लेकिन रामायण में इसका जिक्र नहीं मिलता.

माता सीता का नहाने जाना – लव कुश रामायण (love kush ramayan)

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लव के जन्म के बाद माता सीता का अधिकतर समय लव की देखरेख में गुजरने लगा. एक दिन सीता जी नहाने के लिए आश्रम से बाहर जा रही थीं लेकिन उन्हें यह चिंता सता रही थी कि साथ में वह लव को कैसे लेकर जाएं. उन्होंने बाल्मीकि जी को लव का ध्यान रखने के लिए कहा. लेकिन सीता जी ने देखा कि ऋषि मुनि बाल्मीकि अपने ही कार्य में व्यस्त हैं और लव की तरफ ध्यान नहीं दे रहे तो वह लव को अपने साथ ले गईं. महर्षि बाल्मीकि इस बात से अनजान थे. बाद में जब वह लव को ढूंढने लगे तो उन्हें लव नहीं मिले. उन्हें लगा कि लव कहीं चले गए हैं या किसी जानवर ने उन्हें अपना शिकार बना लिया है. वह घबरा गए कि जब माता सीता वापस आश्रम आएंगी और उनसे सवाल करेंगी तो वह क्या जवाब देंगे.

बाल्मीकि जी ने बनाया दूसरा लव ( लव कुश रामायण – लव कुश कांड )

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इस वजह से बाल्मीकि जी ने आश्रम का एक घास लिया और उसे अपनी मंत्र-जाप और शक्ति से एक नया लव बना दिया. उन्होंने सोचा जब माता सीता वापस आएंगी तब वह उन्हें यही लव सौंप देंगे और कुछ नहीं बताएंगे. लेकिन जब माता सीता वापस आश्रम आयीं तो बाल्मीकि जी उनके साथ लव को देखकर हैरान रह गए. पूछने पर पता चला कि वह अपने साथ ही लव को ले गई थीं. लेकिन सीता जी बाल्मीकि जी के साथ खड़े लव को देखकर भी खुश हो गई थीं. क्योंकि दूसरे लव का जन्म कुश यानी घास से हुआ था इसलिए बाद में उनका नाम कुश रख दिया गया और वह माता सीता की दूसरी संतान के रूप में जाने जाने लगे.

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