जेटली के पिटारे से निकला बच्चों का भविष्य, हर बच्चे को स्कूल पहुंचाना सरकार की नीति

नई दिल्ली: वित्तमंत्री अरूण जेटली देश का बजट संसद से पेश कर रहे हैं। इस दौरान देश की निगाहें वित्तमंत्री अरूण जेटली के पिटारे पर ही टिकी हुई है। ऐसे में बड़ा सवाल ये उठता है कि क्या जेटली के इस बजट से देश का हर वर्ग खुश होगा? क्या जेटली के पिटारे हर वर्ग के लिए कुछ निकलेगा। हालांकि इसकी शुरूआत हो चुकी है, जेटली संसद में एक के बाद एक जादुई पिटारे खोलते हुए नजर आ रहे हैं। आइये जानते हैं कि जेटली के पिटारे से आखिर बच्चों के लिए क्या खास निकला?

वित्तमंत्री अरूण जेटली मोदी सरकार का आखिरी पूर्ण बजट संसद में पेश कर रहे है। इस दौरान जेटली ने जहां घर, शौचालय की बात की तो वहीं दूसरी तरफ शिक्षा को लेकर जेटली ने बड़ा ऐलान किया। हालांकि, ऐसा पहली बार नहीं हुआ जब बजट में शिक्षा को लेकर पहल किया गया हो। याद दिला दें कि हर बजट में ये कहा जाता कि हर बच्चे को स्कूल पहुंचाना सरकार का सबसे बड़ा लक्ष्य है, लेकिन ये लक्ष्य हर साल के लिए खिसकता जाता है।

अरूण जेटली ने बजट पेश करते हुए कहा कि शिक्षा को लेकर सरकार बड़ा काम करेगी, जिसके लिए बच्चों को स्कूल तक पहुंचाना सरकार बड़ा लक्ष्य होगा। शिक्षा को लेकर जेटली ने अपने भाषण में कहा कि प्री-नर्सरी से 12वीं तक पढ़ाई के लिए एक नीति होगी, जिसमें अब तक प्राथमिक, मध्य, उच्च के लिए अलग-अलग नीति होती है, ऐसे में अब सिर्फ एक नीति के तहत ही शिक्षा के क्षेत्र में विकास किया जाएगा। बता दें कि इस दौरान जेटली ने आदिवासियों के लिए बड़ा ऐलान किया है, जिसमें इनके लिए एकलव्य विद्यालय बनाए जाएंगे, ताकि आदिवासी समुदाय को भी शिक्षा मिल सके।

बता दें कि जेटली के पिटारे से अभी तक शिक्षा, घर, शौचालय, कृषि के मुद्दे निकल चुके हैं। जेटली ने कहा कि सरकार का सबसे बड़ा लक्ष्य है कि सभी गरीबों के पास अपना खुद का घर हो। इस दौरान जेटली ने ये भी कहा कि अब किसानों को कर्ज आसानी से मिल सकेगा, किसान खेती के लिए 12 लाख तक का कर्ज ले सकते हैं। इसके अलावा जेटली ने शिक्षा व्यवस्था को दुरूस्त करने के लिए कहा कि डिजिटल माध्यम से शिक्षकों को नई ट्रेनिंग दी जाएगी, जिसके लिए हर जिले में स्किल केंद्र खोले जाएंगे। यहां आपको ये भी बता दें किआपको बता दें कि 2018-2019 के वित्त वर्ष के लिए सरकार ने स्‍वास्‍थ्‍य और शिक्षा से जुड़े प्रोग्राम्‍स के लिए 1.38 लाख करोड़ रुपए का आवंटन किया।

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