क्या आप को छींक को रोकने की कोशिश करते हैं? छींक को रोकना हो सकता है जानलेवा,जानिये क्यों?

छींक आना एक कुदरती गतिविधि है. कईं बार हम भीड़ में या किसी पब्लिक प्लेस में होते हैं. ऐसे में छींक आने से हमे सब लोग ऐसे घूरने लगते हैं, जैसे हमने उनके सिर पर कोई बम फोड़ दिया हो. किसी के सामने छींक आना अपने आप में एक बहुत बड़ी शर्मिंदगी बन जाती है. इसलिए अधिकतर लोग इसको रोकने के लिए अपना मुंह बंद करते हैं या फिर अपना ध्यान भटकाने का प्रयास करते हैं. मगर क्या आप जानते हैं कि छींक रोकना आपके लिए जानलेवा सिद्ध हो सकता है? जी हाँ दोस्तों, छींक को रोकने से हमारी श्वास नली पर गहरा असर पड़ता है जिससे हमारी सांसें बंद हो सकती हैं. केवल इतना ही नहीं बल्कि, छींक रोकने का सीधा असर हमारे दिमाग पर पड़ता है जिससे हमारा दिमाग काम करना बंद कर सकता है. इसके इलावा भी छींक रोकने के कईं नुक्सान हैं जिनसे शायद आप वाकिफ नहीं होंगे. तो आज के इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे ही छींक रोकने के नुक्सान बताने जा रहे हैं, जो आपकी जान के दुश्मन बन सकते हैं.

अक्सर आपने एक बात नोटिस की होगी छींक आने पर लोग उसको दबाने की कोशिश करते हैं या फिर पब्लिक प्लेस पर छींकने से कन्नी कतराते हैं. मगर आपको यह जानकर हैरानी होगी कि छींक आना आपके अच्छे स्वास्थ्य का सूचक होती है. इससे आप अपने हेल्थी होने का पता लगा सकते हैं.

जब कोई बाहरी तत्व या पदार्थ हमारी श्वास नली के जरिए हमारे शरीर में प्रवेश कर रहा हो तो ऐसे में छींक आना आम बात है. छींक आने से वह तत्व शरीर के बाहर ही रह जाता है अंदर नहीं आ पाता.

जब कोई इंसान छींकता है तो उसके शरीर से 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा बाहर निकलती है. ऐसे में छींक रोककर उस हवा को दबाने से हमारे शरीर पर बुरा असर पड़ता है.

छींक आने से ना केवल श्वास नली बल्कि शरीर के कई अन्य अंग ग्रस्त होते हैं. छींक का सबसे अधिक असर हमारे कानों पर पड़ता है.

अगर आप लगातार सीन को रोकने का प्रयास करते हैं तो आपका इयरडम फटना तय है. ऐसी परिस्थिति में आप हमेशा के लिए बहरे हो सकते हैं.

कानो ही नहीं बल्कि सिंह रोकने से दिमाग की नसों पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है. छींक रोकने से दिमाग में मौजूद रक्त कोशिकाएं कमजोर हो जाती हैं और नसें फटने की आशंका बनी रहती है.

छींक  को रोकने से आंखों की रक्त कोशिकाएं भी बुरी तरह प्रभावित होती हैं. ऐसे में आंखों की पुतलियां टूटने की संभावना बनी रहती है. इससे आप अंधे हो सकते हैं.

लगातार छींक रोकने से आपकी गर्दन पर मोच आ सकती है. साथ ही इसका गहरा प्रभाव आपके दिल और फेफड़ों पर पड़ता है जिससे आपको हर्ट अटैक भी आ सकता है.जिससे आपकी मौत भी हो सकती है.

छींक बंद करने के लिए कुछ आसान से घरेलू उपाय आजमाए जा सकते हैं। जो बिना किसी नुकसान के आपको छींक से निजाक दिला सकते हैं।

1. अदरक से – एक कप पानी में अदरक डालकर उबाल लें और गुनगुना ठंडा होने पर इसमें शहद मिलाकर पिएं। छींक से राहत मिलेगी।

2. सौंफ की चाय से – एक कप पानी में दो चम्मच सौंफ कूचकर उबाल लें। दस मिनट तक पानी को ढंककर रख दें और बाद में छानकर चाय की तरह पिएं।

3. पिपरमिंट तेल से – एक बर्तन में पानी उबालें और उसमें पिपरमिंट तेल की 5 बूंदें मिला लें। एक तौलिए से सर ढककर भाप लें। छींक जल्द ही बंद हो जाएगी।

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