हिन्दुस्तान का वो गांव जो आज भी है अंग्रेजों का गुलाम, जानिए क्यों नहीं हुआ आजाद

पूरा देश जहां गणतंत्र दिवस मना रहा है, वहीं दूसरी ओर देश में एक जगह ऐसी भी है जो आज भी गुलाम है। लोग अंग्रेजों की गुलामी से सबसे बाद में आजाद होने के लिए गोवा को जानते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि आज भी एक गांव गुलाम हैं, आजादी और गणतंत्र के देश सात दशक पूरे कर चुका है। इस दौरान कई सरकारें आईं और आकर चली गईं लेकिन इस गांव को आजाद कराने के लिए किसी ने कदम नहीं उठाए। जबकि इन दिनों देश में राष्ट्रवाद की बयार चल रही है।

देश की राजधानी दिल्ली और देश की संसद से मात्र 145 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद हरियाणा का एक गांव आज भी गुलामों की तरह जी रहा है। क्योंकि यहां आज भी गोरों को नियम चलते हैं। हरियाणा के भिवानी जिले के रोहनात गांव में आजतक एक भी बार लोगों ने तिरंगा झंडा नहीं लहराया है। इस गांव के माथे पर आज़ादी के बाद भी गुलामी का कलंक लगा हुआ है। कहने को ये गांव आजाद भारत में है, लेकिन न तो कोई सिस्टम यहां बदला और न ही किसी ने इसकी तरफ देखने की जरूरत समझी। बीते 70 सालों से लोग यहां आजादी से मरहूम है। इसी के चलते साल 2010 में यहां तिरंगा की जगह हर घर में काले झंडे फहराए गए थे।

इस गांव में आजादी के बाद तिरंगा न फहराने की बहुत बड़ी वजह है। इसको समझने के लिएट आपको गांव के उन बुजुर्गों से मिलन होगा जिन्होने अंग्रेजों का वो दमनकारी दौर देखा है। उन पेड़ों और दरख्तों से मिलना होगा जो इसकी गवाह हैं।

मेरठ से शुरु हुई सन 1857 की क्रांति में इस गांव की बड़ी भूमिका थी। गांव का दुर्भाग्य ये रहा कि इसकी भूमिका को इतिहास के पन्नों में जगह नहीं मिली। क्रांति की मसाल जब 10 मई को मेरठ से जगी तो पूरे देश में फैल गई। इतिहासकारों के मुताबिक 29 मई 1857 को रोहनात गांव के लोगों ने भी अंग्रेज़ों की सरकार के खिलाफ विद्रोह कर दिया। गांव के लोगों ने अंग्रेज अफसरों की हत्या करनी शुरु कर दी। विद्रोह से घबराई ब्रिटिश सरकार ने पूरे गांव से उसका बदला लिया।

अंग्रेज अफसरों ने रोहनात गांव पर तोप के गोले चलवाए, जिसमें लोग ज़िंदा जल गये। महिलाएं और बच्चें जान बचाने के लिए कुएं में तक कूद गये। ये घटना जलियांवाला बाग के नरसंहार की तरह ही थी। लेकिन किसी को याद नहीं रही, क्योंकि सब इस गांव को भूल गए।

कई लोगों को काला पानी की सज़ा दी गई। अंग्रेज़ों ने गांव के लोगों को ज़िंदगी भर के लिए सजा देने के लिये कई काम किए। साथ ही रोहनात गांव को नीलाम करने का फैसला किया, और बोली लगाकर 20 जुलाई 1858 को 8100 रुपये में बेच दिया। गांव पर खरीददारों ने कब्जा कर लिया। जो आसपास के ही रईस लोग थे। गांव के लोगों को घर जमीन जायदाद से बेदखल कर दिया गया।

इस गांव की त्रासदी यहीं खत्म नहीं होता जब देश आजाद हुआ तो किसी ने कोई ख़बर तक नहीं ली। आपको जानकर ताज्जुब होगा की रोहनात में आज भी लोग मोबाइल फोन की सुविधा से वंचित है। आसपास के नेटवर्क से यहां के लोग छत में खड़े होकर बात करते हैं। हद तो ये हैं कि लैंडलाइन यानी बेसिक फोन के कनेक्शन के लिए लोग मोहाज हैं।

देश की आज़ादी के लिए बलिदान की सज़ा इस गांव के लोगों आज भी मिल रही है। गांव के लोग खुद को गुलाम समझते हैं, इसीलिए इस गांव में अब तक तिरंगा नहीं फहराया गया है। लेकिन आजादी के इतने साल बाद अब हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर ने इसकी गुलामी खत्म करने का निर्णय लिया है। खुद ही यहां तिरंगा झंड़ा फहराने की शुरुआत की है।