बेटी जब पहली बार पीरियड्स पर हो तो माँ को समझानी चाहिए बेटी को ये 7 ख़ास बातें

हर लड़की जब जवानी की दहलीज़ पर कदम रखती है, तो उसके जीवन में मासिक-धर्म के रूप में बड़ा बदलाव आता है, जो कि एक सामान्य प्रक्रिया है.. पर अक्सर अधूरी या गलत जानकारी के चलते पहले पीरिएड का अनुभव काफी भयानक हो जाता है। ऐसे में जरूरी है लड़की के पहले पीरिएड के दौरान कुछ बातें ध्यान रखी जाए और मां से बेहतर ये काम कोई नहीं कर सकता है। आज हम आपको कुछ ऐसी ही बाते बताने जा रहे हैं जो हर लड़की की मां को जरूर ध्यान में रखनी चाहिए ताकि उनकी बच्ची का पहला पीरिएड “शर्म” और “खौफ” की बजाए सुखद अनुभव के साथ गुजरे।

पीरिएड्स के बारे में अगर लड़की को पहले से जानकारी न हो तो उसे काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है, जानकारी के अभाव में उनके मन में कई सारे सवाल उठते हैं , जैसे कि ये कोई शारीरिक रोग तो नहीं , साथ ही पहले पीरिएड के वक्त लड़कियां शर्म और हीन भावना भी महसूस करती है, ऐसे में ये मां का फर्ज है कि वो अपनी बेटी की इस दुविधा को दूर करें और उसके जीवन के सबसे अहम पड़ाव पर उसका साथ दे। ये मां का दायित्व है कि उसे बताए कि पीरिएड्स यानी मासिक धर्म महिलाओ की सामान्य शारीरिक गतिविधियों में से एक है, ये दूसरे शारीरिक गतिविधियां  है । आपको अपनी बेटी को यह बताना होगा कि मासिक-धर्म में रक्त स्त्राव, एक सामान्य प्रक्रिया है और हर सेहतमंद लड़की इससे गुज़रती है।

इसके साथ ही बेटी के पहले पीरिएड के दौरान मां को कुछ और भी बातों का भी खास ध्यान रखना चाहिए .. जैसे कि..

1 एक लड़की की मां का सबसे पहला दायित्व है कि वो अपनी बच्ची को सही समय पर पीरिएड्स के बारे में सही जानकारी दे। नौ से बारह साल की उम्र में लड़कियों मासिक-धर्म शुरू के बारे में सरल शब्दों में समझाया जाए, तो वे समझ जाएँगी। लेकिन अगर आपने उसे अब तक नहीं बताया है और आपकी बच्ची का पहला पीरिएड आ गया तो भी कोई बात नहीं .. आप अब भी उसे जानकारी दे सकती हैं.. जैसे, पीरिएड्स कितने समय पर आता है और कितने दिनों तक चलता है, और इसमें क्या-क्या तकलीफ हो सकती है । ताकि आपकी बच्ची इस बारे में बेवजह ज्यादा परेशान ना हो ..साथ ही पीरिएड्स के बारे में पहली बार बताते समय अच्छा होगा कि आप सिर्फ ज़रूरी बातों पर ध्यान दें और इसका सामना करने के बारे में सही सुझाव दें।

2.पहले पीरिएड के दौरान एक लड़की को शारीरिक बदलाव के साथ मानसिक द्वंद का भी सामना करना पड़ता है । पीरिएड्स को लेकर लड़की के मन में कई सारी उलझने और आशंकाए जन्म लेती है.. ऐसे में ये मां की जिम्मेदारी है कि वो उसकी उलझने दूर करें.. इसके लिए आप बेटी को जानकारी के साथ पीरिएड्स को लेकर अपने अनुभव भी बता सकती हैं.. इससे उसकी मानसिक उलझन काफी हद तक दूर होगी। अपने पहले पीरिएड के अनुभव को अपनी बेटी को बताने से, आप उसे जज़्बाती तौर पर सहारा दे पाएँगी।

3. जानकारी के अलावा पहले पीरिएड के दौरान बेटी को साफ-सफाई के बारे में बताना भी बेहद जरूरी है.. जैसे कि सैनिटरी नैपकिन का कैसे इस्तेमाल करना है? उसे हर 4 से 5 घंटे में बदलते रहना है और इसके साथ ही योनि के साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने की सलाह भी दें।

4 साफ-सफाई के बाद, बात आती है पीरियड्स के दौरान उचित खान-पान की.. इसका ख्याल भी एक मां को रखना चाहिए । इस दौरान बेटी को भरपूर मात्रा में पानी का सेवन करने की सलाह दें, इसके लिए छाछ या नारियल पानी भी पी सकती हैं। साथ ही खान पान के प्रति भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इस वक्त शरीर से कई सारे खनिज और मिनरल्स बाहर निकल जाते है, ऐसे में इनकी कमी को पूरा करने के लिए संतुलित और पौष्टिक आहार का सेवन करना जरूरी है। साथ ही फॉस्ट फूड और ज्यादा मसाले वाले खाने से परहेज रखना चाहिए।

5. साथ ही पीरियड्स के समय पेट और कमर में दर्द होना सामान्य बात है। इसलिए इस दर्द से राहत पाने के लिए बेटी को तुरंत कोई दवा ना दें । बल्कि इसके लिए उसे आप 1 कप दही में थोड़ा सा भुना हुआ जीरा और 1 चम्मच शक्कर मिलाकर दे सकती हैं। इससे दर्द में काफी राहत मिल जाएगी।

6. पीरिएड्स के दौरान ठन्डे पानी को न तो पीना चाहिए और न ही इससे नहाना चाहिए, ऐसे में हो सके तो बेटी को पीने के लिए हल्का गर्म पानी ही दें और साथ ही नहाने के लिए भी गरम पानी का इस्तेमाल कराएं।

7. इस दौरान अधिक भागदौड़ वाल काम नहीं करना चाहिए, क्योंकि शरीर को आराम की जरुरत होती है। इसलिए बेटी को बहुत अधिक काम काज या खेल कूद करने की बजाए आराम करने की सलाह दें।

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