घर से निकलते वक्त कहा था “माँ मैं ताबूत में वापिस आऊंगा”, इस बेटे की ये बात अनजाने में हुई सच

अमृतसर: हमारी भारत माता की रक्षा के लिए आए दिन न जाने कितने जवान शहीद होते आ रहे हैं. अभी हाल ही में अमृतसर के रहने वाले गुरमेल सिंह जम्मू में पाकिस्तान द्वारा हुए सीजफायर के उल्लंघन में गोली लगने से शहीद हो गए हैं.  आपकी जानकारी के लिए हम आपको बता दें कि पिछले 3 साल से लांस नायक गुरमेल सिंह एक घर बनवा रहे थे और अब किस्मत तो देखिए उसी में के राष्ट्रीय सम्मान के साथ उनका पार्थिव शरीर पहुंच गया.  मिली जानकारी के अनुसार रविवार की सुबह गुरमेल सिंह के परिवार वाले उसका इंतजार कर रहे थे.  लेकिन जब गुरमेल सिंह आने की जगह उनका ताबूत घर पहुंचा तो उनकी पत्नी कुलजीत कौर, पिता तरसेम सिंह,  मां गुरमीत कौर और छोटा भाई मालविंदर उस ताबूत को देखकर अपने आंसू नहीं रोक पाए. इसके इलावा हम आपको बता दें कि गुरमेल सिंह की एक 7 साल की बेटी रिपन दीप कौर भी थी जो अपने पिता को ताबूत में आता देखकर डर गई.

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि पिछले महीने यानी 10 नवंबर की छुट्टी से जब गुरमेल सिंह वापस आया तो वह अपनी मां को बार-बार चिढ़ा रहा था कि अगली बार वह ताबूत में ही वापस घर आएगा.  केवल इतना ही नहीं बल्कि मजाक-मजाक में वह बार-बार दोहरा रहा था कि ताबूत में अगर वह ना आया तो वीआरएस रिटायरमेंट लेकर ही वापस लौटेगा.  इसके इलावा अपनी नौकरी के 14 साल और 3 महीने में पूरा कर चुका था और अभी 9 महीने में ही रिटायरमेंट लेने वाला था.

मिली जानकारी के अनुसार गुरमेल के भाई मलविंदर ने बताया कि अक्सर वा मा को कहता था कि उसके  गांव का दरवाजा उसके नाम पर ही बनेगा ऐसा सुनते ही उसकी मां उसके मुंह पर हाथ रखकर उसे चुप होने के लिए कह देती.  परंतु कौन जानता था कि इस बार गुरमेल सिंह की कही बात सच हो जाएगी.

गुरमेल सिंह की शहादत के बाद पंजाब सरकार में श्रद्धांजलि देने पहुंचे डॉक्टर राज कुमार वेरका ने गुरमेल सिंह की पत्नी कुलजीत कौर को 5 लाख  रुपए,  गुरमेल सिंह के माता-पिता को दो लाख रूपय और बाकी एक सदस्य को  सरकारी नौकरी और जमीन के लिए 5 लाख रूपये देने का ऐलान किया.  सरकार गुरमेल सिंह के परिवार को उनका बेटा तो नहीं लौटा सकती परंतु गुरमेल सिंह की बेटी को मुफ्त शिक्षा दिलवाएगी साथ ही गांव में पंचायत की रजामंदी से उनका स्मारक भी बनाएगी.  आपको बता दें कि राज कुमार वेरका के इलावा इस शहीद को श्रद्धांजलि देने के लिए सांसद गुरजीत औजला और विधायक विक्रम सिंह मजीठिया भी पहुंचे थे.  जिसके बाद पूरे गांव और परिवार वालों ने नम आंखों से इस शहीद को विदा कर दिया.

आपकी जानकारी के लिए हम आपको बता दें कि इस शहीद की शहादत के बाद शाम को उसके अंतिम संस्कार की रस्में पूरी कर दी गई.  इस अंतिम संस्कार के दौरान गुरमेल सिंह के पिता ने अपने बेटे को नम आंखों से मुखाग्नि दी.  यह संस्कार की रसम गांव वालों की सहमति से गांव के एक सरकारी स्कूल में की गई.  इसके बावजूद भी जिला प्रशासन ने स्कूल में बिजली का कोई प्रबंध नहीं किया.  इसके बाद गांव वालों ने ट्रैक्टर की रोशनी और TV चैनल के कैमरे की लाइट से गुरमेल सिंह का अंतिम संस्कार कर दिया और इस संस्कार में गुरमेल सिंह के परिवार समेत कई सैकड़ों लोग शामिल थे।

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