भारत के लोकतंत्र का यह ‘ब्रह्मास्त्र’ पूरी दुनिया पर है भारी

नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि प्रौद्योगिकी के कारण लोग इंटरनेट पर आश्रित हो गए हैं और पारंपरिक सीमाएं विलोपित हो रही हैं। बावजूद इसके पाकिस्तान ही नहीं पूरी दुनिया पर भारत की परिवारवादी परंपरा सबसे भारी है।

राष्ट्रपति भवन में उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की पुस्तक ‘सिटिजन एंड सोसायटी’ के विमोचन के अवसर पर मोदी ने कहा, “प्रौद्योगिकी ने नागरिकों को ‘नेटिजन’ में तब्दील कर दिया है, पारंपरिक सीमाएं खत्म हो रही हैं। हमारे पास एक इकाई है, जिसे हम परिवार कह सकते हैं, जो प्राचीन काल से हमारी सबसे बड़ी ताकत रही है।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “हमें विभिन्न बोलियों और भाषाओं, विभिन्न धर्मो वाले एक देश पर गर्व होना चाहिए, जहां के लोग सौहार्द्रपूर्ण ढंग से रहते हैं। हमारे पास यह विरासत है, जिसे हमें संरक्षण और प्रोत्साहन देना चाहिए।”

पुरा विश्व मानता है लोकतंत्र के ‘ब्रह्मास्त्र’ का लोहा –

मुखर्जी ने कहा, “पुस्तक नागरिक के रूप में हमारे दायित्वों के बारे में याद दिलाती है और कई बार हम उन दायित्वों के निर्वहन में विफल हुए हैं। हम नहीं भूल सकते हैं कि प्रभावी ढंग से जुड़े बिना हम सफलता नहीं प्राप्त कर सकते हैं और हमारे लोकतंत्र की सुरक्षा नहीं कर सकते हैं। लोकतंत्र में हमेशा शोर होता है और हमारे लोकतंत्र में कुछ ज्यादा ही शोर होता है। अगर हम खुद को मुद्दों के साथ जोड़ते हैं तो यह हमेशा लाभ देता है।”

राष्ट्रपति ने कहा, “कभी-कभी मुझको आश्चर्य होता, जब मैं इस पर ध्यान देता हूं कि कैसे हम 128 करोड़ की आबादी, 122 भाषाएं और 1800 बोलियां वाले 33 लाख वर्ग किलोमीटर में फैले एक देश का अब भी एक व्यवस्था, एक झंडा और एक संविधान के तहत प्रबंधन कर रहे हैं।”

मुखर्जी ने कहा, “यह स्वत: संरक्षित, सुरक्षित और विकसित नहीं हो सकता है। मैं सोचता हूं कि इन पहलुओं की ओर भारतीय नागरिकों का ध्यान खींचना मेरा कर्तव्य होगा, जिसे हमारे उपराष्ट्रपति ने जोश के साथ किया है।”

 

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