मॉस्को: भारत और रूस के बीच की स्ट तरह के सम्बन्ध हैं यह सभी लोग जानते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत के विरोधी चीन से भी रूस की अच्छी दोस्ती है। समय-समय पर रूस भी चीन के ऊपर मेहरबान हो जाता है और भारत की मुश्किलें बढ़ा देता है। किसी भी देश के लिए उसकी शक्ति उसके हथियारों से होती है। आज के समय में जिस देश के पास सबसे ज्यादा हथियार हैं, वही देश सबसे ज्यादा शक्तिशाली है। अगर दुश्मन देश भी ज्यादा हथियार रखेगा तो किसी भी देश की मुश्किलें बढ़ सकती है।

हाल ही में रूस और चीन की दोस्ती का एक नया उदहारण देखने को मिला है। सही मायनों में कहा जाये तो वैश्विक राजनीति को समझना हर किसी के बस की बात नहीं है। यह देखने में जितनी आसान दिखती है, दरसल होती नहीं है। अभी कुछ दिनों पहले जब भारत और चीन के बीच डोकलाम क्षेत्र को लेकर विवाद था, तब सोशल मीडिया पर कई तरह की अफवाहें देखनें को मिल रही थी। हर देश भारत के पक्ष में दिख रहा था। जब सभी भारत के पक्ष में ही हैं तो कोई भारत के विरोधी देश चीन की मदद क्यों कर रहा है।

रूस ने 2015 में हुए समझौते के तहत चीन को सुखोई 35 विमानों की दूसरी खेप भेज दी है। रूस ने चीन को 10 सुखोई विमान भेजे हैं। जानकारी के लिए आपको बता दें नाटो कोड के अनुसार इन्हें फ्लेनकर ई नाम दिया गया है। रूस के सैन्य और तकनीकि सहयोग विभाग से जुड़े हुए एक अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की है कि 10 लड़ाकू विमानों की दूसरी खेप चीन को भेजी जा चुकी है। बचे हुए 10 विमानों को 2018 में भेजा जायेगा।

इससे पहले एक अन्य सूत्र ने बताया था कि ऐसे ही चार लड़ाकू विमानों की पहली खेप चीन को रूस ने 2016 में भेजी थी। दोनों देशों के बीच 2015 में 2 अरब डॉलर का समझौता हुआ था। इस वजह से रूस को चीन को सुखोई 35 लड़ाकू विमान देने पड़ रहे हैं। सुखोई 35 विमान 2780 किलोमीटर प्रति घंटे से की रफ़्तार से उड़ने में सक्षम हैं। इसका निशाना बड़ा ही सटीक है और 1600 किमी के दायरे में आसानी से मार कर सकता है। इस लड़ाकू विमान ने 30 मिमी गन के अलावा बम और मिसाइल ले जाने की भी क्षमता है।

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