अध्यात्म

शादीशुदा महिलायों को भूल से भी नहीं करने चाहिए ये 4 काम, वरना लगता है घोर पाप

हमारे हर्तीय समाज में औरत को देवी समान माना जाता है. जिस घर में लड़की पैदा हो उसको लक्ष्मी की तरह पूजा जाता है. अब समय बदल रहा है. लड़कियों को लड़कों के समान इज्जत मिल रही है. एक समय था जब लड़कियों को लोग नीच समझ कर पैदा करने से भी डरते थे. लेकिन, अब लोगों के पढ़े लिखे होने के कारण लड़कों और लड़कियों में किये जाने वाले फर्क को लोग नकारने लग गये हैं. अगर लडकियाँ और औरतें नहीं होती तो हमारा समाज अधूरा रहता क्यूंकि, औरत एक जननी है अगर ये हमारा वंश आगे नहीं बढ़ाएगी तो हमारी पीढ़ी वही रुक जाएगी. ऐसे में मर्दों से भी अधिकतर समझदार औरतों को ही माना जाता है. औरतें ना केवल घर सम्भालती हैं, बल्कि, पूरे परिवार को पालती हैं. हमारे समाज में जहाँ औरतों को पूजा जाता है वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो उन्हें अपना खिलौना समझते हैं और खेल कर उन्हें फेंक देते हैं. इसलिए औरतों को हमेशा हर कदम डर कर फूंक-फूंक कर रखना पढ़ता है. ऐसे में अपनी इज्जत के लिए उन्हें समाज में हर पहलु को लेकर चलना पड़ता है. क्यूंकि उनकी एक गलती से लोग उन्हें नीचा दिखा देते हैं. हिन्दू धर्म के शास्त्रों के अनुसार भगवान ने औरतों के लिए कुछ नियम कानून बनाये हैं जिन्हें तोड़ने से उनको काफी कुछ झेलना पड़ सकता है. ऐसे में आज हम आपको चार ऐसे काम बताने जा रहे हैं, जिन्हें शास्त्रों ने औरतोंको करने से साफ़ तौर पर मना किया है. चलिए जानते हैं उन कामों के बारे में…

अधिक समय के विरह से बचें

पति अपनी पत्नी के लिए रक्षक होता है. ऐसे में पत्नी को ज्यादा समय तक अपने पाती से दूरी नहीं रखनी चाहिए. क्यूंकि अधिक दूरी आने से रिश्ता कमज़ोर पद सकता है और औरत पर संकट के बादल मंडरा सकते हैं. इसलिए शास्त्रों में साफ़ तौर पर लिखा है कि हर नारी को अपने पति से अधिक विरह से परहेज़ करना चाहिए.

बुरे चरित्र के लोगों से परहेज़ करें

कहते हैं संगति का हर इंसान पर गहरा असर पड़ता है. इसलिए जितनी अच्छी संगति से हम विचरेंगे, उतनी ही अधिक हमे समझ आएगी. वो कहावत तो आपने सुनी ही होगी कि एक बुरा सेब बाकी अन्य सेबों को भी खराब कर देता है. बिलकुल वैसे ही खराब चरित्र के लोगों के साथ उठने बैठने से आप पर भी कहीं ना कहीं उनका बुरा प्रभाव जरुर पड़ेगा. इसलिए शास्त्रों में हर नारी को बुरे चरित्र के लोगों से दूर रखने के लिए कहा गया और अपने आचरण को शुद्ध बनाने के लिए कहा गया है.

आपनों की उपेक्षा हरगिज़ न करें

कभी कभी जीवन में कुछ ऐसी परिस्थियाँ भी आती हैं, जहाँ हमे अपनों की कईं बातें बुरी लग जाती हैं. ऐसे में हमे उनकी निंदा नहीं करनी चाहिए और उनका विरोध नहीं करना चाहिए. क्यूंकि, हमसे कोई तब तक ही बुरा कर सकता है, जब तक हम उसका विरोध करेंगे. जब हम उसको रेस्पोंस नहीं देंगे तो एक न एक दिन वह शांत जरुर हो जायेगा., इसलिए शास्त्रों में औरतों को अपनों की उपेक्षा से मना किया गया है.

पराए घर में ना रहें

औरतों को किसी भी स्थिथि में अपने घर से दूर यानी किसी पराए घर में नही रहना चाहिए. क्यूंकि, ऐसा करने से समाज में उस औरत की दशा बुरी हो जाती है और उसको चरित्रहीन माना जाता है. इसलिए हर हाल में औरत को अपने ही पति के साथ खुश रहना चाहिए.

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