पंचकुला: अभी आप राम रहीम और उसकी मुंहबोली बेटी हनीप्रीत को तो भूले नहीं होंगे। वही हनीप्रीत जिसने राम रहीम को सजा के बाद भगाने के लिए बड़ी साजिश रची थी, जिसकी वजह से हिंसा भड़की और 30 से ज्यादा लोगों से अपनी जान गँवा दी। इस समय पंचकुला हिंसा और देशद्रोह के आरोप में हनीप्रीत जेल के अन्दर हैं। हनीप्रीत के खिलाफ चार्जशीट के साथ दाखिल डिसक्लोज़र रिपोर्ट में कई राज सामने आये हैं। चार्जशीट में इस बात का जिक्र किया गया है कि राम रहीम को भगाने के साथ ही हरियाणा सरकार का तख्तापलट करने की भी साजिश रची गयी थी।

हनीप्रीत की इस साजिश में राम रहीम भी शामिल था। इस साजिश को अंजाम तक पहुँचाने के लिए कई लोगों की ड्यूटी लगायी गयी थी। रिपोर्ट के अनुसार जैसे ही सीबीआई की विशेष अदालत ने राम रहीम को दोषी करार दिया, हनीप्रीत ने अपने ड्राईवर राकेश को इशारा किया। इसके बाद अभिजीत के माध्यम से लोगों को भड़काकर पंजाब और हरियाणा में हिंसा करवाई गयी। डेरे पर रखा गया काला धन भी उपद्रव के लिए खर्च किया गया। रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि फैसले से पहले ही सरकार, कानून व्यवस्था और न्याय व्यवस्था पर दबाव बनाने के लिए भीड़ को इकठ्ठा किया गया था।

पंचकुला के एक व्यक्ति द्वारा जनहित याचिका दाखिल करने के बाद हाईकोर्ट ने राम रहीम को आदेश दिया था कि वह अपने अनुयायियों को वहाँ से हटाये। पुलिस को भी आदेश दिया गया था कि अनुयायियों को पंचकुला से खदेड़ा जाये। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि हाईकोर्ट की सख्ती से राम रहीम पूरी तरह से घबरा गया था। न्यायपालिका की आँखों में धूल झोकने के लिए राम रहीम ने 23 अगस्त को एक वीडियो बनाकर भेजा जिसमें वह शांति बनाये रखने की अपील करता हुआ दिखाई दे रहा था। जबकि हकीकत कुछ और ही थी।

रिपोर्ट में यह बात भी सामने आयी है कि डेरे की कमिटी में केवल आमिर लोगों के लिए ही जगह होती थी। जो लोग डेरे के लिए अच्छा काम करते और ज्यादा से ज्यादा पैसा खर्च करते थे उन्हें ही डेरे की 45 सदस्यीय कमिटी और जिला अनुसार 25 सदस्यीय कमिटी में जगह दी जाती थी। रिपोर्ट में बताया गया है कि 25 अगस्त को कोर्ट के फैसले से पूर्व 17 अगस्त को हनीप्रीत ने डॉ. आदित्य इंसा द्वारा बनाए गए पदाधिकारियों और जिम्मेदार लोगों के साथ बैठक की थी। इस बैठक में दिलावर इंसा, पवन इंसा, महेंद्र इंसा, गोविंद, जसवीर सिंह, गोपाल, सुरेंद्र धीमान गोबी राम, राकेश इंसा, राम सिंह, सीपी अरोड़ा, विक्रम, बलकार, दान सिंह शामिल थे। इसी मीटिंग में तय किया गया था कि बात ना बनने पर हिंसा फैलाई जाएगी।

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