आठ साल पहले गायब हुआ था भतीजा, अचानक ट्रैन में मिला, हालत देख चाचा के होश उड़ गए

भारत से लेकर पूरी दुनिया में ह्यूमन ट्रैफिकिंग के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं.. हर साल ना जाने कितने मासूम बच्चे इसका शिकार बन रह हैं। अपहरण कर इन बच्चों को भिक्षावृति, चोरी और दूसरे अमानवीय कामों मे लगा दिया जाता है और फिर जहां इन्हें जीवन की दिशा मिलनी होती है उसी उम्र में इनका इनका भविष्य हमेशा के लिए गुमराह हो जाता है। हाल ही में इसी नरक भरे जीवन की यातना झेल रहे एक मासूम को उसके परिजनों ने ही ट्रेन में भीखते मांगते पाया है और फिर अपने मासूम को इस हाल में देखकर उनपर क्या बीती होगी हम और आप शायद उस दर्द का अंदाजा भी नही ला सकते।

ये वाक्या राजस्थान के झुंझुनूं जिले के मंड्रेला कस्बे में सामने आया है जहां आठ साल पहले गायब अपहृत हुआ बच्चा एक ट्रेन में अचानक उसके चाचा को दिख गया। अपहरण का शिकार हुआ यह बच्चा ट्रेन में भीख मांग रहा था। दरअसल आठ साल पहले 26 जून, 2009 को दो बच्चे गायब हो गए थे.. उनमें से एक ये बच्चा था जो अपने चाचा को ट्रेन में मिल गया जब मंड्रेला निवासी बबलू भार्गव अपने ससुराल भटिंडा जा रहा थे। उन्हें एक बच्चे को भीख मांगते देखा। यह बच्चा उनके खोए हुए भतीजे जैसा लग रहा था। बबलू ने उसे रोहित कहकर पुकारा तो भीख मांग रहे बच्चे ने पलटकर देखा। बबलू ने उसे अपने पास बुलाकर नाम पूछा तो उसका नाम रोहित ही था। जिसके बाद बबलू समझ गए सामने भीख मांग रहा बच्चा कोई और नही बल्कि उनका भतीजा ही है।

शरीर पर चोट के निशान से हुई पहचान

इसके बाद बबलू ने फोन करके अपने घर बताया तो परिजनों ने पहचान के रूप में दो चोट के निशान बताए जिससे उसकी पहचान हो गई… फिर रोहित को थाने से उसके घर ले जाया गया। हालांकि थानाधिकारी ने बताया कि बच्चे के परिजनों के अनुसार बताए निशान पर तस्दीक की कोशिश की गई है। पूरे मामले की जांच की जा रही है। डीएनए टेस्ट सहित तमाम जांच होगी उसके बाद पूरा तय हो पाएगा और उसके बाद ही बच्चा परिजनों को सौंपा जाएगा।

बच्चे की एक झलक पाने के लिए पूरा गांव था बेताब

रोहित के मिलने की खबर सुनने के बाद पूरा गांव उसकी एक झलक पाने के लिए बेताब था और जैसे ही रोहित घर पहुंचा तो घर पर खुशी का ठिकाना नहीं रहा। हालांकि रोहित का कहना है कि उसे अपहरण की कोई बात याद नहीं है। वह रेलवे स्टेशन पर भीख मांगता था। यह भी बताया कि दो साल किसी गांव में एक व्यक्ति ने उसे अपने पास रखा और उसने दो साल एक स्कूल में पढ़ाई भी की।

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