नई दिल्ली: गुजरात में इस समय चुनावी घमासान मचा हुआ है। हालांकि चुनाव की तारीखें अभी तक तय नहीं हुई हैं, लेकिन राजनीतिक महकमों में चुनावी जंग लगातार तेज होती जा रही है। चुनाव की तारीखें आनें से पहले ही इंडियन टुडे ने एक ओपिनियन पोल करवाया, जिससे साफ़ पता चलता है कि चाहे कुछ भी हो जाये अपने गढ़ गुजरात को बचानें में अभी बीजेपी सक्षम है। पिछले कुछ समय से भले ही बीजेपी की छवि को नुकसान पहुँचा हो, लेकिन अभी भी बीजेपी सबपर भारी है। जीएसटी, नोटबंदी, पाटीदार आन्दोलन के बावजूद भी गुजरात की पहली पसंद मोदी ही बने हुए हैं।

बीजेपी को नहीं है किसी से डरने की जरुरत:

182 विधानसभा सीटों पर कराये गए ओपिनियन पोल के अनुसार बीजेपी इस बार 115-125 सीटों पर अपना परचम लहरानें जा रही है। जबकि दूसरी तरफ बीजेपी को कड़ाके की टक्कर देने वाली कांग्रेस के हिस्से केवल 57-65 सीटें ही आ रही हैं। अगर सर्वे के सभी पहलुओं पर ध्यान से नजर डालें तो यह साफ़ हो जाता है कि अमित शाह और मोदी को कांग्रेस और तीन युवा पाटीदार नेताओं से बिलकुल भी डरने की जरुरत नहीं है। भले ही विपक्ष लगातार बीजेपी पर निशाना साध रहा हो या इनकी रैलियों में भारी जनसैलाब उमड़ रहा हो। लेकिन जीत बीजेपी की ही होगी।

गुजरात में किसे मिलेगा कितना वोट?

बीजेपी: 48%
कांग्रेस+अल्पेश ठाकोर+जिग्नेश मेवाणी: 38%
हार्दिक समर्थित पार्टी: 2%
अन्य(वाघेला समर्थित पार्टी+AAP):12%

गुजरात में किस पार्टी को कितनी सीट?

कांग्रेस+अल्पेश ठाकोर+जिग्नेश मेवाणी: 57-65 सीट
बीजेपी: 115-125 सीट
हार्दिक समर्थित पार्टी: 0 सीट
अन्य(वाघेला समर्थित पार्टी+AAP):0-3 सीट

मोदी की राह में खुद मोदी बन सकते हैं रोड़ा:

वहीँ अगर अधिकारिक तौर पर हार्दिक पटेल कांग्रेस को समर्थन देते हैं तो समीकरण में थोड़ा बदलवा होनें की उम्मीद है। हार्दिक के समर्थन देने के बाद 38% से 40% पार्टी का वोट शेयर हो जायेगा। ऐसे में कांग्रेस को 5-10 और सीटों का फायदा हो सकता है। इससे बीजेपी को ज्यादा नुकसान नहीं होनें वाला है। इस सर्वे के मुताबिक अगर गुजरात में मोदी की जीत में कोई रोड़ा बन सकता है तो वह कोई और नहीं बल्कि खुद मोदी हैं। सर्वे के दौरान लोग मोदी सरकार के कई फैसले से काफो नाराज दिखाई दिए।

चुनाव में हरवा सकती है बीजेपी से नाराजगी:

जनता की यही नाराजगी बीजेपी को चुनाव में हरवा सकती है। जनता में सबसे ज्यादा नाराजगी मोदी सरकार के नोटबंदी और जीएसटी वाले फैसले से है। 52 प्रतिशत लोग जीएसटी से काफी नाराज हैं, जबकि केवल 38 प्रतिशत ही जीएसटी के पक्ष में हैं। वहीँ 11 प्रतिशत लोगों ने कोई राय नहीं रखी। हालांकि नोटबंदी के मामले में जनता ज्यादा खुश दिखाई दे रही है। नोटबंदी से हुए फायदे के बारे में पूछे जानें पर 44 प्रतिशत लोगों ने कहा कि फायदा हुआ है, जबकि 33 प्रतिशत लोगों ने कहा कि नोटबंदी से कोई फायदा नहीं हुआ है। वहीँ 3 प्रतिशत लोगों ने कोई विचार नहीं रखा।

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