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जानिए वो तीन सौगंध… जिनको तोड़ने से राम रहीम पहुंच गया सलाखों के पीछे

तो क्या कथित बाबा राम रहीम को गुरु का श्राप लगा है। क्यों राम रहीम के जेल जाने के पीछे गुरु की वो तीन कसमें है जिनको बाबा ने तोड़ दिया। क्या गुरु से वचन न निभाने की सजा मिली है। बाबा राम रहीम को। जी हां ये कुछ ऐसे सवाल हैं जिनके बारे में बाबा राम रहीम के भक्त ढूंढ़ रहे हैं। दरअसल राम रहीम के बारे में करीबियों ने चौंकाने वाले खुलासे किए है। जिसके बाद ये सवाल खड़े हो गए हैं कि किया गुरु की बात अगर बाबा राम रहीम मान लेता तो शायद उसका ये हाल न होता। क्यों कि भक्तों का आरोप है कि बाबा ने गुरु की तीन कसमें तोड़ दी जिसके बाद ये हाल हुआ है।

बाबा राम रहीम ने तोड़ दी गुरु सतनाम बाबा की दी तीन कसमें

भक्तों के अनुसार राम रहीम के गुरु सतनाम महराज ने तीन कसमें चढ़ाई थी। जिसमें सबसे पहली कसम थी कि डेरे में कभी किसी महिला को साध्वी नहीं बनाएगा। दूसरी कसम थी कि डेरे में परिवार के किसी सदस्य को कोई मतलब नहीं होगा। तीसरी कसम के रूप में बाबा सतनाम ने कहा था की डेरा समाज की भलाई के लिए है। इसको कभी कोई ट्रस्ट न बनाना। बाबा सतनाम ने जो नाम कमाया था उसको राम रहीम ने मरने के बाद मिट्टी में मिला दिया। आगे हम आपको बताते हैं कैसे तोड़ी बाबा राम रहीम एक एक कर तीनों कसमें…

पहली कसमः डेरे में कभी साध्वियों को मत रखना

भक्तों के अनुसार गुरु संत शाह सतनाम जी महाराज ने बलात्कारी बाबा को डेरा प्रमुख बनाने से पहले साफ साफ कहा था कि डेरे में कभी किसी साध्वी नहीं रखना, लेकिन राम रहीम ने गुरु की मौत के बाद सैकड़ों साध्वियों को डेरे में रखा और उनकी इज्जत से खेलता रहा। इसने न सिर्फ साध्वियों को डेरे में रखने लगा बल्कि छोटी छोटी लड़कियों को भी इसने डेरे के अंदर पनाह दे दी। इसका मकसद साफ था.. वो आस्था की आड़ में अय्याशी करना चाहता था। घर वालों की तरफ से कोई विरोध न हो इसलिए उसने अपने परिवार को डेरे में अंदर जिम्मेदारी दी। पैसे जमीन और जायदाद देकर अपने परिवार को मालामाल कर दिया।

दूसरी कसमः परिवार को कभी साथ न रखना

गुरु शाह सतनाम सिंह महाराज ने दो और कसमें दी थी। बताया ये जा रहा है कि डेरे से अपने परिवार को दूर रखने को कहा था और डेरे में ट्रस्ट बनाने से भी मना किया था लेकिन बाबा ने न सिर्फ अपने परिवार को डेरे की जिम्मेदारी दी साथ ही डेरे के नाम पर ट्रस्ट बना कर अरबों रुपये कमाए। तहकीकात में ये पता चला कि फिल्मों के चक्कर में राम रहीम की पूजा पाठ और सत्संग में रुचि खत्म हो गई थी। उस पर बॉलीवुड का सुपर स्टार बनने का भूत चढ़ गया था।

तीसरी कमसः डेरे के नाम पर कोई ट्रस्ट मत बनाना

डेरे से जुड़े लोगों ने बताया कि जब से डेरे की शुरुआत हुई तब से यहां महिलाओं के डेरे में रहने पर पाबंदी है। डेरा प्रमुख के परिवार को डेरे से दूर ही रहे और ट्रस्ट बनाने को सही नहीं माना गया। डेरा प्रमुख को एक सादगी भरा जीवन जीना होता था लेकिन जब से राम रहीम डेरा प्रमुख बना तब से डेरे के अंदर गड़बडियां शुरू हो गई। शाह सतनाम महाराज की मौत के बाद राम रहीम का असलियत सामने आ गई। बाबा सतनाम ने अपना जीवन सूफियों संतों की तरह बिताया। लेकिन इसके उलट राम रहीम के हाल दूसरे थे।

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