हजार कोशिशों के बाद नही मिल रही सफलता, रोज सुबह करें ये काम.. बन जाएगी बात

वैसे तो किसी काम की सफलता के लिए मेहनत सबसे जरूरी है …पर कई बार ऐसा होता है कि हम मेहनत तो खूब करते हैं पर उसके अनुरूप सफलता नही मिलती और इसकी वजह है खराब संयोग या आपका दुर्भाग्य। क्योंकि सफलता के लिए जितनी जरूरी मेहनत होती है उतनी ही जरूरी है अच्छा संयोग। किस्मत अगर साथ ना दे तो लोग लाख कोशिश कर लें सफल नही हो पाते हैं।अब आप कहेंगे कि अच्छी किस्मत तो अपने बस में नही है तो हम बता दें कि खराब संयोग को भी अच्छे संयोग में बदला जा सकता है। आज हम आपको यहीं बताने जा रहे हैं कि अगर बार बार प्रयास के बाद भी आपको किसी काम में सफलता नही मिल रही है तो क्या करें…  astrology-remedy-to-be-successful-in-career

भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में बताया है ये उपाय

आप जो भी काम करें उसमें आपको सफलता मिलती जाए। इसके लिए आपको कोई खर्च करने की जरुरत नहीं है बस हर दिन सुबह उठकर भगवान श्रीकृष्ण के बताए एक आसान उपाय को ध्यान रखना है।

भगवान श्री कृष्ण गीता में कहते हैं, महर्षयः सप्त पूर्वे चत्वारो मनवस्तथा। मद्भावा मानसा जाता येषां लोक इमाः प्रजाः।।

यानी सप्तर्षि मेरे ही मन से उत्पन्न हुए हैं और मेरी ही विभूति हैं। जो व्यक्ति सुबह उठकर इनके नाम का ध्यान करता है उनका पूरा दिन उत्साह और आनंद में बीतता है। कहते हैं सुबह का असर आपके पूरे दिन के काम पर होता है। इसलिए जरुरी है कि आप दिन की शुरुआत इस तरह से करें कि सब कुछ आपके अनुकूल हो जाए।

सुबह सुबह करें इन सप्त ऋषियों का ध्यान

वेदों का अध्ययन करने पर जिन सात ऋषियों या ऋषि कुल के नामों का पता चलता है वे नाम इस प्रकार है:- 1.वशिष्ठ, 2.विश्वामित्र, 3.कण्व, 4.भारद्वाज, 5.अत्रि, 6.वामदेव और 7.शौनक। कहा जाता है जो सुबह इनके नाम का ध्यान कर लेता है। उसका पूरा दिन अच्छा बीतता है और हर काम में सफलता मिलने लगती हैँ।

1 वशिष्ठ ये राजा दशरथ के कुलगुरु थे और दशरथ के चारों पुत्रों के गुरु थे।

2 विश्वामित्र ऋषि होने के पहले विश्वामित्र राजा थे और ऋषि वशिष्ठ से कामधेनु गाय को हड़पने के लिए उन्होंने युद्ध किया था, लेकिन वे हार गए। इस हार ने ही उन्हें घोर तपस्या के लिए प्रेरित किया। उन्होंने इतने लंबे समय तक तप किया था कि देवताओं को उनका तप भंग करने की कोशिश करनी पड़ी।

3 कण्व कण्व वैदिक काल के ऋषि थे। इन्हीं के आश्रम में हस्तिनापुर के राजा दुष्यंत की पत्नी शकुंतला और उनके पुत्र भरत का पालन-पोषण हुआ था।

4 भारद्वाज भारद्वाज ऋषि राम काल के पहले हुए थे, लेकिन एक उल्लेख अनुसार वनवास के समय श्रीराम इनके आश्रम में गए थे, जो ऐतिहासिक दृष्टि से त्रेता-द्वापर का संधिकाल था।

5 अत्रि ऋग्वेद के पंचम मण्डल रचने वाले महर्षि अत्रि ब्रह्मा के पुत्र, सोम के पिता और कर्दम प्रजापति व देवहूति की पुत्री अनुसूया के पति थे।

6 वामदेव वामदेव ने इस देश को सामगान (यानी संगीत) दिया। वामदेव ऋग्वेद के चतुर्थ मंडल के सूक्त रचने वाले और जन्मत्रयी के तत्ववेत्ता माने जाते हैं।

7 शौनक शौनक ने दस हजार विद्यार्थियों के गुरुकुल को चलाकर कुलपति का विलक्षण सम्मान हासिल किया उस समय वो ऐसा करने वाले पहले ऋषि थे।

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