नई दिल्ली – नरेंद्र मोदी सरकार को पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के कारण काफी आलोचना हो रही है। इस मामले में पेट्रोलियम मंत्री ने धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत तभी तार्किक हो सकती है जब उन्हें वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाया जाए यानि अब सब कुछ केन्द्र सरकार के हाथ में है। आपको बता दे कि पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी से बाहर रखा गया है। Petrol can be available at 38 rs per litre.

कैसे कम हो सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?

दरअसल, पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के तहत लाया जाए तो उस पर अधिकतम टैक्स 28 प्रतिशत ही लगेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि जीएसटी के तहत सभी उत्पादों पर पांच, 12, 18 और 28 प्रतिशत दर से टैक्स लिया जाता है। यानि  पेट्रोल-डीजल को भी इन्हीं में से किसी एक स्लैब के तहत रखना होगा। अगर पेट्रोल पर 12 प्रतिशत जीएसटी लगे तो पेट्रोल करीब 38 रुपये प्रति लीटर की दर से मिलने लगेगा। इसी तरह अगर 18 प्रतिशत जीएसटी लगे 40.05 रुपये, 28 प्रतिशत जीएसटी लगे तो 43.44 रुपये प्रति लीटर पर मिलेगा। अगर पेट्रोल पर जीएसटी के अलावा अतिरिक्त कर (सेस) भी लगे तो भी इसकी कीमत इन कीमतों से बस दो-चार रुपये ही अधिक होगी।

जीएसटी पर क्या है राज्यों की भूमिका?  

what is GST Bill

आपको बता दें पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने में सबसे बड़ी भूमिका राज्य सरकारों कि है। हालांकि पहले ही केन्द्र पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को जीएसटी के दायरे में लाना चाहता था। पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स से राज्यों को सबसे अधिक राजस्व मिलने के कारण राज्यों ने केन्द्र सरकार का समर्थन नहीं किया था। अब राज्यों को ही अंतिम फैसला लेते हुए एक स्कीम बनाकर जीएसटी काउंसिल को देनी है। अगर सभी राज्य ऐसा करने को मान लेते हैं तो सभी राज्यों में एक समान टैक्स यानि जीएसटी लागू हो सकता है।

कैसे 30 का पेट्रोल हमें मिलता है 70 रुपए का?

हम सिर्फ पेट्रोल का ही भुगतान नहीं करते, बल्कि इसके बराबर ही उत्पाद शुल्क भी चुकाते हैं। अप्रैल, 2014 में पेट्रोल पर लगने वाला उत्पाद शुल्क 9.8 प्रति लीटर था। जो अब बढ़ते-बढ़ते 21.48 रुपए हो गया है। यानि हम हर एक लीटर प्रेट्रोल पर 21.48 रुपए का अतिरिक्त भुगतान कर रहे हैं। साफ तौर पर कहे तो पेट्रोल और डीजल के लिए जितने पैसे हम देते हैं उसमें 55.5 प्रतिशत पेट्रोल का 47.3 प्रतिशत का टैक्स होता है। यानि हर लीटर पर हम लगभग कीमत के बराबर टेक्स दे रहे हैं।

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