राजनीति

विश्व हिन्दू परिषद् ने संतों की उपाधि को लेकर लिया यह बड़ा फैसला, अब से संतों को…

नई दिल्ली: इस समय देश में ढोंगी बाबाओं की बाढ़ आयी हुई है। इन बाबाओं की हरकतों की वजह से अब ज्यादातर लोग बाबाओं पर भरोसा नहीं करते हैं। वरना एक समय था जब बाबा कहे जानें वाले व्यक्ति के लिए हर कोई इज्जत से अपना सैर झुका देता था। लेकिन पिछले कुछ सालों से जो बाबा लगातार करते हुए दिखाई दे रहे हैं, उसे देखकर तो यही लगता है कि वह बाबा बनें ही इसलिए हैं कि वह इसकी आड़ में अपने पाप कर्मों को आसानी से अंजाम दे सकें।

कर चुका है फायदा उठाकर कई लड़कियों के साथ बलात्कार:

ऐसे ही कुछ समय पहले एक महान बाबा हुआ करते थे आसाराम। वह अपनी सभाओं में खुद ही नाचते थे और भगवान का प्रवचन देते थे। आसाराम के भी पुरे देश-विदेश में करोड़ों भक्त थे, जो उसके लिए कुछ भी करनें को तैयार थे। इसी का नाजायज फायदा उठाकर वह कई लड़कियों के साथ बलात्कार भी कर चुका था, लेकिन उस ढोंगी बाबा की यह काली करतूत दुनिया के सामने आ ही गयी और उसे जेल हो गयी।

संत की उपाधि देने के लिए तय की गयी प्रक्रिया:

आजकल ऐसे ही बाबा राम रहीम की चर्चा हो रही है। अब तक कई साधुओं और ढोंगी बाबाओं ने बलात्कार या छेड़छाड़ जैसी घटना को अंजाम दिया है और आज वो जेल के पीछे हैं। आसाराम के बाद बाबा रामपाल और अब राम रहीम जेल की सलाखों के पीछे है। कैसे किसी को भी संत की उपाधि दे दी जाती है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने संत की उपाधि देने के लिए एक प्रक्रिया तय करने का फैसला किया है। यह फैसला राम रहीम जैसे लोगों को गलत कामों से रोकनें के लिए किया गया है।

संत की उपाधि देने से पहले की जाएगी पड़ताल:

राम रहीम के जेल जानें के बाद हिन्दू धर्म में शीर्ष नेताओं ने यह फैसला लिया है। हाल ही में विश्व हिन्दू परिषद के महासचिव सुरेन्द्र जैन ने कहा कि, संतों के अन्दर यह भावना है कि एक या दो धार्मिक नेताओं के गलत होने की वजह से पुरे हिन्दू धर्म उर समुदाय को गलत तरीके से दिखाया जा रहा है। आपको बता दें विश्व हिन्दू परिषद भारतीय अखाड़ा परिषद के साथ मिलकर काम करता है। जैन ने यह भी कहा कि अब से जिसे भी संत की उपाधि दी जाएगी, उससे पहले उसकी पड़ताल की जाएगी।

किसी का अनुयायी बनने से पहले कर ले विश्सनीयता की जाँच:

अखाड़ा और विश्व हिन्दू परिषद उपाधि देने से पहले इस बात पर भी ध्यान देगा कि व्यक्ति की जीवनशैली कैसी है। इस बात का भी ख़ास ध्यान रखा जायेगा कि संत के पास नकदी या किसी तरह की कोई अन्य संपत्ति तो नहीं है। पदाधिकारी ने बताया कि नकदी या अन्य संपत्ति ट्रस्ट की होनी चाहिए, और इसके इस्तेमाल ज्यादा से ज्यादा लोगों के कल्याण के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने लोगों को भी सावधान रहने की हिदायत देते हुए कहा कि किसी का अनुयायी बनने से पहले उसके विश्वसनीयता की जाँच कर लेनी चाहिए।

Back to top button