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हाईकोर्ट से फिर आसाराम बापु को झटका, ९वीं जमानत याचिका भी हुई खारिज

लंबे समय से नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न मामले में फंसे आसाराम बापु को राजस्थान हाईकोर्ट ने फिर तगड़ा झटका दिया है। (Asaram Bapu bail petition denied again) जस्टिस निर्मलजीत कौर ने आसाराम की तीसरी जमानत याचिका भी खारिज कर दिया। जस्टिस निर्मलजीत कौर ने जमानत पर फैसला सुनाते हुए ये कहा कि ट्रायल अब पूरा हो चुका है और अभियोजन पक्ष के सभी गवाह पूरे हो गए हैं,  इसलिए जमानत याचिका खारिज किया जाता है।

जमानत याचिका के खारिज होने के बाद आसाराम बापु और उनके समर्थकों के चेहरे फीर मायूस हो गए। इस बार आसाराम बापु और उन के समथकों को उम्मीद थी कि जिस तरह पैरवी हुई है उससे जमानत मिल ही जाएगी। पूर्व में भी जिला सत्र न्यायालय से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक आसाराम बापू की ८ बार जमानत याचिका खारिज कर चुके है. अब की बार  नौवां जमानत आवेदन था।

राम जेठमलानी, सुब्रमण्यम स्वामी, मुकुल रोहतगी,  जैसे वरिष्ठ अधिवक्ता भी आसाराम बापु  को जमानत नहीं दिलवा पाए । हाल ही मैं कुछ दिन पहले आसाराम बापु ने  ने कोर्ट के बाहर बोला  था कि जब जब उन्हे जमानत की उम्मीद होती है तब ऐसा कुछ घटित होता है जिस से मेरी जमानत याचिका खारिज हो जाती है। आसाराम बापु की ओर से इस बार सुप्रिम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता राजूराम चन्द्र एवं उनके सहयोगी सेवा राम ने पैरवी की, वही पीड़िता पक्ष की ओर से अधिवक्ता  पीसी सोलंकी, आनन्द पुरोहित और शिव कुमार व्यास ने सरकार की ओर से पैरवी की।

आप को बता दें की  इससे पहले १८ जुलाई को भी आसाराम बापु की जमानत याचिका खारिज कर दिया गया था। आसाराम बापु की ओर से वकिलों ने आसाराम बापु की उम्र और बीमारियों के आधार पर जमानत की पैरवी की। आसाराम बापु की जमानत याचिका खारिज होने के बाद सुप्रिम कोर्ट से आए अधिवक्ता सेवाराम ने कहा,  हाईकोर्ट आसाराम को जमानत देना ही नहीं चाहता है और राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा, सरकार आसाराम को जेल में ही मरवा देना चाहती है।

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