‘शिव मंदिर नहीं मकबरा था ताजमहल’, किसी और ने नहीं बल्कि ‘सरकार’ ने कही है ये बात

लखनऊ – ‘शिव मंदिर नहीं मकबरा था ताजमहल’ जी हां ये बात किसी और ने नहीं बल्कि खुद सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने आगरा कोर्ट से कहा है। सरकार और एएसआई ने कोर्ट से कहा है कि, ताजमहल पूर्व में एक मकबरा था ना कि शिव मंदिर। ये बात भी कही गई है कि ताजमहल मुस्लिम वास्तुकला की एक उत्कुष्ट कृति है। Taj mahal is not a temple.

मंदिर नहीं, मकबरा है ताजमहल 

Taj mahal is not a temple

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने ये बात मानी है कि ताजमहल मंदिर नहीं, बल्कि मकबरा है। यह बात भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने कोर्ट में सुनवाई के दौरान दाखिल हलफनामे में कही है। एएसआई अफसरों के मुताबिक अदालत में यह हलफनामा ताजमहल को संरक्षित रखने से जुड़े नोटिफिकेशन के आधार पर पेश किया गया है।

आपको बता दें कि केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने भी साल 2015 में लोकसभा में कहा था कि ताजमहल की जगह पर मंदिर होने के कोई सबूत नहीं मिले हैं। गौरतलब है कि ऐसा कई बार दावा किया जाता रहा है कि ताजमहल कि जगह पर पहले शिव मंदिर था जिसे शाहजहां ने तोड़कर बनवाया था। ये मुद्दा कई बार अलग-अलग लोगों द्वारा उठाया जा जुका है।

क्या है पूरा मामला

आपको बता दें, लखनऊ के गोमतीनगर निवासी अधिवक्ता हरिशंकर जैन और उनके पांच साथियों ने याचिका दायर कर कहा था कि ताजमहल एक मंदिर है। याचिका में उन्होंने ताजमहल को शिव मंदिर तेजोमहालय बताया था। इस याचिका में कोर्ट ने भारत सरकार और केंद्रीय पुरातत्व विभाग को बात साफ करने के लिए कहा था।

इसी याचिका पर जवाब देते हुए सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने आगरा कोर्ट में जवाब दाखिल किया। सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा आगरा कोर्ट में दिये गए इस जवाब पर हरीशंकर जैन की ओर से अधिवक्ता राजेश कुलश्रेष्ठ ने आपत्ति दर्ज कराई और जवाब को अपूर्ण बताया। अब इस मामले कि अगली सुनवाई 11 सितम्बर को होगी।

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