समाचार

हरि शंकर व विष्णु जैन: वकील बाप-बेटे का लक्ष्य है हिंदू राष्ट्र, अपनी दलीलों से करते हैं पस्त

वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद केस में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले हरिशंकर जैन और विष्णु जैन पिता-पुत्र की चर्चा इस समय पूरी दुनिया में है। इन दोनों पिता-पुत्र का लक्ष्य है-हिंदू राष्ट्र। अपने लक्ष्य के लिए दोनों बाप-बेटे दिन रात कड़ी मेहनत करते हैं और हिंदू प्रतिष्ठा को धुमिल करने वाली हर चीज के खिलाफ खड़े रहते हैं। ये दोनों अब तक बाबरी मस्जिद (अयोध्या), ज्ञानवापी मस्जिद (वाराणसी), ताज महल (आगरा) और कुतुब मीनार (नई दिल्ली) सहित 102 केस लड़ चुके हैं।

ये विष्णु जैन ही थे जो ज्ञानवापी परिसर के सर्वे टीम में मौजूद थे।। विष्णु जैन ने ही मीडिया को यह बताया था कि मस्जिद के वजूखाने में एक शिवलिंग पाया गया है, जिसके बाद यह पूरा मामला गर्मा गया। हालांकि, मुस्लिम पक्ष ने उसे एक फव्वारा बताया है।

पिता-पुत्र का अबतक का सफर

68 साल के हरि शंकर और उनके 36 वर्षीय बेटे विष्णु फिलहाल कम से कम छह चल रहे मामलों के केंद्र में हैं, जिसमें मस्जिदों में प्राचीन मंदिर के खंडहर के दावे शामिल हैं। इनमें लखनऊ में टीले वाली मस्जिद से लेकर म.प्र के धार में भोजशाला, यूपी के आगरा में ताजमहल, दिल्ली में कुतुब मीनार, मथुरा में शाही ईदगाह और वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद हैं। जैन पिता-पुत्र की तरफ से दायर किए गए केसों ने देश भर में इसी तरह के दावों की एक सीरीज शुरू कर दी है और पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 के कुछ प्रावधानों को चुनौती दी है।

सिर्फ वर्ष 2021 में ही जैन पिता-पुत्र ने ज्ञानवापी मस्जिद मुद्दे पर सात मामले दर्ज किए, जिनमें गंगा नदी और देवी नंदी और मां श्रृंगार गौरी की ओर से मामले शामिल हैं। मूल रूप से उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से ताल्लुक रखने वाले वकील हरि शंकर को साल 1993 में एक केस में विजय हासिल हुई थी। यह उनके लिए बड़ी जीत थी। ऐसा इसलिए, क्योंकि तब उन्हें बाबरी मस्जिद के दरवाजे हिंदुओं के लिए पूजा करने के लिए खोलने से जुड़ा कोर्ट का आदेश मिल गया था। जैन के बेटे विष्णु तब से उनकी इस पेशे में मदद कर रहे हैं।

बढ़ी घनी दाढ़ी और माथे पर काले टीका के साथ हरि शंकर साल 2019 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक अयोध्या राम जन्मभूमि मुद्दे पर टीवी डिबेट्स पर एक जाना-पहचाना नाम थे। पिता के लिए यह वर्ष 1993 में अयोध्या मामले से शुरू हुआ था- यह उनकी याचिका पर था कि जिला जज कृष्ण मोहन पांडे ने आदेश दिया कि मस्जिद के गेट हिंदुओं के पूजा के लिए खोले जाएं

विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष और अयोध्या में मंदिर ट्रस्ट श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय के मुताबिक, “हरि शंकर तब एक स्वतंत्र वकील थे। एक दिन वह कोर्ट गए और जज से बोले कि देवता पिछले आठ दिनों से भूखे हैं…जज ने हमें पूजा करने की अनुमति दी और इसने मामले की दिशा को अपरिवर्तनीय रूप से बदल दिया।” 1993 की जीत के बाद हरि शंकर “टीम का हिस्सा” बन गए।

बाद में जब यूपी के तत्कालीन सीएम मुलायम सिंह यादव ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में जज पांडे को नियुक्त करने पर आपत्ति जताई तो जैन ने एक और याचिका दायर की और जज का समर्थन किया। जैन ने तब केस जीत लिया था और जस्टिस पांडे को अंततः म.प्र हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच में नियुक्त किया गया।

बीते कुछ हफ्तों में जिन छह केस में जैन पिता-पुत्र की जोड़ी 30 साल से अपनी बात रख रही थी (ज्ञानवापी से ताजमहल तक), उन सभी को अचानक जजों ने उनकी दलीलों को स्वीकार करने और प्रारंभिक आदेश पारित करने के साथ पुनर्जीवित किया है।

मामलों में पिता की मदद करने वाले विष्णु शंकर ने बताया, ”जहां भी ऐसा मामला होगा, हम उससे लड़ेंगे।” बाप-बेटे की जोड़ी ने “कानूनी जागरूकता से हिंदू क्रांति” (“Hindu revolution by legal awareness”) के अपने बड़े कारण के लिए दायर 102 मामलों की लिस्ट बनाई। इनमें पटाखों पर बैन से लेकर ओवैसी के नेतृत्व वाले ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के राजनीतिक दल के रूप में पंजीकरण को चुनौती देने से लेकर वक्फ अधिनियम को चुनौती देना तक शामिल हैं

रोचक बात यह है कि इनमें से कई मामलों को खारिज कर दिया गया है। विष्णु शंकर कहते हैं- “हिंदू राष्ट्र की स्थापना का लक्ष्य हासिल किया जाएगा” क्योंकि लोग कम से कम मुद्दों से अवगत हो जाएंगे।

इलाहाबाद हाईकोर्ट से प्रैक्टिस शुरू करने वाले हरिशंकर की लीगल प्रैक्टिस काफी हद तक धर्म के इर्द-गिर्द घूमती रही। पुणे के बालाजी लॉ कॉलेज से ग्रैजुएशन करने वाले विष्णु शंकर भी पिता के नक्शे-कदम पर चलने और क्लाइंट्स का प्रतिनिधित्व करने की उम्मीद करते हैं। वह ऑन-रिकॉर्ड एक एडवोकेट हैं, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने का लाइसेंस मिला है।

विष्णु शंकर इसके अलावा हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के आधिकारिक प्रवक्ता भी हैं, जिसने दो मई को एएसआई के 2003 के आदेश को चुनौती देते हुए एक जनहित याचिका दायर की थी। इसमें मध्य प्रदेश के धार जिले के भोजशाला में हिंदुओं की पूजा करने पर प्रतिबंध लगाया गया था। दरअसल, भोजशाला एक एएसआई-संरक्षित 11वीं शताब्दी का स्मारक है, जहां आरोप है कि कमल मौला मस्जिद को देवी वाग्देवी के मंदिर के ऊपर बनाया गया है।

Back to top button