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मोदी सरकार की पहल से 18 साल बाद जवान को मिला शहीद का दर्जा, भावुक कर देगा परिवार का संघर्ष

देश की रक्षा के लिए अपनी जान न्योछावर कर देने वाले एक जवान के परिवार को 18 साल बाद उम्मीद की किरण दिखी है। 18 साल पहले जब जवान शहीद हुआ था पत्नी युवा थी और बच्चे बहुत छोटे। जवान की मौत के बाद उसके परिवार ने काफी संघर्ष भरा दौर देखा, शायद ही कोई ऐसा दिन हो जिसमें उनके आंसू एक बार ना गिरे हों।

राजस्थान के भरतपुर में देश के लिए शहादत देने वाले एक जवान के परिवार के लिए शुक्रवार का दिन खुशी देने वाला रहा। यहां कुम्हेर उपखंड के गांव रारह निवासी वीरेंद्र सिंह कुंतल, जो आतंकवादियों से लड़ते हुए शहीद हो गया थे, आज उनको 18 वर्ष बाद शहीद का दर्जा दिया गया है । बीएसएफ के अधिकारी शहीद के घर पहुंचे। साथ ही शहीद की पत्नी को उनके पति के शहीद होने का दर्जा के रूप में प्रमाण पत्र सौंपा गया ।

वीरेंद्र सिंह कुंतल 16 अगस्त 1994 में बीएसएफ में भर्ती हुए थे, जो बीएसएफ की 52 वीं बटालियन में तैनात थे। जब उनकी बीएसएफ यूनिट जम्मू कश्मीर में तैनात थी । तभी 9 जून 2004 की रात्रि में सूचना मिली थी कि अनंतनाग की एक मस्जिद में आतंकवादी आकर छुप गए हैं । सर्च ऑपरेशन के लिए बीएसएफ की एक टीम गई थी, जिसमें वीरेंद्र भी शामिल थे ।

जब मस्जिद में छुपे आतंकवादियों को बीएसएफ के जवानों ने चारों तरफ से घेर लिया , तो आतंकवादियों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी और ग्रेनेड से हमला कर दिया ।

आतंकवादियों के हमले में वीरेंद्र सिंह को गोली लगी थी, जिससे वह शहीद हो गए थे । वीरेंद्र सिंह के शहीद होने के बाद उनके घर में पत्नी सुमन देवी और एक पुत्र व पुत्री है । जो फिलहाल शहर कोतवाली थाना क्षेत्र में रह रहे हैं ।

BSF में भी मिला शहीद का दर्जा

बीएसएफ के डिप्टी कमांडेंट मनोज कुमार ने बताया कि वीरेंद्र सिंह अनंतनाग में आतंकवादियों के लिए सर्च अभियान में शामिल होने गए थे । आतंकवादी मस्जिद में छुपे हुए थे जिन्होंने बीएसएफ के जवानों पर हमला बोल दिया था । दोनों तरफ से हुई मुठभेड़ में वीरेंद्र सिंह की गोली लगने से मौत हो गई थी , लेकिन उस समय बीएसएफ में शहीद का दर्जा नहीं दिया जाता था ।

लेकिन अब बीएसएफ सहित सभी पैरामिलिट्री फोर्स में शहीद का दर्जा दिया जाता है । आज हम वीरेन्द्र सिंह को शहीद का दर्जा देने के लिए उनके घर पहुंचे हैं । उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की पहल के बाद अब बीएसएफ के जवानों को भी शहीद का दर्जा मिलने लगा है।

परिवार ने किया कड़ा संघर्ष

ग्रामीणों के अनुसार अनंतनाग में शहीद हुए वीरेंद्र सिंह इस घर में अकेले कमाने वाले थे। उनके एक बेटा और एक बेटी है, जिनकी पढ़ाई जारी है। वीरेंद्र सिंह के जाने के बाद पूरा परिवार खेती बाड़ी पर निर्भर रहा। इस दौरान परिवार ने कड़ा संघर्ष किया, उनकी पत्नी और बच्चों ने भी कठिन परिस्थितयों का सामना किया। शहीद का दर्जा मिलने के बाद शहीद के बच्चों को नौकरियों में फायदा मिलेगा ।

केंद्र और राज्य सरकार की ओर से दिए जाने वाला पैकेज मिल सकेगा। शहीद के परिवार को 4000 स्क्वायर फुट तक मकान निर्माण के लिए कंपनी की ओर से मुफ्त में सीमेंट भी उपलब्ध कराया जाएगा।

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