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लोग देखते रहे और ‘चाणक्य’ डोभाल पूरा कर आए मिशन अफगानिस्तान : छोटा कद लेकिन बहुत बड़ा किरदार

जब से अजित डोभाल भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बने हैं उन्होंने भारत के लिए एक से बढ़कर एक रणनीति बनाई और उसे अंजाम तक पहुंचाया है। ऐसे ही उन्हें चाणक्य नहीं कहा जाता है। अभी हाल ही में दुशाम्बे में हुई एक अहम बैठक में फिर डोभाल ने अपनी काबिलियत साबित कर दी है। डोभाल का कद छोटा है लेकिन हमेशा वो बड़ा किरदार निभाते रहे हैं। ताजिस्कस्तान की राजधानी दुशाम्बे से आई तस्वीर में डोभाल अन्य सभी से कद-काठी में सबसे छोटे हैं, लेकिन व्यक्तित्व सबसे विशाल।

दुशाम्बे में अहम बैठक

दुशाम्बें में अफगानिस्तान के वर्तमान की पड़ताल और भविष्य की रणनीति पर चर्चा हुई। ‘अफगानिस्तान पर क्षेत्रीय सुरक्षा संवाद. (Regional Security Dialogue on Afghanistan) के बैनर तले हुए इस महामंथन में भारत और ताजिकिस्तान के साथ-साथ रूस, कजाखिस्तान, उज्बेकिस्तान, ईरान, किर्गिजिस्तान और चीन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों ने हिस्सा लिया।

दुशाम्बे में डोभाल ने दिखाई दिलेरी

इस मौके पर एनएसए डोभाल ने साफ-साफ शब्दों में कह दिया कि अफगानिस्तान के मामलों से भारत को दूर रखने का ख्वाब कोई नहीं देखे। उन्होंने दो-टूक लहजे में कहा कि भारत अपने पड़ोसी देश अफगानिस्तान के विषयों पर एक महत्वपूर्ण पक्षकार है, था और आगे भी रहेगा चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों और कितनी भी बदल जाएं।

पाकिस्तान की फिर हुई किरकिरी

डोभाल का यह संदेश मूलतः पाकिस्तान के लिए है जिसने सिर्फ सालभर पहले अफगानिस्तान से भारत को खदेड़ने का ख्वाब देखा था, लेकिन आज ऐसी हालत हो गई है कि अफगानिस्तान पर चौथे दौर के क्षेत्रीय सुरक्षा संवाद में उसका कोई अता-पता तक नहीं है।

यह हाल तब है जब अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के इसी मंच पर चीन मौजूद है जिस पर पाकिस्तान अपना सदाबहार दोस्त होने के दावेदारी करता है। पाकिस्तान की नींद तो तब ही उड़ गई थी जब नवंबर 2021 में अफगानिस्तान पर तीसरे क्षेत्रीय सुरक्षा संवाद का आयोजन किया गया था।

भारत का एजेंडा ही चलेगा!

दुशान्बे का आयोजन इसी सिलिसले की चौथी कड़ी है जिसमें नई दिल्ली घोषणापत्र को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। मीटिंग में मौजूद सभी एनएसए ने एक-सुर से उस बात पर हामी भरी जो भारत का मेन एजेंडा है यानि- अफगानिस्तान से आतंकवाद का खात्मा।

सभी देशों ने कहा कि अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करना सबकी प्राथमिक जिम्मेदारी है, इसके लिए रचनात्मक रास्तों की तलाश करनी होगी ताकि अफगानिस्तान ही नहीं, पूरे इलाके को ही आंतकवाद के खतरों से मुक्त किया जा सके।

भारत-अफगान संबंध हमेशा से विशेष

डोभाल ने इस मौके पर कहा, ‘भारत, अफगानिस्तान का एक महत्वपूर्ण पक्षकार था और है। अफगानिस्तान के लोगों के साथ हमारा सदियों का विशेष संबंध है और इन्हीं संबंधों के आधार पर भारत फैसले करता रहेगा और कोई इसे बदल नहीं सकता।’ उन्होंने मीटिंग से इतर ईरान, ताजिकिस्तान, रूस एवं अन्य साझेदारों से अलग से बातचीत की। इस बातचीत में उन्होंने अपने समकक्षों से कहा कि भारत और भारतीयों के दिलों में अफगानियों का अलग स्थान है।

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