समाचार

कुतुब मीनार को लेकर मोदी सरकार का बड़ा कदम, परिसर की खुदाई करने का आदेश दिया

वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद विवाद के बीच अब कुतुब मीनार परिसर में भी खुदाई की जाएगी। भारत सरकार के केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने इस आशय के निर्देश भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को दे दिए हैं।

संस्कृति मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि कुतुब मीनार परिसर में खुदाई के साथ ही मूर्तियों की आइकनोग्राफी भी कराई जाए। इस खुदाई के बाद एएसआई की तरफ से संस्कृति मंत्रालय को रिपोर्ट सौंपी जाएगी। संस्कृति सचिव गोविंद मोहन ने कुतुब मीनार परिसर का निरीक्षण किया था जिसके बाद केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय की तरफ से यह निर्देश जारी किया गया है।

पर्यटन सचिव ने किया कुतुब मीनार परिसर का निरीक्षण

कुतुब मीनार परिसर में खुदाई के निर्णय से पहले 21 मई को संस्कृति सचिव गोविंद मोहन ने 12 लोगों की टीम के साथ परिसर का दौरा किया था। टीम में इतिहासकार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधिकारियों के साथ रिसर्चर भी शामिल थे। कुतुब मीनार परिसर में खुदाई को लेकर एएसआई के अधिकारियों का कहना है कि परिसर में 1991 के बाद किसी भी तरह की खुदाई नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि खुदाई की शुरुआत मीनार के दक्षिण में मस्जिद से 15 मीटर की दूरी पर की जा सकती है।

क़ुतुब मीनार को लेकर क्या है विवाद?

हिन्दू संगठनों का दावा है कि क़ुतुब मीनार असल में विष्णु स्तम्भ है, और मुग़ल आक्रांताओं ने यहां मौजूद दर्जनों जैन-हिन्दू मंदिरों को तोडा था और वहां मस्जिद का निर्माण करा दिया था। इस्लामिक आक्रांताओं ने उस वक़्त हिन्दुओं के हौसले को तोड़ने के लिए मंदिरों में रखी भगवान की मूर्तियों को खंडित कर दिया था और उन्हें सलाखों के पीछे रख कर शैतान बताया था।

सुप्रीम कोर्ट में क़ुतुब मीनार में रखी भगवान गणेश की प्रतिमा को अन्यत्र स्थान में लेजाकर विधिवत स्थापित करने की याचिका लगाई गई थी लेकिन कोर्ट ने किसी भी प्रकार की छेड़-छाड़ पर रोक लगा दी थी।

बीते कुछ महीनों में हिन्दू समर्थित दलों ने क़ुतुब मीनार के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ भी शुरू कर दिया था। लोगों का कहना है कि क़ुतुब मीनार विष्णु स्तम्भ था और इस स्थान का नाम बदल देना चाहिए।

Back to top button