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टिकैत भाईयों को भारतीय किसान यूनियन से निष्कासित किया गया, BKU को राजनीतिक बनाने का आरोप

भारतीय किसान यूनियन की आड़ में अपनी राजनीति चमका रहे टिकैत बंधुओं को आखिर इस संगठन से बाहर का रास्ता दिखा दिया।  भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) ने रविवार को राकेश टिकैत को निष्कासित कर दिया। राकेश टिकैत के अलावा, नरेश टिकैत को भी राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटा दिया गया है। सूत्रों से पता चला है कि टिकैत पर किसान नेताओं ने ‘राजनीति खेलने’ का आरोप लगाया है।

अराजनैतिक नाम से नया संगठन

राजेश सिंह चौहान, राजेंद्र सिंह मलिक, अनिल तालान, हरनाम सिंह वर्मा, बिंदु कुमार, कुंवर परमार सिंह, नितिन सिरोही समेत तमाम नेता नए संगठन में शामिल हुए हैं। भारतीय किसान यूनियन ने अराजनैतिक के नाम से नया संगठन बनाया है। राजेश सिंह चौहान को भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया।

संगठन में हो गया दो फाड़

विधानसभा चुनाव के दौरान राकेश टिकैत के की ओर से किए गए राजनैतिक बयानों की वजह से संगठन में दो फाड़ की बात कही जा रही है। भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक का राजनीति से कोई मतलब नहीं होगा। किसान हितों के लिए यह संगठन काम करेगा। नए संगठन के राष्ट्रीय महासचिव अनिल तलान ने नारे के स्वर में कहा, किसान तुम बढ़े चलो, किसान तुम बढ़े चलो।

टिकैत को हटाने के साथ, किसान के विरोध का नेतृत्व करने वाले संगठन को दो गुटों में विभाजित किया गया है। किसान नेता राजेश सिंह चौहान ने नरेश टिकैत की जगह ली है और उन्हें नए बीकेयू (अराजनीतिक) प्रमुख के रूप में नियुक्त किया गया है।

Rakesh Tikait

 ‘BKU को राजनीतिक क्षेत्रमें बदल रहा था टिकैत

शनिवार को एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए चौहान ने कहा कि एकीकृत भारतीय किसान संघ बनाने में काफी मेहनत की गई है, जिसे किसानों के हितों की रक्षा के लिए बनाया गया था। हालांकि, टिकैत के तहत संगठन एक ‘राजनीतिक क्षेत्र’ में बदल रहा था। यह कहते हुए कि किसान संगठन किसी भी ‘राजनीतिक दल’ के लिए काम नहीं करेगा, नेता ने एक नए गुट ‘भारतीय किसान संघ (अराजनीतिक)’ के गठन की घोषणा की।

बीकेयू (ए) प्रमुख ने कहा, “आज हमारे संगठन ने एक बैठक की। हमारे नए संगठन का नाम भारतीय किसान संघ (अराजनीतिक) होगा। राकेश टिकैत या नरेश टिकैत पर हमारी कोई टिप्पणी नहीं है, वे जो करना चाहते हैं वह कर सकते हैं। लेकिन बीकेयू एक राजनीतिक क्षेत्र में बदल गया था। यह राजनीति से प्रेरित था।”

उन्होंने आगे कहा, “हमने राकेश टिकैत से बात की और अपनी चिंता व्यक्त की। हमने बीकेयू बनाने के लिए बहुत मेहनत की, लेकिन उन्होंने हमें एक पार्टी का समर्थन करने के लिए कहा। हमने इसका विरोध किया। हमारा मकसद किसानों की समस्याओं को देखना है। हम किसी पार्टी के लिए काम नहीं करेंगे।” तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने के साथ किसान के विरोध के बाद, राकेश टिकैत को राजनीतिक दलों के लिए प्रचार करते देखा गया।


मार्च 2021 में, वह पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम और कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के लिए प्रचार करने पहुंचे थे। भाजपा ने आरोप लगाया था कि ममता बनर्जी ने टिकैत के नेतृत्व वाले किसानों के विरोध को ‘पृष्ठभूमि समर्थन’ दिया था। उत्तर प्रदेश में उनके बड़े भाई नरेश टिकैत ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि राज्य चुनाव में गठबंधन उम्मीदवारों (समाजवादी पार्टी-रालोद) का समर्थन करेगा।

हालांकि राकेश टिकैत ने ‘बीजेपी को हराने’ के नारों के साथ यूपी के मतदाताओं के पास जाने की कसम खाई, लेकिन पार्टी की जीत के बाद उन्होंने पूरी तरह से यू-टर्न लिया और कहा कि लोगों की इच्छा सर्वोपरि है।

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