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CM मान संग बैठक के बाद मैनर भूले पंजाब के टीचर-प्रिंसिपल, खाने की प्लेट के लिए मारामारी -VIDEO

शिक्षक और गुरु से अपेक्षा की जाती है कि वो अपने स्टूडेंट औऱ शिष्य को मैनर यानि आचरण सिखाएगा। लेकिन पंजाब में शिक्षकों और प्रधानाचार्यों की जो तस्वीर सामने आई है उसने साफ दिखा दिया है कि क्यों समाज में नैतिक शिक्षा को लेकर इतनी गिरावट आई है। जिन टीचर से उम्मीद की जाती है कि वो अपने स्टूडेंट को मैनर और नैतिकता सिखाएंगे वो खुद मैनर भूल कर खाने की प्लेट पाने के लिए मारामारी करने लगे। इनमें इतना भी धर्य नहीं थो कि वो शांति पूर्वक अपनी बारी का इंतजार करते।

खाने के लिए मारामारी

पंजाब में मुख्य मंत्री और शिक्षा मंत्री के साथ बैठक के बाद अध्यापकों में ऐसी होड़ मची जैसे उन्होंने जमाने से खाना ही न खाया हो। पुरुष अध्यापकों ने महिला अध्यापकों तक का लिहाज नहीं किया और एक दूसरे पर लपकते हुए प्लेटों पर टूट पड़े। हालांकि खाने की प्लेटों का वितरण करने के लिए विशेष तौर पर कैटरिंग करने वाली कंपनी ने एक व्यक्ति की ड्यूटी लगा रखी थी, लेकिन अध्यापक उसके हाथों से भी प्लेटें छीन कर ले गए। जब प्लेट खत्म हो गईं तो कई एक दूसरे से प्लेट छीनते हुए भी दिखे।

शिक्षकों की हरकत कैमरे में कैद

खाने के लिए सारे शिष्टाचारों-संस्कारों को भूले अध्यापकों की यह हरकत मौके पर मौजूद कुछ बुद्धिजीवियों ने अपने मोबाइल कैमरों में कैद कर ली और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। इस पर लोगों के कई तरह के कमेंट आ रहे हैं। लोग अध्यापकों को पढ़े लिखे अनपढ़ों की संज्ञा दे रहे हैं। इनसे बेहतर तो गांव के अनपढ़ लोग होते हैं, जिन्हें बेसिक मैनर्स पता होते हैं।

खूब ट्रोल हो रहे शिक्षक

शिक्षकों की ऐसी हरकतों पर कुछ लोग सरकारी अमले को भी ट्रोल करते नजर आए। यूजर्स लिख रहे हैं कि अध्यापकों की हरकत से अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्कूलों में बच्चों के लिए बनने वाले मिड-डे-मील का क्या हाल होता होगा। एक सज्जन ने लिखा है कि दिल्ली सरकार से प्रशिक्षण का यह भी समझौता कर लें कि अध्यापकों को कैसे बिहेव करना है। इसका प्रशिक्षण उन्हें दिल्ली में दिलवाया जाए। सरकार के उच्च स्तरीय कार्यक्रमों के लिए भी दिल्ली के अध्यापकों को ही आउटसोर्स कर लेना चाहिए।

सीएम भगवंत मान को भी किया ट्रोल

कुछ लोग मुख्यमंत्री भगवंत मान को भी ट्रोल कर रहे हैं कि ऐसे अध्यापकों को विदेश भेज कर क्यों अपनी इमेज खराब करने जा रहे हो। पहले इन्हें यहीं रखकर नैतिक शिक्षा और शिष्टाचार सिखाएं। एक यूजर ने कमेंट किया है कि जब मीटिंग वर्चुअल हो सकती थी तो फिर लाखों रुपए बर्बाद करने की क्या जरूरत थी। कम से कम इज्जत तो ढकी रहती। गौरतलब है कि इन शिक्षकों को एसी बस में बिठाकर मीटिंग के लिए लाया गया था।

एक ने कमेंट किया है कि यह विदेश में जाकर भी ऐसा ही करेंगे। बादलों ने भी कुछ बाबुओं को प्रशिक्षण के लिए विदेश भेजा था, लेकिन उसका नतीजा नहीं निकला।

एक व्यक्ति ने लिखा है कि भगवंत मान ने गुरुओं की लंगर प्रथा से भी शायद कुछ नहीं सीखा है। किस तरह से परशादे (खाना) संगत में बरताए जाते हैं। उसी प्रथा का अनुसरण किया होता तो कम से कम ऐसा घटिया मंजर देखने को न मिलता।

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