बॉलीवुड

तारक मेहता की शूटिंग करते दुनिया से विदा लेना चाहते थे नट्टू काका, ये आखिरी इच्छा पूरी भी हो गई

जब कोई अपने काम को पूरी ईमानदारी और लगन से करता है तो उस काम का प्रतिफल ना केवल उसकी आजीविका चलाता है बल्कि आत्मिक संतोष और आनंद भी प्रदान करता है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति में अपने काम के प्रति अत्यधिक श्रद्धा उत्पन्न हो जाती है और वो चाहता है कि वो जिए भी इसी काम के लिए और मरे भी तो इसी काम के लिए।

ऐसा ही कुछ हुआ तारक मेहता सीरियल में नट्टू काका का किरदार निभाने वाले घनश्याम नायक का। जिन्होंने ये इच्छा जाहिर की थी वो इस दुनिया से विदा लें तो तारक मेहता के सेट पर और परिवार ने उनकी ये इच्छा पूरी कर दी है।

टीवी जगत के सबसे पॉपुलर कॉमेडी शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ वर्षों से दर्शकों के दिलों पर राज कर रहा है। दर्शकों के पसंदीदा सीरियलों में से एक यह शो पिछले 14 वर्षों से लोगों के चेहरे पर मुस्कुराहट ला रहा है। इन मुस्कुराहटों का सबसे बड़ा कारण शो में काम कर रहे कलाकार हैं और इन्हीं कलाकारों में से एक थे जेठालाल की दुकान पर काम करने वाले नट्टू काका। संघर्ष के दिनों इस मंझे हुए कलाकार के जीवन में ऐसा समय भी आया था, जब उनके पास उनके बच्चों की फीस भरने तक के पैसे नहीं थे।

बाल कलाकार के तौर पर शुरू हुआ फिल्मी सफर

12 मई 1944 को गुजरात के उंधई गांव में जन्में घनश्याम नायक ने साल 1960 में आई फिल्म ‘मासूम’ से बतौर बाल कलाकार अपने अभिनय के सफर की शुरुआत कर दी थी। गुजराती म्यूजिक निर्देशक रंगलाल नायक के बेटे घनश्याम ने महज सात साल की उम्र में बॉलीवुड में कदम रखकर उनका मान बढ़ा दिया था। इसके बाद घनश्याम ने थियेटर में भी काम किया लेकिन  नट्टू काका’ बनने तक का उनका सफर आसान नहीं था।

संघर्षों भरा रहा शुरूआती सफर

उस जमाने में घनश्याम नायक को पूरे-पूरे दिन काम करने के बाद भी मेहनत के अनुसार पैसे नहीं मिलते थे। वह अपने जीवन के 24-24 घंटे देने के बाद भी सिर्फ तीन रुपये कमाते थे। इतना कम मेहनताना मिलने के कारण उन्हें कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। अपने दोस्तों के आगे चंद पैसों के लिए हाथ फैलाना पड़ता था।

प्लेबैक सिंगिंग भी की

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि घनश्याम नायक नट्टू काका बनने से पहले कई कलाकारों के साथ काम कर चुके हैं। उनका ‘हम दिल दे चुके सनम’ का भवई का किरदार आज भी लोगों का पसंदीदा किरदार है। गौरतलब है कि घनश्याम नायक अभिनय के साथ-साथ गाना भी गाते थे। उन्होंने 12 से ज्यादा गुजराती फिल्मों में आशा भोसले और महेंद्र कपूर के साथ गाने गाए।

तारक मेहता से आई स्थिरता

घनश्याम नायक को अपनी कड़ी मेहनत की वजह से नट्टू काका का रोल मिला। रिपोर्ट्स के अनुसार उन्हें इस रोल को निभाने के लिए प्रति एपिसोड करीब 30 हजार रुपये मिलते थे। उनका मानना था कि शो में काम शुरू करने के बाद ही उनकी जिंदगी में स्थिरता आई और उनकी आमदनी का एक फिक्स जरिया बना। इस किरदार को मिलने के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। कभी किराये के मकान में रहने वाले घनश्याम आखिरी समय में दो घरों के मालिक थे।

जीवन के आखिरी समय शो से हुए दूर

कोरोना काल की वजह से शो की शूटिंग रोक दी गई थी हालांकि जब शूटिंग शुरू हुई तब उम्रदराज कलाकारों को सेट पर नहीं बुलाने के आदेश जारी किए गए थे। शो से दूर रहने की वजह कोरोना के साथ-साथ उनकी बीमारी भी थी। वह अपने आखिरी दिनों में कैंसर से जूझ रहे थे और इसके चलते उनकी कई सर्जरी हुई थीं। घनश्याम पूरे 9 महीनों तक छुट्टी पर रहे थे।

आखिरी इच्छा हुई पूरी

घनश्याम नायक की आखिरी इच्छा थी कि वह अंतिम सांस तक ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ की शूटिंग करते हुए लें। और 3 अक्तूबर 2021 को उनके निधन के बाद ऐसा ही हुआ। उनके परिवार वालों ने निधन के बाद उनका मेकअप करवाया और उन्होंने नट्टू काका बन कर ही इस दुनिया को अलविदा कहा था।

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