अध्यात्म

जन्म से पहले तय हो जाती है व्यक्ति की आयु, धन-संपत्ति समेत 5 चीजें, ग्रंथों में है पूरा रहस्य

हमारे ग्रंथों में गूढ़ रहस्यों से जुड़ी अनेक बाते बताई गई हैं, जिनके बारे में सभी लोग नहीं जानते। आज हम आपको पंचतंत्र के हितोपदेश में बताई गई ऐसी ही एक खास बात बता रहे हैं। पं. विष्णु शर्मा द्वारा रचित इस ग्रंथ के अनुसार, जब कोई बच्चा मां के गर्भ में होता है तभी भगवान द्वारा उसके जीवन से जुड़ी 5 बातें तय कर दी जाती हैं।

हितोपदेश के एक श्लोक में लिखा है, जो इन पांचों बातों का जबाव देने के लिए काफी है। इस श्लोक में कुछ ऐसी बातों के बारे में बताया गया है जो बच्चे के मां के गर्भ में रहते हुए ही विधाता तय कर देते हैं। आज के समय में भले ही ये बात अजीब लगे, लेकिन हिंदू धर्म में आज भी इन बातों पर विश्वास किया जाता है। जानिए कौन-सी हैं वो 5 बातें-

श्लोक

आयु: कर्म च वित्तंच विद्या निधनमेव च।
पंचैतान्यपि सृज्यन्ते गर्भस्थस्यैव देहिन:।।

 अर्थ- विधाता के द्वारा आयु, कर्म, धन-संपत्ति, शास्त्रों का ज्ञान और मृत्यु, ये 5 बातें प्राणी जब माता के गर्भ में होता है, तभी निर्धारित कर दी जाती हैं।

 उम्र: पंचतंत्र के इस श्लोक के अनुसार, जब कोई बच्चा अपनी मां के गर्भ में होता है, तब ही उसकी आयु का निर्धारण विधाता द्वारा कर दिया जाता है। यानी होने वाला बच्चा कितने समय पर पृथ्वी पर रहेगा इन सब बातों का निर्धारण ईश्वर द्वार पहले ही कर दिया जाता है।

 काम: गर्भ में पल रहा शिशु जन्म के बाद जब युवावस्था में प्रवेश करेगा तो आजीविका के लिए वो कौन-सा काम करेगा, ये भी उसके गर्भ में रहते ही तय हो जाता है। वो बच्चा बिनजेस में अपना करियर बनाएगा या कोई नौकरी करेगा, ईश्वर ये सब चीजें पहले से ही तय कर देता है।

 धन-संपत्ति: माता के गर्भ में सांस ले रहा है शिशु जन्म लेने के बाद कितनी धन-दौलत कमाएगा और कितनी संपत्ति अर्जित करेगा। उसे धन-संपत्ति का सुख मिलेगा या भी नहीं। वह स्वयं धन-संपत्ति अर्जित करेगा या उसे ये जब चीजें पैतृक यानी अपने पूर्वजों से मिलेंगी। ये बात भी परमात्मा पहले ही निर्धारित कर देता है।

 शिक्षा: गर्भस्थ शिशु पढ़ाई में कितना होशियार होगा। वह किस क्षेत्र में पढ़ाई करेगा और कितनी पढ़ाई करेगा। ये सभी बातें भी भगवान पहले ही तय कर देता है।

मृत्यु: मृत्यु का समय और तरीका भी ईश्वर पहले ही तय कर देते है। ये बात अन्य धर्म ग्रंथों में भी लिखी गई है। प्रसिद्ध नीतिशास्त्री चाणक्य ने भी इन पांचों बातों का उल्लेख अपनी किताब में किया है।

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