शुक्रवार के दिन चाँद के इस उपाय को करने से नहीं होती जीवन में कभी धन की कमी

11 अगस्त के दिन शुक्रवार पड़ रहा है। शुक्रवार का दिन धन की देवी माँ लक्ष्मी को समर्पित होता है। जिस भी व्यक्ति को धन सम्बन्धी कोई समस्या हो वह इस दिन सच्चे मन से माँ लक्ष्मी की आराधना करता है तो उसकी सभी धन सम्बन्धी समस्याओं का निवारण हो जाता है। इस बार शुक्रवार के दिन संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत और बहुला चतुर्थी का शुभ संयोग बन रहा है। यह दोनों ही पर्व भगवान गणेश को समर्पित हैं।

गणेश जी को मानते हैं माँ लक्ष्मी का पुत्र

गणेश जी को माता लक्ष्मी का पुत्र माना जाता है। यही वजह है की दोनों की पूजा एक साथ की जाती है। आज हम आपको एक ऐसे विशेष उपाय के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे करने से आप अपनी धन सम्बन्धी किसी भी इच्छा को पूरी कर सकते हैं। केवल यही नहीं व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक कष्टों से भी छुटकारा मिलता है। इस पूजन से निःसंतान लोगों को संतान की भी प्राप्ति होती है। घर-परिवार में माता लक्ष्मी का आशीर्वाद बना रहता है एवं सुख-शांति बनी रहती है।

पुरे दिन रखें मौन व्रत

चन्द्रमा के उदय होने पर उन्हें अर्घ्य दें। कल के दिन चंद्रमा रात 9 :43 पर उदय होगा। शंख में दूध, सुपारी, गंध तथा चावल से भगवान श्री गणेश और साथ में चतुर्थी तिथि को अर्घ्य दें। भगवान को जौ तथा सत्तू का भोग लगायें और पूजा करने के उपरांत भोग लगाये हुए प्रसाद का ही भोजन करें। चन्द्र उदय होने से पहले पुरे दिन मौन रखें। ऐसा करने से जीवन में आपको कभी भी धन की कमी नहीं होगी।

पूजा की विधि

प्रातःकाल दैनिक क्रियाओं से निवृत्त होने के बाद गंध, चावल, पुष्प, द्रव्य, पुंगी फल और जल लेने के बाद विधिवत नाम गोत्र वंश का उच्चारण करके संकल्प लेंशास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन गाय के दूध पर मूल रूप में उसके बछड़े का अधिकार होता है। इसलिए इस दिन गाय के दूध से बनी हुई किसी चीज का उपयोग नहीं करना चाहिए। इस दिन उपवास रखकर मिट्टी से बने हुए शेर, गाय और बछड़े की पूजा करनी चाहिए।

इस दिन शेर बंकर बहुला नामक गाय की परीक्षा लेने वाले भगवान श्रीकृष्ण की कथा सुनें। संध्या के समय गणपति, माता गौरी, भगवान शंकर, श्रीकृष्ण के साथ गाय के बछड़े की पूजा करें। इस दिन तिल के तेल का दीपक जलाना अत्यंत ही शुभ माना जाता है। चन्दन का धूप दिखाने के बाद चन्दन का तिलक लगायें। पीले फूल अर्पित करने के बाद चने और गुड़ का भोग लगायें। इसके बाद चावल, फूल, दूर्वा, सुपारी और रोली दोनों हाथ में लेकर भगवान श्रीकृष्ण और गाय की इस श्लोक के साथ वंदना करनी चाहिए।

श्लोक

कृष्णाय वासुदेवाय गोविन्दाय नमो नमः।। त्वं माता सर्वदेवानां त्वं च यज्ञस्य कारणम्। त्वं तीर्थं सर्वतीर्थानां नमस्तेऽस्तु सदानघे।।

पूजा करने के बाद मिट्टी से बने शेर, गाय और उसके बछड़े पर चावल, दूर्वा, रोली, फूल, सुपारी और दक्षिणा चढ़ाने के बाद निम्न मंत्र से तुलसी की माला का जाप करें।

मंत्र

याः पालयन्त्यनाथांश्च परपुत्रान् स्वपुत्रवत्। ता धन्यास्ताः कृतार्थश्च तास्त्रियो लोकमातरः।।