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पीके ने 9 घंटे के प्रजेंटेशन की पूरी कहानी बताई, क्यों सिर्फ सोनिया ने देखा, क्यों ठुकराया ऑफर

पिछले दिनों कांग्रेस पार्टी के नेताओं और चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर यानि पीके के बीच हुई मुलाकातों और प्रजेंटेशन की काफी चर्चा रही। लंबे प्रजेंटेशन के बाद ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि प्रशांत किशोर कांग्रेस के संगठन में कोई बड़ा पद संभालने वाले हैं।

कांग्रेस ने उन्हें एक पद का ऑफर भी दिया लेकिन पीके ने उसे ठुकरा कर सारे कयासों पर विराम लगा दिया। आखिर क्या हुआ जो बात नहीं बन पाई और प्रजेंटेशन के लिए उनकी दो साल से चल रही मेहनत पर पानी फिर गया। इस सब सवालों पर उन्होंने एक टीवी चैनल से इंटरव्यू के दौरान खुलकर जवाब दिया।

8-9 घंटे का प्रजेंटेशन, सिर्फ सोनिया ने पूरा देखा

प्रशांत के मुताबिक, उनका प्रजेंटेशन 8-9 घंटे का था। उन्‍होंने इस बात को सिरे से खारिज किया कि इसमें 600 स्‍लाइड थीं। उन्‍होंने बताया कि कांग्रेस प्रेसिडेंट सोनिया गांधी के सिवाय कमिटी में कोई नहीं है जिसने इस पूरे प्रजेंटेशन को देखा है। जिसे जो दिखाया गया है वो उसके हिसाब से आकर बता रहा है।

कांग्रेस को मजबूत करने का सुझाव दिया

प्रशांत किशोर ने टीवी चैनल आज तक के साथ बातचीत में इस पूरे घटनाक्रम के बारे में बताया। उन्‍होंने कहा कि हिंदुत्‍व, राष्‍ट्रवाद और लाभार्थी (सरकारी स्‍कीमें) के बूते बीजेपी आगे बढ़ेगी। इसकी काट को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में किशोर बोले कि उनका पूरा प्रजेंटेशन इस बात को लेकर है कि कांग्रेस खड़ी या मजबूत कैसे होगी। इसका बीजेपी को हराने से लेनादेना नहीं है। इसके पूरे स्‍वरूप में यह बात है कि आप इंडिया जीतेंगे कैसे न कि आप बीजेपी को हराएंगे कैसे।

नेता नहीं बन पाए तो क्‍या करेंगे?

इस सवाल के जवाब में किशोर बोले कि इसमें क्‍या दिक्‍कत है-घर बैठेंगे। जब उनसे पूछा गया कि क्‍या कांग्रेस के दरवाजे हमेशा के लिए बंद हो गए हैं या कुछ गुंजाइश है तो किशोर ने कहा कि वो बड़े हैं। उन्‍होंने कहा, ‘मेरी इतनी ताकत नहीं है कि मैं किसी के लिए दरवाजे खोलूं या बंद करूं। वो बुलाएंगे तो बात करेंगे।’

PK के मन शंका थी

प्रशांत किशोर ने कहा वो बस इतना चाहते थे कि जो ब्‍लूप्रिंट पेश किया गया है उसे कांग्रेस जितने तरीके से चाहे उसे एग्‍जामिन कर ले। एक बार सहमति बन जाए तो उसे लागू करने से पीछे नहीं हटना है बस शर्त इतनी थी। इसे लागू करने के लिए उन्‍होंने जो एम्‍पावर्ड एक्‍शन ग्रुप (EAG) बनाया था, उसे लेकर उनके मन में शंका थी। यही कारण था कि वो कांग्रेस में शामिल नहीं हुए।

अब कौन इस ब्‍लूप्रिंट को लागू करेगा ?

प्रशांत किशोर ने इसके जवाब में कहा कि अगर वो सोचते हैं कि इसे पार्टी लागू कर सकती है तो उन्‍हें कोई दिक्‍कत नहीं है। उनकी जितनी समझ थी वो राय दे चुके हैं। 600 स्‍लाइड के सवाल पर उन्‍होंने बताया कि ऐसी कोई बात नहीं है। पता नहीं कहां से मीडिया वालों ने इसे उड़ाया है। असल में कितनी स्‍लाइड थीं, इस सवाल को प्रशांत किशोर हंसकर टाल गए।

कौन एंट्री में दुश्‍मन बन गया?

प्रशांत किशोर ने जवाब दिया कि किसी ने मना नहीं किया है। उन्‍होंने खुद पार्टी में शामिल होने से इनकार किया है। वो समझते हैं कि ईएजी की कांग्रेस के कॉन्‍स्टीट्यूशन में लॉन्‍ग टर्म व्‍यवस्‍था नहीं है। उन्‍हें लगता है कि अगर वो ईएजी को लेकर आगे काम करेंगे तो इसमें और मौजूदा व्‍यवस्‍था में टकराव की स्थिति पैदा होगी। इसी को देखते हुए उन्‍होंने मना कर दिया।

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